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90% लोग चाहते हैं चीनी सामान का बहिष्कार, 67% देसी के लिए ज्यादा कीमत देने को तैयार

चीनी सामान के बहिष्कार को लेकर आजतक ने मूड ऑफ द नेशन (MOTN) यानी लोगों का मिजाज जानने की कोशिश की. इस सर्वे में 90% लोग चाहते हैं कि चीनी सामान का बहिष्कार हो. वहीं, 7 फीसदी लोगों ने बहिष्कार से इनकार किया और तीन फीसदी असमंजस की स्थिति में रहे.

आजतक के लिए सर्वे में सामने आया मू़ड ऑफ द नेशन (फाइल फोटो) आजतक के लिए सर्वे में सामने आया मू़ड ऑफ द नेशन (फाइल फोटो)

  • 7 फीसदी ने चीनी सामान के बहिष्कार को सही नहीं माना
  • 91 % लोगों ने चीनी APP पर बैन को सर्वे में सही कहा है

LAC पर भारत-चीन के बीच तनाव का माहौल बना हुआ है. ऐसे में चालबाज चीन को सबक सिखाने के लिए भारत लगातार उस पर नकेल कस रहा है. मोदी सरकार ने चीन के 50 से ज्यादा APP पर बैन लगा दिया है. इसके साथ ही देश में चीनी सामान के बहिष्कार को लेकर लोगों द्वारा तमाम अभियान भी चलाए जा रहे हैं.

चीनी सामान के बहिष्कार को लेकर आजतक ने मूड ऑफ द नेशन (MOTN) यानी लोगों का मिजाज जानने की कोशिश की. इस सर्वे में 90% लोग चाहते हैं कि चीनी सामान का बहिष्कार हो. वहीं, 7 फीसदी लोगों ने बहिष्कार से इनकार किया और तीन फीसदी असमंजस की स्थिति में रहे.

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चीनी सामान का बहिष्कार और देसी के लिए ज्यादा दाम चुकाने के लिए 67 फीसदी लोग तैयार हैं. 30 फीसदी लोगों ने अधिक दाम देने से मना कर दिया. दो फीसदी लोगों ने बोला कि इस पर कुछ कह नहीं सकते.

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चीन APP पर बैन और कई कंस्ट्रक्शन कंपनी से करार खत्म करने के फैसले को 91 फीसदी लोगों ने सही माना. वहीं, 7 फीसदी लोगों का जवाब नहीं में मिला. तीन फीसदी लोगों ने ना हां में जवाब दिया ना नहीं में.

194 विधानसभा सीटों के लोग सर्वे में शामिल हुए

आजतक के लिए ये सर्वे कर्वी इनसाइट्स लिमिटेड ने किया जिसमें 12 हजार 21 लोगों से बात की गई. इनमेंसे 67 फीसदी ग्रामीण जबकि शेष 33 फीसदी शहरी थी. 19 राज्यों की कुल 97 लोकसभा और 194 विधानसभा सीटों के लोग सर्वे में शामिल किए गए.

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जिन 19 राज्यों में ये सर्वे किया गया उनमें आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, केरल, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल शामिल हैं. ये सर्वे 15 जुलाई से 27 जुलाई के बीच किया गया.

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सर्वे में 52 फीसदी पुरुष, 48 फीसदी महिलाएं

सर्वे में 52 फीसदी पुरुष, 48 फीसदी महिलाएं शामिल थीं. अगर धर्म के नजरिए से देखा जाए तो 86 फीसदी हिंदू, 9 फीसदी मुस्लिम व पांच फीसदी अन्य धर्मों के लोगों से उनकी राय जानी गई. जिन लोगों पर सर्वे किया गया उनमें 30 फीसदी सवर्ण, 25 फीसदी एससी-एसटी व 44 फीसदी अन्य पिछड़े वर्ग के लोग शामिल थे. सर्वे में शामिल 57 फीसदी लोग 10 हजार रुपये महीने से कम की आमदनी वाले थे जबकि 28 फीसदी 10 से 20 हजार रुपये और 15 फीसदी 20 हजार रुपये महीने से ज्यादा कमाने वाले लोग थे. सर्वे के सैंपल में किसान, नौकरीपेशा, बेरोजगार, व्यापारी, छात्र आदि को शामिल किया गया था.

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