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गैंगरेप पर हवा का रुख भांपकर अब चुप्पी तोड़ने लगे PM और मंत्री

एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी गैंगरेप की दोनों घटनाओं पर पहली बार बोले. उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं से पूरा देश शर्मसार है. बेटियों को न्याय मिलकर रहेगा. न्याय दिलाना हमारी जिम्मेदारी है. उन्होंने आगे कहा कि जिस तरह की घटनाएं हमने बीते दिनों में देखी हैं, वो सामाजिक न्याय की अवधारणा को चुनौती देती हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो)

कठुआ और उन्नाव रेप की घटना को लेकर देशभर में बढ़ते बवाल के बाद सरकार की हो रही किरकिरी को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत अन्य मंत्री अपनी चुप्पी तोड़ते हुए बोलने लगे हैं. विपक्ष पीएम मोदी की चुप्पी पर लगातार हमला कर रहा था और आज प्रधानमंत्री ने भी इस पर चुप्पी तोड़ दी. पीएम की तरह अन्य मंत्री भी इस प्रकरण पर सामने आने लगे हैं.

खासतौर पर जैसे-जैसे कठुआ की घटना का बारे में लोगों को विस्तार से पता चल रहा है कि कैसे 8 साल की मासूम बच्ची के साथ दरिंदगी की गई, लोगों का गुस्सा बढ़ रहा है. बृहस्पतिवार की रात दिल्ली में इस घटना के विरोध में राहुल गांधी, प्रियंका वाड्रा के मार्च के बाद सरकार पर दबाव और बढ़ गया है.

आखिरकार बोले पीएम मोदी

शुक्रवार को एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी गैंगरेप की दोनों घटनाओं पर पहली बार बोले. उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं से पूरा देश शर्मसार है. बेटियों को न्याय मिलकर रहेगा. न्याय दिलाना हमारी जिम्मेदारी है. उन्होंने आगे कहा कि जिस तरह की घटनाएं हमने बीते दिनों में देखी हैं, वो सामाजिक न्याय की अवधारणा को चुनौती देती हैं. किसी भी सभ्य समाज के लिए यह शर्मनाक है. एक समाज के रूप में, एक देश के रूप में हम सब इसके लिए शर्मसार हैं.

इससे पहले राहुल गांधी ने शुक्रवार को भी ट्वीट करके मोदी की चुप्पी पर तंज कसते हुए कहा कि देश इस बात का इंतजार कर रहा है कि प्रधानमंत्री अपनी चुप्पी कब तोड़ते हैं और उन्हें इस सवाल पर उनके जवाब का इंतजार है कि हत्या और बलात्कार के आरोपियों को राज्य सरकारें क्यों बचाने में लगी हैं.

मंत्रियों को भी बोलना पड़ा

बढ़ते दबाव का असर है कि दो दिन पहले तक इस घटना पर बोलने से बचने वाले मोदी सरकार के मंत्री भी अब इसके खिलाफ बयान दे रहे हैं. शुक्रवार को गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने इस मामले पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कहा कि पीड़ित परिवार को न्याय मिलना चाहिए.

महिला और बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने तो एक वीडियो संदेश के जरिए कहा कि उनका मंत्रालय 12 साल से कम उम्र की बच्चियों से बलात्कार के लिए फांसी की सजा का प्रावधान करने के लिए कानून में बदलाव का प्रस्ताव कैबिनेट के सामने ले जाएगा.

अपना दल की नेता और मोदी सरकार में मंत्री अनुप्रिया पटेल ने भी मेनका गांधी का समर्थन करते हुए कहा कि जो लोग इस तरह से बच्चों के साथ बलात्कार जैसे घृणित अपराध करते हैं, उनकी तुलना सिर्फ किसी जानवर और राक्षस से ही की जा सकती है. उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों के मन में कानून का डर तभी बैठेगा, जब इसके लिए कड़ी से कड़ी सजा का प्रावधान होगा जिसमें फांसी शामिल है. उन्होंने कहा कि पॉक्सो एक्ट में बदलाव का फैसला संबंधित मंत्रालय को करना है लेकिन एक महिला मंत्री होने के नाते वह इसका पूरा  समर्थन करती हैं.

उमा भारती ने भी कहा कि उन्नाव और कठुआ दोनों जगहों पर दोषियों को सजा मिल कर रहेगी. अमेठी में स्मृति ईरानी ने कहा कि पहले राहुल गांधी बलात्कार के आरोपी गायत्री प्रजापति के साथ खड़े थे, लेकिन अब कैंडिल मार्च निकालना उनकी मजबूरी है. कठुआ के मामले पर सबसे पहले बोलने वाले मंत्रियों में वीके सिंह थे जिन्होंने कहा था कि इस घटना से वो इतने दुखी हैं कि इंसान होना एक गाली जैसा लगने लगा है.

सरकार के मंत्रियों के बदले रूख का एक कारण ये भी है कि उन्नाव और कठुआ दोनों मामलों में अदालतों ने भी कड़ा रूख दिखाया है. कठुआ के मामले पर जम्मू में वकीलों के रवैये पर कड़ी आपत्ति जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वो न्याय की राह में बाधा नहीं बन सकते. वहीं उन्नाव के मामले को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरोपी विधायक की गिरफ्तारी नहीं करने को लेकर राज्य सरकार को फटकार लगाई.

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