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माल्या-नीरव से बड़ा है आईएलएंडएफएस का कर्ज घोटाला: मनीष तिवारी

कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने मोदी सरकार को घेरते हुए कहा कि आईएलएंडएफएस कंपनी को भारतीयों के पैसे से बेलआउट कर एक विदेशी कंपनी को मदद पहुंचाने की कोशिश चल रही है.

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मनीष तिवारी की फाइल फोटो (पीटीआई)
मनीष तिवारी की फाइल फोटो (पीटीआई)

कांग्रेस ने बुधवार को आईएलएंडएफएस कंपनी का मामला उठाया और कहा कि 2017-2018 में इस कंपनी का घाटा 2395 करोड़ था जिसके कर्ज में पिछले 36 महीने में 44 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है.

कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि आईएलएंडएफएस कंपनी दिवलिया हुई तो बाजार में भूचाल आ जाएगा. इस कंपनी पर 91 हजार करोड़ का कर्ज है जो माल्या, चौकसी और नीरव मोदी के घोटाले से साथ गुना बड़ा मामला है. तिवारी ने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में मल्टी एजेंसी से इस मामले की जांच की मांग की.

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा, दस साल पहले सितंबर 2008 में अमेरिका में बहुत बड़े वित्तीय संस्थान ने दिवालियापन के लिए अर्जी डाली थी. उस संस्था का नाम था लीमन ब्रदर्स. उसके बाद आर्थिक मंदी का दौर शुरू हुआ. कुछ वैसा ही भारत में हो रहा है. यह कंपनी डूबने के कगार पर है. इसके काफी दुष्परिणाम होंगे. इसी वजह से बाजार में भी खलबली है. आईएलएंडएफएस में 40 फीसदी हिस्सा एलआईसी, एसबीआई और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया जैसी सरकारी संस्थाओं का है.

तिवारी ने कहा, सवाल उठता है कि जिस कंपनी में 40 फीसदी हिस्सा सरकारी कंपनियों का है, उस पर 91 हजार करोड़ का कर्ज कैसे चढ़ गया? बताया जाता है कि 91 हजार करोड़ में से 67 करोड़ एनपीए हो चुका है. कांग्रेस प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री कार्यालय और वित्त मंत्रालय रिजर्व बैंक, स्टेट बैंक, एलआईसी और एनएचएआई पर दबाव डाल रहे हैं ताकि वो इस कंपनी को बेलआउट कर सकें. कंपनी का 35 फीसदी हिस्सा विदेशी कंपनियों का है, इसलिए इसे बेलआउट करने की कोशिश की जा रही है ताकि विदेशी कंपनियों का पैसा ना डूबे. भारतीय करदाताओं के पैसे से विदेशी कंपनियों की मदद की कोशिश की जा रही है.

तिवारी ने आगे कहा, कल प्रधानमंत्री विदेशी महागठबंधन की बात कर रहे थे. यही है वो विदेशी गठबंधन क्योंकि भारतीयों के पैसे से विदेशी कंपनी को बचाने की तैयारी चल रही है. कांग्रेस प्रवक्ता ने पूछा कि वित्तमंत्री जवाब दें कि इस कंपनी के बोर्ड में बैठे सरकारी कंपनियों के प्रतिनिधि क्या कर रहे थे?

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