scorecardresearch
 

क्या ‘डिजीज X’ होगी अगली विनाशकारी महामारी?

WHO के ब्लूप्रिंट की सूची में "डिजीज एक्स" नाम की एक बीमारी शामिल है जो भविष्य में फैल सकती है. WHO के मुताबिक, डिजीज X इस जानकारी का प्रतिनिधित्व करता है कि भविष्य में एक गंभीर अंतरराष्ट्रीय महामारी फैल सकती है जिसका कारण अज्ञात होगा.

भविष्य में गंभीर महामारी का खतरा (सांकेतिक फोटो- PTI) भविष्य में गंभीर महामारी का खतरा (सांकेतिक फोटो- PTI)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • कोरोना का नया स्ट्रेन इसी म्यूटेशन का परिणाम
  • H7N9 एवियन इन्फ्लूएंजा वायरस बेहद खतरनाक
  • आसानी से एक से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलता

करीब एक साल पहले दुनिया को पता चला कि चीन के वुहान में एक रहस्यमयी निमोनिया का प्रकोप फैला है. इस निमोनिया की वजह एक नया वायरस था और जिसका प्रकोप धीरे-धीरे बढ़ता गया. पूरी दुनिया की सक्रियता और निष्क्रियता के बीच ये वायरस लगातार फैलता चला गया और आज इसे हम कोरोना वायरस SARS-CoV-2 के नाम से जानते हैं जो कोविड-19 का कारण है. इस वायरस से दुनिया भर में करीब 20 लाख लोग अपनी जान गंवा चुके हैं और इस महामारी का खात्मा अभी तक दूर की कौड़ी है.

महामारी को एक साल बीत चुका है और अब भी इसके बारे में बहुत कुछ अज्ञात है. ये कैसे शुरू हुई? कहां से आई? कितनी खतरनाक हो सकती है? कब खत्म होगी? इस वायरस की उत्पत्ति के बारे में यकीनी तौर पर जवाब बहुत कम हैं लेकिन ये निश्चित है कि ये महामारी आखिरी नहीं है जिसका हम सामना कर रहे हैं. भविष्य में इससे भी ज्यादा खतरनाक वायरस हमारा इंतजार कर रहे हैं.

रिसर्च & डेवलपमेंट का ब्लूप्रिंट

आने वाले समय में ऐसे कितने खतरनाक वायरस सामने आ सकते हैं, इसकी संख्या बहुत बड़ी है. इनकी खोज करके इनके बारे में भविष्यवाणी और बचाव के उपाय करने के लिए आवंटित संसाधन अपर्याप्त हैं. अगली महामारी की तैयारी करने के प्रयास के रूप में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने एक रिसर्च और डेवलपमेंट (R&D) ब्लूप्रिंट की वैश्विक रणनीति तैयार की है.

R&D ब्लूप्रिंट में पहचानी गई प्राथमिक बीमारियों की सूची और उनका सामना करने के लिए एक रोडमैप बनाने की योजना शामिल है. ब्लूप्रिंट की सूची में वे बीमारियां शामिल हैं जिनमें महामारी का रूप लेने की क्षमता है और जो सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा पैदा करती हैं. इनमें MERS (दि मिडिल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम), सार्स, इबोला, निपाह और कई अन्य खतरनाक संक्रामक बीमारियां शामिल हैं.

कोविड-19 महामारी की शुरुआत में इसका सामना करने के लिए WHO ने तेजी से इस ब्लूप्रिंट का इस्तेमाल किया और बाद में कोविड-19 को इस ब्लूप्रिंट की सूची में जोड़ा गया.

क्या है ‘डिजीज X’

WHO के ब्लूप्रिंट की सूची में "डिजीज एक्स" नाम की एक बीमारी शामिल है जो भविष्य में फैल सकती है. WHO के मुताबिक, डिजीज X इस जानकारी का प्रतिनिधित्व करता है कि भविष्य में एक गंभीर अंतरराष्ट्रीय महामारी फैल सकती है जिसका कारण अज्ञात होगा.

डिजीज X एक काल्पनिक नाम है जिसकी जगह भविष्य में कितनी भी संक्रामक बीमारियों का नाम हो सकता है जो वैश्विक महामारी बनेंगी. अगली महामारी नए कोरोना वायरस या इबोला जैसे किसी वायरस के कारण हो सकती है. यह किसी ऐसे भी वायरस के कारण हो सकती है जिसे भारत में हम पहले से ही जानते हैं.

इन्फ्लूएंजा वायरस हमारे सामने मौजूद महामारी के खतरे का एक अच्छा उदाहरण है जो अतीत में कई महामारियों का कारण बन चुका है. 1918 में एक विनाशकारी महामारी फैली थी स्पेनिश फ्लू जिसका कारण इन्फ्लूएंजा ए वायरस का सबटाइप H1N1 था. इसके बारे में माना जाता है कि यह पक्षियों से उत्पन्न हुआ. इस वायरस ने 1918 से 1920 के बीच करीब 5 से 10 लोगों की जान ली थी.

