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पुणे गैंगरेप: दोषियों की सजा में तब्दीली के खिलाफ MWC ने SC को लिखा खत

महाराष्ट्र महिला आयोग की अध्यक्ष विजया किशोर रहाटकर ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एसए बोबड़े को खत लिखकर पुणे गैंगरेप के दोषियों की सजा कम किए जाने का विरोध किया है.

प्रतीकात्मक चित्र प्रतीकात्मक चित्र

  • हाईकोर्ट के फैसले को रद्द करने की मांग
  • फांसी को उम्रकैद में किया था तब्दील

रेप की बढ़ती घटनाओं के खिलाफ आक्रोश और दोषियों को सजा- ए- मौत देने की मांग को लेकर चल रहे प्रदर्शनों के बीच पुणे गैंगरेप केस भी चर्चा में आ गया है. दोषियों की फांसी की सजा को उम्र कैद में तब्दील करने के हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ अब महाराष्ट्र महिला आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा है.

महाराष्ट्र महिला आयोग की अध्यक्ष विजया किशोर रहाटकर ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एसए बोबड़े को खत लिखकर पुणे गैंगरेप के दोषियों की सजा कम किए जाने का विरोध किया है. रहाटकर ने अपने पत्र को ही याचिका के रूप में स्वीकार करते हुए इसपर सुनवाई करने की अपील की है.

महाराष्ट्र महिला आयोग की अध्यक्ष ने मुख्य न्यायाधीश से हाईकोर्ट के फैसले को रद्द करने की मांग की है. गौरतलब है कि फांसी के लिए निर्धारित तिथि से तीन दिन पहले बॉम्बे हाईकोर्ट ने दोषियों की फांसी की सजा कम करते हुए उम्रकैद में तब्दील कर दी थी.

दोषियों को 24 जून को फांसी दी जानी थी. हाईकोर्ट ने 21 जून को सजा कम करने का आदेश दिया था. बता दें कि गैंगरेप की यह घटना साल 2007 की है. दोषियों ने एक बीपीओ कर्मचारी का अपहरण कर उसके रेप की जघन्य वारदात को अंजाम देने के बाद उसकी हत्या कर दी थी.

कोर्ट ने इस मामले में आरोपियों को साल 2012 में दोषी करार देते हुए मौत की सजा सुनाई थी. दोषियों को 24 जून को फांसी दी जानी थी, लेकिन अभियुक्तों की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने 21 जून को सजा कम करने का फैसला सुनाया. 

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