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मोदी के मंत्री बोले- रोजगार बहुत है, उत्तर भारत में कम मिलते हैं काबिल कैंडिडेट

केंद्र की मोदी सरकार के 100 दिन पूरे होने पर बरेली में केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री संतोष गंगवार ने सरकार की उपलब्धियां गिनाई. इस दौरान उन्होंने कहा कि देश में रोजगार और नौकरियों की कोई कमी नहीं है. 

केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री संतोष गंगवार केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री संतोष गंगवार

  • कंपनियों को उत्तर भारत में नहीं मिल रहे योग्य उम्मीदवार
  • विपक्ष बेरोजगारी, आर्थिक मंदी पर सरकार को घेरने में जुटा

केंद्र की मोदी सरकार के 100 दिन पूरे होने पर बरेली में केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री संतोष गंगवार ने सरकार की उपलब्धियां गिनाई. इस दौरान उन्होंने कहा कि देश में रोजगार और नौकरियों की कोई कमी नहीं है.

संतोष गंगवार ने कहा कि हमारे उत्तर प्रदेश में जो रिक्रूटमेंट करने आते हैं, वो इस बात का सवाल करते हैं कि जिस पद के लिए हम रख रहे हैं उस क्वालिटी का व्यक्ति हमें नहीं मिल रहा है. कमी है तो योग्य लोगों की.

मंत्री का कहना है कि हम इसी मंत्रालय को देखने का काम करते हैं. इसलिए मुझे जानकारी है कि देश में रोजगार की कोई कमी नहीं है. रोजगार बहुत है. रोजगार दफ्तर के आलावा हमारा मंत्रालय भी इसकी मॉनिटरिंग कर रहा है. रोजगार की कोई समस्या नहीं है बल्कि जो भी कंपनियां रोजगार देने आती हैं, उनका कहना होता है कि उन युवाओं में योग्यता नहीं है. मंदी की बात समझ में आ रही है, लेकिन रोजगार की कमी नहीं है.

संतोष गंगवार का बयान ऐसे समय आया है जब बेरोजगारी और आर्थिक हालात को लेकर विपक्ष लगातार हमलावर है. वहीं सरकार स्थिति से निपटने के लिए कई ऐलान कर चुकी है.

कांग्रेस करेगी प्रदर्शन

कांग्रेस पार्टी ऐलान कर चुकी है कि वो आर्थिक मंदी पर पूरे देश में 15 से 25 अक्टूबर के बीच बड़े पैमाने पर प्रदर्शनों का आयोजन करेगी. कांग्रेस के महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने गुरुवार को कहा था कि, "हमने आर्थिक मंदी पर 20 से 30 सितंबर को राज्यस्तरीय सम्मेलन आयोजित करने का निर्णय लिया है."

सरकार ने उठाए कदम

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने देश के आर्थिक विकास को रफ्तार देने के मकसद से निर्यात और अवासीय क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए शनिवार को नए कदमों का ऐलान किया. इसके तहत उन्होंने इन दोनों क्षेत्रों में तेजी लाने के लिए 60,000 करोड़ रुपये खर्च करने की घोषणा की. अर्थव्यवस्था के कई क्षेत्र में मांग नरम रहने और चालू वित्तवर्ष की पहली तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर घटकर छह साल के निचले स्तर पांच फीसदी पर आ जाने के बाद सरकार ने यह कदम उठाया है.

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