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जयपुर को मिले विश्व धरोहर के तमगे की रक्षा अब ड्रोन की जिम्मेदारी

विश्व धरोहरों में शामिल किए गए जयपुर शहर को धरोहर के रूप में सहेजने के लिए अब सरकार ड्रोन कैमरे से नजर रखेगी. ड्रोन, शहर का स्वरूप बिगाड़ने वालों पर नजर रखेगी.

जयपुर पर सरकार ड्रोन कैमरे से रखेगी नजर (Photo- Aajtak) जयपुर पर सरकार ड्रोन कैमरे से रखेगी नजर (Photo- Aajtak)

  • विश्व धरोहरों में शामिल जयपुर पर ड्रोन से निगरानी
  • अतिक्रमण और भ्रष्टाचार पर लगाम का ऐलान

विश्व धरोहरों में शामिल किए गए जयपुर शहर को धरोहर के रूप में सहेजने के लिए अब सरकार ड्रोन कैमरे से नजर रखेगी. ड्रोन, शहर का स्वरूप बिगाड़ने वालों पर नजर रखेगी. अगर कहीं अवैध निर्माण हुआ या अतिक्रमण हुआ तो दफ्तर में बैठे-बैठे अधिकारी देख पाएंगे. ड्रोन की मदद से राजस्थान सरकार जयपुर शहर को यूनेस्को की शर्तों के अनुसार तैयार कर पाएगी.

जयपुर शहर के चार दीवारी के अंदर की पिंक सिटी भवनों और धरोहरों के यूनेस्को के विश्व धरोहर की सूची में शामिल होने के बाद इन्हें संरक्षित किए जाने की योजना के तहत नगर निगम गुलाबीनगरी को ड्रोन से निगरानी में रखेगी. ड्रोन के माध्यम से विस्तृत सर्वे व वीडियोग्राफी की शुरुआत सोमवार को की गई.

जयपुर शहर में अतिक्रमण और अवैध निर्माण जयपुर नगर निगम में फैले भ्रष्टाचार की वजह से रुक नहीं पा रही थी. हर इलाके में अधिकारी तैनात कर दिए गए थे, मगर फिर भी पैसे लेकर अवैध निर्माण के आरोप लगते रहते थे. इसके लिए सरकार ने ड्रोन से निगरानी की योजना निकाली है.

अतिक्रमण पर कार्रवाई सख्त

धारीवाल का कहना है कि परकोटे में सर्वे एवं विडियोग्राफी के दौरान चार दीवारी क्षेत्र में हैरिटेज मानकों के विरुद्ध किए गए बहुमंजिला निर्माणों व अतिक्रमणों को सूचीबद्ध किया जाएगा. ड्रोन के जरिए जानकारी जुटाकर दिवाली के बाद उनके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी. धारीवाल ने बताया कि अवैध निर्माणों को हटाने के लिए 60 दिन का समय दिया जाएगा, लेकिन इसके बाद परकोटे के अवैध निर्माणों को किसी भी हाल में बक्शा नहीं जाएगा.

भविष्य में विकास के काम होंगे

दरअसल, यूनेस्को ने गाइडलाइन भेजी जिसके मुताबिक पुराने शहर के परकोटे के रखरखाव और विकास को लेकर सरकार को एक बायलॉज तैयार करना होगा और उसी के आधार पर भविष्य में यहां विकास के काम होंगे. इससे शहर का सुनियोजित विकास होने के अलावा टूरिस्टों की संख्या में भी भारी इजाफा होगा.

अगर समय रहते यूनेस्कों की गाइडलाइन को पूरा नहीं किया गया तो जयपुर से विश्वधरोहर का तमगा छिन सकता है. ऐसे में सरकार की यह कोशिश है कि किसी भी सूरत में पिंक सिटी को विश्व धरोहर की मिली पहचान कायम रहे.

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