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संजीव भट्ट के आवास से खाली हाथ लौटी पुलिस

गुजरात पुलिस गिरफ्तार आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट के आवास पर फिर छापा मारने गई लेकिन जब उनकी पत्नी के प्रतिरोध के बाद और ताजा तलाशी वारंट दिखाने की मांग के बाद उसे बैरंग लौटना पड़ा.

गुजरात पुलिस गिरफ्तार आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट के आवास पर फिर छापा मारने गई लेकिन जब उनकी पत्नी के प्रतिरोध के बाद और ताजा तलाशी वारंट दिखाने की मांग के बाद उसे बैरंग लौटना पड़ा.

भट्ट को एक पुलिस कांस्टेबल की शिकायत पर गिरफ्तार किये जाने के बाद कल उनके आवास पर छापा मारा गया था. भट्ट की पत्नी श्वेता ने कहा, ‘आज करीब 30-35 पुलिसकर्मी एक बार फिर हमारे आवास पर छापा मारने आए, लेकिन मैंने उनका विरोध किया और उनसे ताजा तलाशी वारंट दिखाने को कहा. वे कल का वारंट दिखा पाए क्योंकि उनके पास ताजा तलाशी वारंट था ही नहीं.’

श्वेता ने कहा, ‘मैंने उनसे कहा कि कल के वारंट के आधार पर हमारे आवास की तलाशी उत्पीड़न के समान है. वे एक ही वारंट के आधार पर दोबारा हमारे आवास की तलाशी नहीं ले सकते. उसके बाद वे हमारे आवास से चले गए.’ उन्होंने कहा, ‘पुलिस हमारा उत्पीड़न करने का प्रयास कर रही है क्योंकि मेरे पति ने सच बात कही है.’

वर्ष 2002 के दंगे में मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की संलिप्तता का आरोप लगाने वाले भट्ट की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने (पुलिस कांस्टेबल की) शिकायत के संबंध में ‘सबूत ढूंढ़ने के लिए’ मेमनगर में उनके आवास पर छापा मारा था. कांस्टेबल के डी पंत ने प्राथिमिकी दर्ज कराई कि गोधरा ट्रेन अग्निकांड के बाद 27 फरवरी, 2002 को मोदी की बैठक के संबंध में भट्ट ने कथित रूप से डरा धमकाकर उनसे एक झूठे हलफनामा पर दस्तखत करवाए थे. इस प्राथमिकी के आधार पर भट्ट को गिरफ्तार किया गया है.

भट्ट ने मोदी पर दंगे में सलिप्तता का आरोप लगाते हुए उच्चतम न्यायालय में एक हलफनामा दाखिल किया है जिसके बाद से उनका मोदी के साथ खुला टकराव चल रहा है. भट्ट के खिलाफ गुजरात के गृह विभाग ने कथित रूप से ड्यूटी से अवैध तौर पर अनुपस्थित रहने को लेकर भी आरोपपत्र दाखिल किया है.

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