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बदल जाएगी अंग्रेजों के जमाने की पुलिस! आधुनिक बनाने के लिए सरकार ने कसी कमर

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री ने बताया कि सरकार पहले ही तीन वर्ष के दौरान पुलिस बलों के आधुनिकीकरण की योजना को अमल में लाने के लिए मंजूरी दे चुकी है. देश भर में पुलिस बलों के आधुनिकीकरण के लिए केंद्र सरकार की ओर से कई अहम कदम उठाए गए है.

प्रतीकात्मक तस्वीर प्रतीकात्मक तस्वीर

अंग्रेजों को देश छोड़े बेशक सात दशक हो चुके हैं, लेकिन भारतीय पुलिस के नियम-कायदे, तौर-तरीके अभी तक उसी पुराने ढर्रे पर चलते आ रहे हैं. केंद्र सरकार ने अब देश भर में भारतीय पुलिस का कायाकल्प करने के लिए कमर कस ली है.  

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री हंसराज अहीर ने साफ संदेश में कहा है कि देश में एकीकृत आपराधिक न्याय व्यवस्था विकसित किया जा रहा है. अहीर राज्य पुलिस बलों के आधुनिकीकरण के संबंध में पूछे गए सवालों का जवाब दे रहे थे. लोकसभा में मंगलवार को सांसद शोभा करंदलाजे और प्रताप सिम्हा ने राज्य पुलिस बलों के आधुनिकीकरण का मुद्दा उठाया.  

दोनों सांसदों ने सवाल किए कि क्या सरकार ने राज्य पुलिस बलों के आधुनिकीकरण की अम्ब्रेला योजना के अमल को मंजूरी दे दी है?  क्या अपराध और आपराधिक रिकॉर्ड्स का राष्ट्रीय डेटाबेस तैयार करने के लिए पुलिस स्टेशनों को समेकित किया जाएगा? क्या पुलिस स्टेशनों को जेलों, फॉरेन्सिक साइंस लैब्स आदि के साथ भी जोड़ा जाएगा?  

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री ने जवाब में बताया कि सरकार पहले ही तीन वर्ष के दौरान पुलिस बलों के आधुनिकीकरण की योजना को अमल में लाने के लिए मंजूरी दे चुकी है. देश भर में पुलिस बलों के आधुनिकीकरण के लिए केंद्र सरकार की ओर से कई अहम कदम उठाए गए हैं. मसलन,   

1. योजना के लिए 25,061 करोड़ रुपए रखे गए हैं जिसमें से 18,636 करोड़ के केंद्रीय बजट आउटले को चिह्नित किया जा चुका है.

2. केंद्रीय बजट आउटले के 10,132 करोड़ रुपए जम्मू-कश्मीर, पूर्वोत्तर राज्यों और नक्सलवाद प् रभावित राज्यों को लेकर आंतरिक सुरक्षा से जुड़े खर्चों के लिए रखे गए हैं.

3. नक्सलवाद से सबसे ज्यादा प्रभावित 35 जिलों के लिए विशेष केंद्रीय सहायता की योजना शुरू की गई है. इसके लिए केंद्र की ओर से इन जिलों में विकास कार्यों के लिए 3000 करोड़ रुपए का आउटले रखा गया है.  

4. केंद्र सरकार ने पूर्वोत्तर राज्यों में इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेडेशन, ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट्स, शोध सुविधाएं विकसित करने के लिए 1,215 करोड़ रुपए चिह्नित किए हैं.

5. पुलिस इंफ्रास्ट्रक्चर, फॉरेन्सिक साइंस लैब्स, इंस्टीट्यूशन्स, उपकरणों के अपग्रेडेशन के वास्ते राज्यों को सहायता देने के लिए नए कदम उठाए जा रहे हैं. इससे आपराधिक न्याय व्यवस्था की खामियों को दूर करने में मदद मिलेगी.

6. अपराध और आपराधिक रिकार्ड्स का राष्ट्रीय डेटाबेस तैयार करने के लिए पुलिस स्टेशनों को जोड़ा जाएगा. इसके अलावा जेलों, फॉरेन्सिक लैब्स, प्रोसीक्यूशन दफ्तरों जैसे आपराधिक न्याय व्यवस्था के अन्य स्तंभों को पुलिस आंकड़ों के साथ एकीकृत किया जाएगा.  

7. योजना के तहत आंतरिक सुरक्षा, कानून और व्यवस्था, महिला सुरक्षा, आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता, पुलिस बलों की सचलता और लॉजिस्टिक स्पोर्ट के लिए विशेष प्रावधान किए जा रहे हैं.

8. क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम्स (CCTNS) प्रोजेक्ट को केंद्रीय गृह मंत्रालय अमली जामा पहना रहा है. इसका मुख्य उद्देश्य सभी पुलिस स्टेशनों को इंटरलिंक करना है. इससे अपराध और अपराधियों के आंकड़े इलेक्ट्रॉनिक इको सिस्टम के जरिए सभी पुलिस स्टेशनों से लेकर पहले राज्य डेटा सेंटरों और फिर वहां से नेशनल डेटा सेंटर में एकत्रित किए जाएंगे.

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