बर्ड फ्लू भी बन सकता है महामारी?

कोविड-19 महामारी काफी बेरहम और विनाशकारी रही है और ये इससे भी ज्यादा खतरनाक हो सकती है. 2021 के शुरुआती कुछ हफ्तों में ही पूरे भारत से पक्षियों में एवियन इन्फ्लूएंजा (बर्ड फ्लू) के प्रकोप की खबरें हैं. भारत में पक्षियों में फैल रहे एवियन इन्फ्लूएंजा को भविष्य की एक महामारी के रूप में देखना चाहिए.

एन्फ्लूएंजा वायरस पर एक नजर

इन्फ्लूएंजा वायरस एक छोटे बुलबुले की तरह होता है जिसकी सतह से दो तरह के प्रोटीन निकलते हैं. पहले प्रोटीन को हेमेग्लुटिनिन (HA) और दूसरे प्रोटीन को न्यूरोमिनिडेस (NA) कहा जाता है. इस छोटे बुलबुले के अंदर वायरस का RNA होता है जो इसका आनुवंशिक कोड है. RNA कोड ही नए वायरस को जन्म देता है जिसके साथ विभिन्न प्रकार के HA और NA प्रोटीन होते हैं. ये प्रोटीन कई तरह के होते हैं जिनके आधार पर इनका नाम रखा जाता है जैसे HA1, HA2, HA3 और NA1, NA2 वगैरह.

HA और NA के कारण ही वायरस से नए वायरस पैदा होते हैं और यह किसी जीव की कोशिकाओं को संक्रमित करते हैं. यह HA और NA के प्रकार पर निर्भर करता है कि इससे मनुष्य संक्रमित होंगे या पशु पक्षी. जब वायरस किसी जंतु की कोशिका को संक्रमित करता है तो अपना आरएनए उसकी कोशिकाओं में डाल देता है जिससे उनमें नए वायरस बनने लगते हैं.

म्यूटेशन के बाद वायरस हो जाता है खतरनाक

अगर कोई वायरस किसी कोशिका को संक्रमित करता है तो उस कोशिका में वायरस के तमाम आरएनए, HA औरा NA प्रोटीन का निर्माण होता है. ये आरएनए और प्रोटीन मिलकर नए वायरस का निर्माण करते हैं और ये वायरस आसपास की और कोशिकाओं को अपनी चपेट में ले लेते हैं. नए वायरस बनने की चेन चलने लगती है और शरीर की नई नई कोशिकाएं संक्रमित होती जाती हैं. इस प्रक्रिया से जो नए वायरस बनते हैं, कई बार उनके आरएनए या प्रोटीन में थोड़ा अंतर आ जाता है जिससे नए तरह का वायरस बन जाता है. इसे म्यूटेशन (उत्परिवर्तन) कहते हैं. म्यूटेशन के बाद वायरस और खतरनाक हो सकता है.

म्यूटेशन के दौरान वायरस में नए तरह के HA और NA (न्यू एंटीजन) बनते हैं जिसे शरीर का इम्यून सिस्टम पहचान नहीं पाता है और इससे लड़ने में नाकाम रहता है. इससे वायरस को मौका मिलता है और ये शरीर को संक्रमित करना शुरू कर देता है. वायरस के नए एंटीजन के कारण शरीर का इम्यून सिस्टम इसे नुकसान नहीं पहुंचा पाता और वायरस फैलता चला जाता है. यही म्यूटेड वायरस अगर एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलने लगे तो यह बीमारी का रूप ले लेता है. इसके फैलाव और प्रभाव के आधार पर यह महामारी का रूप ले लेता है.

कोरोना वायरस का नया स्ट्रेन इसी म्यूटेशन का परिणाम है जिससे दुनिया और ज्यादा चिंतित दिख रही है क्योंकि म्यूटेशन के बाद वायरस और खतरनाक हो सकता है.

देखें: आजतक LIVE TV

एवियन इन्फ्लूएंजा यानी बर्ड फ्लू एक इन्फ्लूएंजा ए टाइप वायरस के कारण होता है जो पक्षियों को संक्रमित करता है. ये आम तौर पर मनुष्यों को संक्रमित नहीं करता क्योंकि इसमें ऐसे HA और NA प्रोटीन होते हैं जो पक्षियों की कोशिकाओं को निशाना बनाते हैं. हालांकि, कभी-कभी इंसान भी इनसे संक्रमित हो सकते हैं जिसका अंजाम काफी खतरनाक हो सकता है. इंसानों में HPAI H5N1 की मृत्यु दर करीब 60 प्रतिशत है. सौभाग्य से ये खतरनाक वायरस इंसानों में आसानी से नहीं फैलता, लेकिन अनुभव कहता है कि इसकी संरचना में बदलाव के कारण यह इंसानों को संक्रमित कर सकता है जिसके परिणाम खतरनाक हो सकते हैं.

