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राज्यसभा में बहुमत नहीं, फिर भी कैसे तीन तलाक बिल पास करा ले गई सरकार?

राज्यसभा में बहुमत न होने के बावजूद तीन तलाक बिल को आसानी से पास करा लेने को मोदी सरकार की बड़ी रणनीतिक जीत कहा जा रहा है. इस बिल को पिछली सरकार में दो बार लोकसभा से पास कराने के बावजूद मोदी सरकार राज्यसभा से पास नहीं करा सकी थी.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी.(फाइल फोटो) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी.(फाइल फोटो)

राज्यसभा में बहुमत न होने के बावजूद मोदी सरकार तीन तलाक बिल पास कराने में सफल रही. यह संभव हुआ विपक्षी चक्रव्यूह में सेंधमारी से. बिल के पक्ष में 99 वोट पड़े जबकि विरोध में सिर्फ 84. इसले पहले विपक्ष ने बिल को सेलेक्ट कमिटी को भेजने का प्रस्ताव रखा था लेकिन प्रस्ताव के पक्ष में विपक्ष सिर्फ 84 वोट जुटा पाया जबकि विरोध में 100 वोट पड़े.

यह हाल तब रहा, जबकि विपक्षी राज्यसभा सदस्यों की संख्या करीब 118 थी, वहीं सत्ताधारी एनडीए के पास 111 सदस्य रहे. तीन तलाक बिल को राज्यसभा से आसानी से पास करा लेना मोदी सरकार की बड़ी रणनीतिक जीत मानी जा रही है.

तीन तलाक बिल पिछली सरकार में दो बार लोकसभा से पास कराने के बावजूद मोदी सरकार राज्यसभा से पास नहीं करा सकी थी. इस बिल के पास होने के बाद माना जा रहा है कि अब मोदी सरकार के आगे राज्यसभा में भी विपक्ष सरेंडर कर चुका है. फिर भी लाख टके का सवाल है कि नंबर गेम में विपक्ष पर कैसे भारी पड़े मोदी.

मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के लिए यह निराशा की बात रही कि जो राज्यसभा सदस्य तीन तलाक बिल का विरोध कर रहे थे, वह वोटिंग की बारी आने पर सदन में मौजूद ही नहीं थे. जिसका फायदा मोदी सरकार को मिला.

ऐसे बिल पास करा ले गई सरकार

तीन तलाक बिल पर विरोध का बिगुल फूंकने वाले कई दलों के राज्यसभा सदस्य वोटिंग के दौरान गायब रहे. जिसका फायदा मोदी सरकार को मिला. एनसीपी से शरद पवार और उनके करीबी प्रफुल्ल पटेल गायब रहे. कांग्रेस से प्रताप सिंह बाजवा, मुकुद मेढी, रंजीत बिस्वाल, विवेक तनखा और मनोनीत केटीएस तुलसी मौजूद नहीं थे. राज्यसभा सदस्य संजय सिंह के इस्तीफा देने से सदन में कांग्रेस की शक्ति 43 तक सिमट गई. तीन तलाक बिल पर मायावती के सख्त रुख के बावजूद बीएसपी के चार राज्यसभा सदस्य गायब रहे. वहीं समाजवादी पार्टी के भी सात सांसद वोटिंग से गैरहाजिर रहे. तृणमूल कांग्रेस से केडी सिंह भी गैरहाजिर रहे, जिन्हें पार्टी ने कारण बताओ नोटिस दिया है.

इतना ही नहीं लेफ्ट, आरजेडी, डीएमके और वाईएसआर कांग्रेस से भी एक-एक सांसद गैरहाजिर रहे. जबकि एआईएडीएमके, जेडीयू और टीआरएस भी वोटिंग से बाहर रहे. इससे बहुमत का आंकड़ा 121 से घटाकर नीचे लाने में मदद मिली. लेकिन सबसे हैरानी हुई वोटिंग से पीडीपी की गैरमौजूदगी से.

आरटीआई के बाद जिस तरह से तीन तलाक बिल भी सरकार पास करा ले गई, उससे कहा जा रहा है कि फ्लोर मैनेजमेंट में विपक्ष बुरी तरह फेल रहा. इससे पता चलता है कि लोकसभा चुनाव के बाद भी विपक्ष बिखरा है. उधर, तीन तलाक पर वोटिंग के बाद उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती के बीच ट्विटर पर जंग छिड़ गई.

शुरुआत महबूबा मुफ्ती के इस ट्वीट से हुई. जिसमें उन्होंने कहा, 'तीन तलाक बिल को पास कराने की जरूरत को समझ नहीं पा रही हूं, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट पहले ही इसे अवैध करार दे चुका था. मुस्लिम समुदाय को दंडित करने के लिए यह अनावश्यक का हस्तक्षेप है.'

इस पर उमर ने चुटकी लेते हुए कहा  'महबूबा मुफ्ती जी, आपको यह चेक करना चाहिए था कि इस ट्वीट से पहले आपके सदस्यों ने कैसे वोट किया? मुझे लगता है कि उन्होंने सदन में अनुपस्थित रहकर सरकार की मदद की, क्योंकि बिल पास कराने के लिए उन्हें सदन में नंबर चाहिए थे.'

विपक्ष का विरोध

विपक्ष का कहना है कि वह तीन तलाक के पक्ष में नहीं है, मगर बिल में इसका अपराधीकरण कर दिया गया है. तत्काल तीन तलाक देने पर पति को जेल भेजने की बात है. अगर पति जेल चला जाएगा तो फिर पत्नी और बच्चे का गुजारा कैसे होगा. विपक्ष का यह भी कहना है कि जब सुप्रीम कोर्ट ते तीन तलाक को गलत ठहरा चुका है तो इस पर अलग से कानून लाने की क्या जरूरत. इस्लाम में शादी को कांट्रैक्ट माना गया है, मगर तीन तलाक कानून इस करार के खिलाफ है. कानून लागू होने पर मुस्लिम पुरुषों के खिलाफ इसका दुरुपयोग हो सकता है.

वोटिंग के दौरान गैर हाजिर रहे सदस्य

बसपा- सभी 4

सपा- 7

एनसीपी- 2

पीडीपी- सभी 2

कांग्रेस- 5

टीएमसी- 1

लेफ्ट-1

आरजेडी -1

डीएमके -1

वाईएसआर कांग्रेस- 1

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