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लक्ष्मणानन्द हत्याः शक की सुई कांग्रेस सांसद पर

विहिप ने स्वामी लक्ष्मनान्द सरस्वती की हत्या कांग्रेस के राज्य सभा सदस्य आर के नायक की उपस्थिति में होने का आरोप लगाया है. इस आरोप के बाद मामले में नया मोड़ आने से उड़ीसा की राजनीति में भूचाल आने की संभावना जताई जा रही है.

विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) ने स्वामी लक्ष्मनान्द सरस्वती की हत्या कांग्रेस के राज्य सभा सदस्य आर के नायक की उपस्थिति में होने का आरोप लगाया है. इस आरोप के बाद मामले में नया मोड़ आने से उड़ीसा की राजनीति में भूचाल आने की संभावना जताई जा रही है.

इस जधन्य हत्याकांड के बाद राज्य के कंधमाल जिले में ईसाइयों के खिलाफ हिंसा फैल गयी थी. इस हिंसा से नवीन पटनायक सरकार के प्रसाशनिक काबलियत पर सवालिया निशान लगा रखा है. अब बीजू जनता दल (बीजेडी) और भारतीय जनता पार्टी को कांग्रेस और पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी पर निशाना साधने का एक और मौका मिल गया है.

अपराध शाखा के अधिकारी अरुण रॉय, ने कहा कि 84 साल के स्वामी लक्ष्मनानंद जो कि धर्मान्तरण विरोधी और पुनः धर्म में वापसी के खिलाफ अभियान चला रहे थे, की हत्या जनमाष्टमी के दिन करने की साज़िश छह महीने पहले तैयार की गई थी. रॉय के अनुसार, पूरे मामले की साज़िश की तैयारी स्थानीय संगठन ने तैयार किया था जबकि दूसरे संगठन को इस तैयारी को अमली जामा पहनाने के लिए तैयार किया गया. संगठन ने तीन-चार माओवादियों को हत्या के लिए धन दिया गया.

स्वामी की हत्या माओवादियों संगठन के नेतृत्व में की गई. जबकि टीम के बाकी सदस्यों में स्थानीय युवकों को शामिल किया गया. स्वामी और उनके चार शिष्यों को तितर-बितर करने के लिए एके- 47 से गोलियां चलाई गई. बाद में उनकी हत्या की पुष्टि के लिए हत्यारों ने एड़ी की नसों को काट दिया. इसके तुरंत बाद सीपीआइ (माओवादियों) ने उनकी हत्या की जिम्मेदारी ले ली.

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