एक प्रजाति से दूसरे में संक्रमण से फैलती है महामारी

दो अलग-अलग तरह के वायरस मिलकर संक्रमण का एक ऐसा कॉम्बिनेशन बनाते हैं जो काफी खतरनाक हो सकता है. जैसे HPAI से संक्रमित एक प्रवासी पक्षी किसी फॉर्म की मुर्गियों को संक्रमित कर सकता है. इससे तमाम मुर्गियों की मौत हो सकती है. अब मान लिया कि उसी फॉर्म में सुअर भी हैं जो इन्फ्लूएंजा ए सबटाइप H1N1 (स्वाइन फ्लू) के प्रति इम्यून हैं. H1N1 इन्हें बिना बीमार किए इनमें मौजूद है. अब सोचिए H1N1 से संक्रमित ये सुअर एवियन इन्फ्लूएंजा H7N9 से भी संक्रमित हो जाते हैं. अब इनमें दो तरह के वायरस हैं. अब ये दोनों वायरस मिलकर एक ही कोशिका को एक साथ संक्रमित करते हैं. इसके अलावा इन दोनों वायरस के कई सेगमेंट हो सकते हैं.

H7N9 एवियन इन्फ्लूएंजा वायरस मनुष्यों के लिए बेहद खतरनाक है, लेकिन यह आसानी से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलता. वहीं H1N1 स्वाइन फ्लू इन्फ्लूएंजा वायरस मनुष्यों में आसानी से फैलता है. हालांकि, संक्रमित सुअर में ये दोनों वायरस म्यूटेशन/रिकॉम्बिनेशन के जरिये नए तरह का वायरस पैदा कर सकते हैं जिसमें आरएनए किसी और वायरस का होगा और प्रोटीन किसी और वायरस का होगा. ये नया कॉम्बिनेशन बेहद खतरनाक हो सकता है.

अब सोचिए कि इन सुअरों की देखभाल करने वाला कोई किसान इन वायरस के संपर्क में आता है और उससे ये उसके परिवार और आसपास के लोगों में फैल जाता है. इस तरह एक व्यक्ति से दूसरे में फैलते हुए ये महामारी का रूप ले सकता है. संभावना है कि इस नये एंटीजन के प्रति इंसानों में कोई इम्युनिटी न हो और इससे लाखों लाख लोगों की मौत हो जाए.

सुअर से फैल रहा नए तरह का इन्फ्लूएंजा वायरस

सितंबर 2020 में अमेरिका में इंफेक्शस डिजीज सोसायटी के सम्मेलन में एक वक्ता ने चिंता जाहिर की कि चीन के किसानों में सुअर से नए तरह का इन्फ्लूएंजा वायरस फैल रहा है. अमेरिका के महामारी विशेषज्ञ डॉ लियोनार्ड मर्मेल ने बताया कि इस नए इन्फ्लूएंजा वायरस में "महामारी पैदा करने के सभी लक्षण मौजूद हैं." उन्होंने बताया कि चीन में सुअर पालने वाले 15 फीसदी किसानों में ये वायरस पाया गया है.

जनवरी 2021 में भारत के कई राज्यों में अलग-अलग प्रजाति के पक्षियों में एवियन इन्फ्लूएंजा पाया गया है. हो सकता है कि भविष्य में इन्फ्लूएंजा का प्रकोप भारत या इसके पड़ोसी देशों में फैले. इन्फ्लुएंजा महामारी एक ऐसी चिंता है कि इसी को ध्यान में रखकर हमारे ग्लोबल पैंडेमिक रिस्पॉन्स सिस्टम को डिजाइन किया गया है. हालांकि ये सिस्टम मजबूत हैं और फिलहाल वे कोविड-19 महामारी से लड़ रहे हैं.

कोरोना वायरस का रिकॉम्बिनेशन

इन्फ्लूएंजा ए वायरस की तरह कोरोना वायरस में भी म्यूटेशन के जरिये रिकॉम्बिनेशन यानी पुनर्संयोजन हो सकता है. संक्रमित सुअर के उदाहरण से समझें कि अगर दो तरह के वायरस से संक्रमित चमगादड़ में इनका रिकॉम्बिनेशन होता है तो इससे वायरस का एक नया स्ट्रेन बनेगा. चमगादड़ में दो अलग-अलग वायरस मिलकर एक तीसरा वायरस बनाएंगे जो ज्यादा खतरनाक होगा. 

कुछ वैज्ञानिकों का कहना है कि भविष्य में चमगादड़ों में पाए जाने वाले कोरोना वायरस का इसमें पाए जाने वाले ओर्थोरोवायरस के साथ रिकॉम्बिनेशन हो सकता है जिससे इसका खतरनाक रूप सामने आ सकता है. यह कोशिकाओं को काफी तेज संक्रमित करेगा घातक निमोनिया का कारण बनेगा. यानी हम कह सकते हैं कि डिजीज X नाम की अज्ञात बीमारी बहुत दूर नहीं है.

(डॉ स्वप्निल पारिख “द कोरोनावायरस: व्हाट यू नीड टू नो अबाउट द ग्लोबल पैंडेमिक” किताब के लेखक और कोविड-19 के रिसर्चर हैं.)


 

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें