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स्वतंत्रता दिवसः सोनिया गांधी ने कहा भारत में असहिष्णुता के लिए कोई जगह नहीं

स्वतंत्रा दिवस के अवसर पर सोनिया गांधी ने कहा कि एक लोकतांत्रिक भारत में कट्टरता और असहिष्णुता के लिए कोई जगह नहीं है, फिर भी हमारे देश में हर दिन लाखों लोगों को भेदभाव का सामना करना पड़ता है.

कांग्रेस नेताओं के साथ सोनिया गांधी (फोटोः आईएएनएस) कांग्रेस नेताओं के साथ सोनिया गांधी (फोटोः आईएएनएस)

देशभर में स्वतंत्रता दिवस बड़े उत्साह के साथ मनाया जा रहा है. कांग्रेस पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष बनी सोनिया गांधी ने भी आज पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ कांग्रेस मुख्यालय पर तिरंगा फहराया.

वहीं स्वतंत्रता दिवस के इस अवसर पर सोनिया गांधी ने कहा कि एक लोकतांत्रिक भारत में कट्टरता और असहिष्णुता के लिए कोई जगह नहीं है, फिर भी हमारे देश में हर दिन लाखों लोगों को भेदभाव का सामना करना पड़ता है.

भारत के 73वें स्वतंत्रता दिवस पर बधाई देते हुए उन्होंने एक बयान में कहा, 'वर्तमान में भारत सभी क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ा है, लेकिन हमारे मूल में सत्य, अहिंसा, करुणा और अटूट देशभक्ति के सिद्धांत है.'

उन्होंने आगे बताया कि, '73 साल के बाद भी लोकतांत्रिक और लचीले भारत में कट्टरता, अंधविश्वास, संप्रदायवाद, असहिष्णुता या अन्याय के लिए कोई जगह नहीं है, फिर भी लाखों नागरिक हर दिन भेदभाव का सामना करते हैं. वास्तव में हमारी स्वतंत्रता को पोषित करने के लिए हमें चाहिए कि हम एक राष्ट्र के रूप में उभरते हुए हर उस चीज के खिलाफ आवाज उठाएं, जो अन्याय, असहिष्णुता और भेदभाव से उपजा हो.'

वहीं बाढ़ प्रभावित केरल में अपने संसदीय क्षेत्र वायनाड का दौरा करने गए पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी ध्वजारोहण कार्यक्रम में भाग लेने के लिए राष्ट्रीय राजधानी वापस लौट आए.

गांधी परिवार के अलावा, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पार्टी के वरिष्ठ कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद, मोतीलाल वोरा, अहमद पटेल, के.सी. वेणुगोपाल और पार्टी के कई अन्य नेता इस दौरान कार्यालय में मौजूद रहें.

सोनिया गांधी ने अपने बयान में नागरिकों से आग्रह किया कि वे स्वतंत्रता, भाईचारे, शांति और समानता के मूल्यों की रक्षा और संरक्षण के महान कर्तव्य का पालन करें. उन्होंने कहा, 'हमारी स्वतंत्रता उन लोगों के बलिदानों का परिणाम है, जिन्होंने वर्तमान भारत के लिए अपना बलिदान दिया.'

सोनिया गांधी ने स्वतंत्रता दिवस पर सैनिकों की प्रशंसा करते हुए कहा, 'हमें भारत की अखंडता की रक्षा में अपने सशस्त्र बलों के सर्वोच्च बलिदान को नहीं भूलना चाहिए.'

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