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CBI पर बने GoM की पहली बैठक, कुछ मामलों पर आपस में मतभेद

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के स्वतंत्र कामकाज के विषय पर गठित मंत्रीसमूह (GoM) की पहली बैठक में कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग ने एक प्रावधान को हटाने का विरोध किया जिसमें सीबीआई के लिए भ्रष्टाचार के मामले में संयुक्त सचिव या उसके ऊपर के अधिकारी के खिलाफ जांच के लिए सरकार से अनुमति लेना जरूरी होता है.

पी चिदंबरम पी चिदंबरम

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के स्वतंत्र कामकाज के विषय पर गठित मंत्रीसमूह (GoM) की पहली बैठक में कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग ने एक प्रावधान को हटाने का विरोध किया जिसमें सीबीआई के लिए भ्रष्टाचार के मामले में संयुक्त सचिव या उसके ऊपर के अधिकारी के खिलाफ जांच के लिए सरकार से अनुमति लेना जरूरी होता है.

जीओएम को उसकी पहली बैठक में कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग ने पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन दिया. सूत्रों ने बताया कि सीबीआई के निदेशक को और वित्तीय शक्तियां देने के प्रस्ताव को बैठक में बहुत ज्यादा समर्थन नहीं मिला. बैठक में चिदम्बरम, कानून मंत्री कपिल सिब्बल, विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद, कार्मिक राज्य मंत्री वी नारायणसामी ने हिस्सा लिया.

केंद्रीय गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे इस बैठक में भाग नहीं ले पाए क्योंकि वह अमेरिका में हैं. जीओएम की करीब एक घंटे तक चली बैठक के बाद चिदम्बरम ने कहा, ‘हमें कार्मिक विभाग ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश से अवगत कराया. हमें वर्तमान कानूनों, दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम, सीवीसी अधिनियम के बारे में बताया गया. हमारे सामने विनीत नारायण फैसला भी रखा गया. हमने उन मुद्दों की पहचान की जिनका हल किए जाने की जरूरत है.’

चिदम्बरम ने कहा कि अटार्नी जनरल जी ई वाहनवती को अगली बैठक के लिए बुलाया गया है क्योंकि वह इस मामले में पेश हुए थे और सुप्रीम कोर्ट के आदेश में उनका जिक्र है. सूत्रों ने बताया कि सीबीआई निदेशक रणजीत सिन्हा बाद में जीओएम के सामने अपनी बात रखेंगे.

सूत्रों के मुताबिक जीओएम के कुछ सदस्यों ने ज्यादा वित्तीय शक्तियां देने की चर्चा की लेकिन महसूस किया गया कि इस कदम से अन्य बलों एवं एजेंसियों के प्रमुख भी ऐसी मांग कर सकते हैं. सूत्रों ने कहा कि मंत्रियों ने इस बात पर विचार किया कि सीबीआई के कामकाज में बदलाव मामूली हो या व्यापक. उसके बाद तय किया गया कि जनता के मूड को ध्यान में रखकर व्यापक बदलाव किए जाएं.

प्रधानमंत्री ने सीबीआई को बाहरी प्रभाव से दूर रखने के लिए मसौदा कानून और सुप्रीम कोर्ट में पेश किए जाने के लिए मसौदा हलफनामा तैयार करने करने के लिए जीओएम बनाया था. सुप्रीम कोर्ट ने कोयला जांच की मसौदा रिपोर्ट मंत्री के साथ साझा करने को लेकर सीबीआई को ‘पिंजरे में बंद’ तोता बताया था.

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