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रेपो रेट में 0.25 व रिवर्स रेपो रेट में 0.5 फीसदी का इजाफा

संसद में महंगाई का शोर है और लोगों की जेब पर महंगाई का जोर है. महंगाई पर काबू पाना सरकार का सबसे बड़ा एजेंडा बन गया है. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के महंगाई पर बयान के तीन दिन बाद ही आरबीआई ने नया दांव चला है.

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संसद में महंगाई का शोर है और लोगों की जेब पर महंगाई का जोर है. महंगाई पर काबू पाना सरकार का सबसे बड़ा एजेंडा बन गया है. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के महंगाई पर बयान के तीन दिन बाद ही आरबीआई ने नया दांव चला है. उसने ब्याज दरों में इज़ाफा करने का एलान कर दिया है.

आरबीआई ने अपनी कर्जनीति की तिमाही समीक्षा में रेपो रेट में एक चौथाई फीसदी का इजाफा कर दिया है. इस इजाफे के बाद रेपो रेट 5.50 फीसदी से बढ़कर 5.75 फीसदी हो गया है. रेपो रेट वो दर होती है जिसपर बैंक आरबीआई से कर्ज लेते हैं. यानी अब बैंकों को आरबीआई से 0.25 फीसदी महंगा कर्ज मिलेगा.

इसके अलावा उसने रिवर्स रेपो रेट को 4 फीसदी से बढ़ाकर 4.50 फीसदी कर दिया है. रिवर्स रेपो रेट वो दर होती है जिसपर बैंक आरबीआई को कर्ज देते हैं. अगर बैंक आरबीआई को कर्ज देते हैं तो उन्हें 0.50 फीसदी ज्यादा ब्याज मिलेगा.

कैश रिजर्व रेश्यो यानी सीआरआर में आरबीआई ने कोई बदलाव नहीं किया है. सीआरआर यानी वो पैसा जो कि बैंकों को आरबीआई के पास रिजर्व के तौर पर रखना होता है. हालांकि इस बढ़ोतरी के बाद बैंको पर ब्याज दरें बढ़ाने का दबाव बढ़ गया है. लेकिन ब्याज दरें बढ़ती हैं तो डिपॉजिट पर ज्यादा ब्याज मिलने की भी उम्मीद है. आरबीआई ने ये अनुमान जाहिर किया है की दिसंबर तक महंगाई 6 फीसदी हो जाएगी. आरबीआई ने जीडीपी अनुमान भी 8 से बढ़ाकर साढ़े आठ फीसदी कर दिया है.

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