scorecardresearch
 

भारत-पाकिस्तान की लड़ाई में पिस रहा है अफगानिस्तान: हामिद करजई

करजई ने कहा कि अफगानिस्तान का सबसे अच्छा दोस्त भारत है. भारत ने अफगानिस्तान में अपार योगदान दिया है, लेकिन पाकिस्तान जो प्रभाव अफगानिस्तान पर डाल सकता था, वह किसी अन्य देश से कहीं ज्यादा है. हम भारत के सर्वश्रेष्ठ दोस्त हैं लेकिन हम पाकिस्तान से भी कहना चाहते हैं कि भारत के साथ हमारा रिश्ता हमें उनके अच्छे भाई और दोस्त बनने से नहीं रोक सकता.

हामिद करजई, अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई, अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति

  • अमेरिका की दखल से अफगानिस्तान में आईएस और दइश संगठन पैदा हुए
  • अमेरिका, आतंकवाद की लड़ाई के नाम पर घुसा लेकिन आतंकवाद खत्म नहीं हुआ

अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई ने दावा किया है कि भारत और पाकिस्तान के बीच दुर्भाग्यपूर्ण रिश्तों का सबसे बुरा असर उनके देश पर पड़ा है. उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान के लिए दोनों देशों के बीच संतुलन बनाने की भयंकर चुनौती है. करजई ने दिल्ली में आयोजित एक वैश्विक सम्मेलन के दौरान कहा कि भारत के साथ हमारे अच्छे संबंध हैं लेकिन इस वजह से पाकिस्तान के साथ हमारे संबंधों पर कोई असर नहीं पड़ेगा. क्योकि वो हमारा भाई और दोस्त है. इस बात को आगे कैसे बढ़ाया जाए, यह समझाना मुश्किल है लेकिन हमें ऐसा ककरना ही होगा.

'हम भारत के सबसे अच्छे दोस्त'

पूर्व अफगान राष्ट्रपति ने कहा, 'अफगानिस्तान का सबसे अच्छा दोस्त भारत है. भारत ने अफगानिस्तान में अपार योगदान दिया है, लेकिन पाकिस्तान जो प्रभाव अफगानिस्तान पर डाल सकता था, वह किसी अन्य देश से कहीं ज्यादा है. हम भारत के सर्वश्रेष्ठ दोस्त हैं लेकिन हम पाकिस्तान से भी कहना चाहते हैं कि भारत के साथ हमारा रिश्ता हमें उनके अच्छे भाई और दोस्त बनने से नहीं रोक सकता.'

करजई ने कहा कि पाकिस्तान को लेकर हमारे देश के भीतर दो तरह की धारणा है. सोवियत इनवेशन के बाद जब हम रिफ्यूजी हुए तो पाकिस्तान के लोगों ने हमें खुले दिल से गले लगाया. लेकिन पाकिस्तान सरकार और उनके आतंकी संगठनों से एक गंभीर शिकायत है. ये सभी लोग चरमपंथ (आतंकवाद) को बढ़ावा देते हैं. मेरा निजी मत है कि हमें शांति प्रक्रिया बहाल करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए.अफगानिस्तान के लिए कोई दूसरा रास्ता नहीं है. हमें  शांति प्रक्रिया को सफल बनाना है.  

'आतंक को नहीं हरा पाया अमेरिका'

हमने देखा कि अफगानिस्तान में अमेरिका के दखल के फलस्वरुप आईएस और दइश संगठन की उत्पत्ति हुई. हमलोग चाहते हैं कि अमेरिका इस मुद्दे पर अपनी बात रखे. यह किसी और का युद्ध था, हमारा नहीं था. हम लोग किसी के प्रयोग का हिस्सा क्यों बने? क्योंकि इसके बदले में आफगानिस्तान को सबसे  दुश्मनी मोल लेनी पड़ रही है. अमेरिका हमारे देश में आतंकवाद की लड़ाई के नाम पर घुसा था लेकिन आज तक हम न तो आतंकवाद को हरा पाए हैं और न ही हमारे पास सुरक्षा है. इस वजह से अफगानिस्तान की अमेरिका के साथ गहरी आपत्ति है.

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें