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केरल में मूसलाधार बारिश, भूस्खलन के बीच कई जिलों में बाढ़ की स्थिति

केरल के विभिन्न जिलों में रेड अलर्ट की चेतावनी जारी करते हुए आईएमडी ने कहा कि अगले 24 घंटों में 20 से अधिक सेमी बारिश होने की संभावना है.

भारी बारिश के बाद कोच्चि में चारों तरफ पानी-पानी (फोटो-PTI) भारी बारिश के बाद कोच्चि में चारों तरफ पानी-पानी (फोटो-PTI)

  • अगले 24 घंटों में 20 से अधिक सेमी बारिश के आसार

  • भूस्खलन में मरने वालों की संख्या बढ़कर 43 हो गई है

केरल के विभिन्न हिस्सों में भारी बारिश के पूर्वानुमानों के बीच रविवार को दिनभर तेज वर्षा होती रही. राज्य के निचले हिस्सों में बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई है. वहीं इडुक्की जिले में हाल ही में बड़े पैमाने पर हुए भूस्खलन में मरने वालों की संख्या बढ़कर 43 हो गई है. मलबे से 17 और शव निकाले गए हैं.

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने केरल के कासरगोड, कन्नूर, वायनाड, कोझिकोड, मलप्पुरम और अलाप्पुझा जिलों में बेहद भारी बारिश के आसार जताए हैं.

रेड अलर्ट की चेतावनी जारी करते हुए आईएमडी ने कहा कि इन जिलों में अगले 24 घंटों में 20 से अधिक सेमी बारिश होने की संभावना है. आईएमडी के अधिकारियों ने कहा कि अलप्पुझा के उत्तर में लगभग सभी जिलों में 20 सेमी से अधिक बारिश होने के आसार हैं.

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मौसम विभाग के मुताबिक केरल में मंगलवार से बारिश में कमी आने की संभावना है. वहीं राजमला के पास पेटीमुडी में भूस्खलन से हुई तबाही के बाद रविवार को और 17 शव निकाले गए. विभिन्न एजेंसियां राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हुई हैं.

अधिकारियों ने बताया कि पेटीमुडी में मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों बनी हुई हैं. इसके बावजूद, भूस्खलन की वजह से जान गंवाने वाले लोगों के शव निकालने के लिए एनडीआरएफ, अग्निशमन और पुलिस विभाग के कर्मियों द्वारा बचाव अभियान जारी है.

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अधिकारियों ने बताया कि पेटीमुडी में 12 लोगों को बचाया गया था, 43 शव मिले थे. इस बीच, लगातार बारिश, भूस्खलन और नदियों के किनारे बांधों के बंद होने से मध्य केरल में नदियों के जल स्तर में वृद्धि हुई है, जिससे बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई है.

पठानमथिट्टा जिले में पंबा बांध के छह शटर रविवार दोपहर बाद खोले गए, जब इसका जल स्तर बढ़कर 983.45 मीटर हो गया. इससे रन्नी, चेंगन्नूर और कुट्टनद क्षेत्रों में बाढ़ की स्थिति की पैदा हो गई है. पथानामथिट्टा जिले के अधिकारियों ने कहा कि बांध को नौ घंटे में 982 मीटर तक पानी के स्तर को नीचे लाने के लिए खोला गया था.

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