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MOTN: जानिए CAA पर क्या है देश का मिजाज, 15 फीसदी ने माना भेदभावपूर्ण

जनवरी 2020 में किए गए MOTN सर्वे में 26 प्रतिशत लोगों ने माना था कि नागरिकता संशोधन कानून भेदभावपूर्ण था. हालांकि, इस बार टैली फिसलकर 15 फीसदी तक पहुंच गई है.

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  • आजतक के लिए कार्वी इनसाइट्स लिमिटेड ने सर्वे किया
  • CAA के समर्थन और विरोध में जगह-जगह प्रदर्शन हुए थे

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर देश में खूब हंगामा मचा. इसके समर्थन और विरोध में जगह-जगह प्रदर्शन हुए, साथ ही कई लोगों की जान भी चली गई. नागरिकता संशोधन कानून को लेकर देश का मिजाज यानी मूड ऑफ द नेशन (MOTN) क्या रहा, इसे जानने के लिए आजतक के लिए कार्वी इनसाइट्स लिमिटेड ने सर्वे किया.

इस सर्वे के मुताबिक, CAA का 50 प्रतिशत लोगों ने समर्थन किया है, जबकि 15 फीसदी लोग सोचते हैं कि ये भेदभावपूर्ण है. वही, 25 प्रतिशत लोगों का मानना ​​है कि भारत को किसी भी धर्म के अवैध प्रवासियों को नागरिकता नहीं देनी चाहिए, जबकि 10 प्रतिशत लोगों ने इस पर कोई निर्णय नहीं लिया.

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वहीं, जनवरी 2020 में किए गए MOTN सर्वे में 26 प्रतिशत लोगों ने माना था कि नागरिकता संशोधन कानून भेदभावपूर्ण था. हालांकि, इस बार टैली फिसलकर 15 फीसदी तक पहुंच गई है.

194 विधानसभा क्षेत्रों में किया गया सर्वे

आजतक के लिए ये सर्वे कर्वी इनसाइट्स लिमिटेड ने किया, जिसमें 12 हजार 21 लोगों से बात की गई. इनमें से 67 फीसदी ग्रामीण जबकि शेष 33 फीसदी शहरी थे. 19 राज्यों की कुल 97 लोकसभा और 194 विधानसभा सीटों के लोग सर्वे में शामिल किए गए.

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जिन 19 राज्यों में ये सर्वे किया गया उनमें आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, केरल, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल शामिल हैं. ये सर्वे 15 जुलाई से 27 जुलाई के बीच किया गया. सर्वे में 52 फीसदी पुरुष, 48 फीसदी महिलाएं शामिल थीं.

86 फीसदी हिंदुओं की राय जानी गई

अगर धर्म के नजरिए से देखा जाए तो 86 फीसदी हिंदू, 9 फीसदी मुस्लिम और 5 फीसदी अन्य धर्मों के लोगों से उनकी राय जानी गई. जिन लोगों पर सर्वे किया गया उनमें 30 फीसदी सवर्ण, 25 फीसदी एससी-एसटी और 44 फीसदी अन्य पिछड़े वर्ग के लोग शामिल थे.

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सर्वे में शामिल 57 फीसदी लोग 10 हजार रुपये महीने से कम की आमदनी वाले थे जबकि 28 फीसदी 10 से 20 हजार रुपये और 15 फीसदी 20 हजार रुपये महीने से ज्यादा कमाने वाले लोग थे. सर्वे के सैंपल में किसान, नौकरीपेशा, बेरोजगार, व्यापारी, छात्र आदि को शामिल किया गया था.

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