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वॉलीबॉल की राष्ट्रीय खिलाड़ी बनीं संन्यासी, कुंभ में करेंगी सनातन धर्म का प्रचार

आइए जानते हैं कि कैसे राष्ट्रीय खिलाड़ी शैलजानंद गिरि संन्यासी बन गईं और इस बार कुंभ में वह किस प्रकार लोगों की मदद करेंगी.

आस्था का संगम कुंभ मेला आस्था का संगम कुंभ मेला

प्रयागराज में दुनिया के सबसे बड़े मेले कुंभ की शुरुआत होने जा रही है. इस बार कुंभ मेले में वॉलीबॉल की राष्ट्रीय खिलाड़ी देवयानी यानि शैलजानंद गिरि जूना अखाड़े के शिविर में सनातम धर्म की अलख जगा रही हैं. उनका जन्म पूर्वी अफ्रीका के दारेस्लाम में हुआ था. उनके पिता एक कस्टम अधिकारी थे. जब वह 6 वर्ष की थीं तब उनके पिता को भारत में तैनात कर दिया गया था.  वह शिक्षा, चिकित्सा के जरिए गरीबों की सेवा करने के साथ नशाखोरी व अपराध में लिप्त लोगों को धर्म के जरिए सही राह दिखाने क काम करती हैं. दुनियाभर में उन्हें सहज योगिनी शैलजानंद गिरि के रूप में जाना जाता है.

कुंभ में इस तरह करेंगी श्रद्धालुओं की सेवा-

शैलजानंद गिरि इस बार कुंभ मेले में श्रद्धालुओं की सेवा का काम करेंगी. वह उन्हें योग, ध्यान की शिक्षा देने के साथ-साथ उनकी आंख की जांच भी करेंगी.  मोतियाबिंद के मरीजों का निश्शुल्क ऑपरेशन कराने के साथ चश्मे का वितरण भी करेंगी. इसके साथ ही सबको भोजन भी नि शुल्क देंगी.

ऐसे बनीं संन्यासी-

बता दें, जूना अखाड़े की व्यवस्था महामंत्री सहजयोगिनी शैलजानंद गिरि ने की है. उन्हें खेल में करीबन 50 से ज्यादा पुरस्कार मिल चुके हैं. बचपन में उन्हें अध्यात्म में रुचि थी, लेकिन बाद में वह संन्यासी बन गईं. वह गुजरात की यूनिवर्सिटी से राष्ट्रीय स्तर पर वॉलीबॉल खेला करती थीं. लेकिन साल 1975 में में वह अपनी मां के साथ एक ध्यान योग शिविर में गई थीं. उन्होंने वहां करीबन 12 घंटे की योग साधना की थी. इसके बाद से ही अध्यात्म में उनकी रुचि बढ़ गई. साल 1978 में उन्होंने सन्यासी की शिक्षा भी ली. मौजूदा समय में भारत समेत अमेरिका और इंगलैंड में उनके संस्थान चल रहे हैं, जो लोगों की सेवा का काम करते हैं.

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