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रायबरेली कोच फैक्ट्री मामले पर सोनिया के आरोपों पर रेलमंत्री ने दिया जवाब

रेलमंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि 2014 तक रायबरेली के रेल कोच फैक्ट्री में किसी तरह का कोई काम नहीं हुआ था, महज कोच फैक्ट्री का निर्माण और पेंटिग का ही काम हो सका था. पिछले साल वहां पर कोच उत्पादन का काम शुरू हुआ, आज उस कारखाने में करीब 1400 रेल कोच का निर्माण हो चुका है. इससे स्थानीय लोगों को काफी रोजगार मिला है.

केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल (फोटो-PTI) केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल (फोटो-PTI)

यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मंगलवार को लोकसभा में अपने संसदीय क्षेत्र रायबरेली के रेलवे कोच फैक्ट्री के निजीकरण किए जाने का सवाल उठाते हुए मोदी सरकार को घेरा था. सोनिया गांधी के सवालों का जवाब रेल मंत्री पीयूष गोयल ने बुधवार को लोकसभा में दिया. पीयूष गोयल ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों के निजीकरण को लेकर कांग्रेस का दोहरा चरित्र सामने आ गया है.

रेलमंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि 2014 तक रायबरेली के रेल कोच फैक्ट्री में किसी तरह का कोई काम नहीं हुआ था, महज कोच फैक्ट्री का निर्माण और पेंटिग का ही काम हो सका था. पिछले साल वहां पर कोच उत्पादन का काम शुरू हुआ, आज उस कारखाने में करीब 1400 रेल कोच का निर्माण हो चुका है. इससे स्थानीय लोगों को काफी रोजगार मिला है.

साथ ही, गोयल ने कहा यह कांग्रेस है, जिसने दिल्ली-मुंबई हवाई अड्डों के निजीकरण की कोशिश की. 2004 से निजीकरण किए जा रहे हैं. कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए सरकार के 2004-05 के बजट में बकायदा उनकी नीति रही.

बता दें कि सोनिया गांधी ने लोकसभा में सार्वजनिक क्षेत्र की इकाईयों का निजीकरण किए जाने का मुद्दा उठाते हुए मोदी सरकार पर कुछ उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने का आरोप लगाते हुए हमले किए थे. इसी के साथ उन्होंने अपने संसदीय क्षेत्र के रेल कोच फैक्ट्री का जिक्र किया था.

सोनिया गांधी ने कहा था 'रायबरेली की सार्वजनिक संपत्तियों की सरकार पूरी रक्षा करे. रायबरेली की रेल कोच फैक्ट्री देश की सबसे आधुनिक फैक्ट्रियों में से है और पूर्व की सरकारों ने इसे आगे ले जाने के लिए काफी काम किया. स्थानीय लोगों के रोजगार के लिए भी यह रेल फैक्ट्री महत्वपूर्ण है. मुझे दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि सरकार इस फैक्ट्री के निजीकरण का प्रयास कर रही है. इसके लिए मजदूर यूनियनों तक को विश्वास में नहीं लिया गया,  2000 से अधिक मजदूरों और कर्मचारियों का भविष्य अब संकट में है.

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