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आसमान में भारत का शौर्य देख लो, गरजेंगे मिराज-अपाचे और चिनूक

वायुसेना दिवस के अवसर पर चिनूक, अपाचे जैसे ताकतवर हेलिकॉप्टर, हर्कुलस और जगुआर इसके अलावा मिराज 2000 अपनी ताकत दिखाएंगे.

वायुसेना दिखा रही है अपनी ताकत वायुसेना दिखा रही है अपनी ताकत

  • देश मना रहा है 87वां वायुसेना दिवस
  • हिंडन एयरबेस पर ताकत दिखाएगी एयरफोर्स
  • अपाचे-चिनूक और मिराज भरेंगे दम

आज 87वां वायुसेना दिवस है और इस अवसर पर गाजियाबाद के हिंडन एयरबेस पर विशाल कार्यक्रम हो रहा है. यहां वायुसेना प्रमुख के अलावा तीनों सेना के प्रमुख, कई विशिष्ट मेहमानों के सामने वायुसेना अपना दम दुनिया के सामने दिखाएगी. वायुसेना दिवस के अवसर पर चिनूक, अपाचे जैसे ताकतवर हेलिकॉप्टर, हर्कुलस और जगुआर इसके अलावा मिराज 2000 अपनी ताकत दिखाएंगे.

गाजियाबाद के हिंडन एयरबेस पर होने वाले कार्यक्रम में क्या है खास...

अपाचे हेलिकॉप्टर: भारतीय वायुसेना को हाल ही में 8 अपाचे विमान मिले हैं, ये हेलिकॉप्टर लगातार चार से पांच घंटे तक ऑपरेशन में शामिल हो सकता है. इसके जरिए करीब 14 मिसाइलों को एक साथ दागा जा सकता है. भारत और अमेरिका के बीच 3 बिलियन डॉलर की डील हुई थी, जिसमें 22 अपाचे लड़ाकू विमान भारत को मिलने हैं. (अपाचे हेलिकॉप्टर)

चिनूक हेलिकॉप्टर: वायुसेना आज चिनूक की ताकत भी दिखाएगी, इसे भी हिंदुस्तान ने अमेरिका से ही लिया है. ये वही विमान है, जिससे अमेरिका ने ओसामा बिन लादेन को मार गिराया था. चिनूक हेलिकॉप्टर गोला-बारूद, हथियारों के अलावा एक साथ 300 सैनिकों को ले जाने की क्षमता है. भारत में इन हेलिकॉप्टरों ने Mi-26 की जगह ली है.

हर्कुलस C130: ये भारतीय वायुसेना में शामिल सबसे बड़े मालवाहक विमानों में से एक है. कई मिशन में इस विमान ने भारतीय वायुसेना का दम दिखाया है.

मिराज 2000: वायुसेना आज दुनिया को मिराज 2000 का दम भी दिखाएगी, इसी विमान से भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के बालाकोट में घुसकर एयरस्ट्राइक की थी.

वायुसेना ने आतंकी अड्डों को इसी विमान से तबाह कर दिया था. मिराज 2000 को फ्रांस की दसॉल्ट कंपनी ने बनाया है, जिसमें नौ प्वाइंट पर हथियार रखे जाते हैं. ये लड़ाकू विमान हवा से हवा में सीधा वार कर सकता है.

आज वायुसेना का 87वां वायुसेना दिवस है. 8 अक्टूबर 1932 को इंडियन एयरफोर्स की स्थापना की गई थी. इस दिन को Air Force Day के तौर पर मनाया जाता है. 1 अप्रैल 1933 को इसके पहले दस्ते का गठन हुआ था जिसमें 6 RAF-ट्रेंड ऑफिसर और 19 हवाई सिपाहियों को शामिल किया गया था.

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