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औरंगाबाद में दो युवकों से जबरन बुलवाया 'जय श्रीराम', केस दर्ज

महाराष्ट्र के औरंगाबाद में रविवार को कथित तौर पर दो युवकों को जय श्रीराम बोलने पर मजबूर किया गया. ये घटना औरंगाबाद के आजाद चौक की है.

पुलिस कमिश्नर चिरंजीवी प्रसाद (फोटो- ANI) पुलिस कमिश्नर चिरंजीवी प्रसाद (फोटो- ANI)

महाराष्ट्र के औरंगाबाद में रविवार को कथित तौर पर दो युवकों को ‘जय श्री राम’ बोलने पर मजबूर किया गया. ये घटना औरंगाबाद के आजाद चौक की है. आरोप चार युवकों पर हैं. पुलिस आयुक्त चिरंजीवी प्रसाद ने कहा कि हमने मामला दर्ज कर लिया और हम निष्पक्ष रूप से मामले की जांच करेंगे.

‘जय श्रीराम’ जैसे धार्मिक नारे बोलने को मजबूर करने या फिर इन नारों को नहीं बोलने पर मारपीट करने का यह पहला मामला नहीं है. अभी दो दिन पहले यानी 20 जुलाई को औरंगाबाद से ही जय श्रीराम नहीं बोलने पर मुस्लिम युवकों की पिटाई का मामला सामने आया था. जय श्रीराम के नारे लगवाने के लिए भीड़ ने एक मुस्लिम युवक के साथ मारपीट की थी.

बताया गया कि औरंगाबाद के मदीना होटल में काम करने वाला इमरान इस्माइल नाम का शख्स गुरुवार देर रात अपने घर वापस आ रहा था. तभी रास्ते में कुछ लोगों ने उसे रोका और बाइक की चाबी छीनने के बाद उससे जय श्रीराम बोलने के लिए कहा. विरोध करने पर इमरान की पिटाई की गई और जबरदस्ती तीन बार जय श्रीराम बुलवाया गया. पुलिस ने इस मामले में शिकायत मिलने पर मामला दर्ज कर लिया.

इमरान ने आरोप लगाया कि उसे पत्थर से मारने की भी कोशिश की गई, लेकिन शोर मचाने के बाद आस-पास के लोग आवाज सुनकर बाहर आए. इमरान ने बताया कि जब करीब 10 लोगों ने जय श्रीराम न बोलने पर पिटाई की तो उस वक्त गणेश नाम के एक व्यक्ति ने इमरान को बचाया.

इससे पहले जून 2019 में 24 साल के तबरेज अंसारी को चोरी के आरोप में पीटकर मार डाला था. उनकी हत्या सरायकेला खरसांवा जिले के घातकीडीह गांव में हुई थी. तबरेज अंसारी को पहले उन्हें बिजली के पोल से बांधकर पीटा फिर उनसे जय श्री राम और जय हनुमान के नारे लगवाए थे. हालांकि, अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई थी.

गौरतलब है कि जय श्रीराम के नारे लगवाने के लिए पिटाई की खबरें देश के कई हिस्सों से पहले भी आ चुकी हैं. पुलिस की सख्ती के बावजूद इंसानियत को शर्मसार करने वाली ऐसी घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही हैं. गौरतलब है कि मॉब लिंचिंग के मुद्दे पर सियासत चरम पर है और सवाल उठ रहे हैं कि आखिर ऐसी घटनाएं कब और कैसे रुकेंगी.

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