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राजस्थान: नगर निगम चुनाव में टिकट बंटवारे को लेकर कांग्रेस-बीजेपी में घमासान

माना जा रहा है कि दोनों ही दल अपने प्रत्याशियों की घोषणा 18 अक्टूबर की शाम तक करेंगे, ताकि बवाल नहीं हो और 19 अक्टूबर को यानी नामांकन के आखिरी दिन पार्षद अपना पर्चा भर दें.

अंतर्कलह झेल रही है बीजेपी-कांग्रेस (सांकेतिक फोटो) अंतर्कलह झेल रही है बीजेपी-कांग्रेस (सांकेतिक फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • पार्षदों के टिकट बंटवारे को लेकर घमासान
  • कांग्रेस और बीजेपी दोनों में टिकट को लेकर झगड़ा
  • अपने-अपने प्रत्याशियों को टिकट दिलाने की होड़

राजस्थान में छह नगर निगम के चुनाव में पार्षदों के टिकट बंटवारे को लेकर कांग्रेस और बीजेपी दोनों में घमासान मचा हुआ है. कांग्रेस के अंदर नगर निगम के पार्षदों के टिकट बंटवारे को लेकर झगड़ा इतना बढ़ गया है कि खुद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को दखल देना पड़ा. इसके बावजूद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के करीबी माने जाने वाले और लंबे समय तक कांग्रेस के महासचिव रहे गिरिराज गर्ग जयपुर में अशोका होटल के बाहर धरने पर बैठ गए. गिरिराज गर्ग ने आरोप लगाया कि कांग्रेस में भाई भतीजावाद के नाम पर टिकट बंटवारा हो रहा है.

मुख्यमंत्री निवास पर तो शहरी विकास मंत्री शांति धारीवाल और प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के बीच टिकट बंटवारे को लेकर नोकझोंक तक हो गई. दरअसल कांग्रेस ने टिकट बंटवारे के लिए एआईसीसी की तरफ से एक टीम का गठन किया है, जिसमें जिला अध्यक्षों के अलावा प्रदेश अध्यक्ष और राज्य में कांग्रेस के सह प्रभारी तरुण कुमार समेत नगर निगम चुनाव के लिए प्रभारी बनाए गए काजी निजामुद्दीन को रखा गया है. 

माना जा रहा है कि यह कमेटी पायलट के कुछ समर्थकों को भी टिकट देना चाह रही है, लेकिन अशोक गहलोत के गुट के माने जाने वाले सरकारी मुख्य सचेतक महेश जोशी और परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास अपने समर्थकों को टिकट दिलवाना चाहते हैं. दोनों गुट कमेटी पर दबाव बना रहे हैं कि वह प्रत्याशियों के लिए सिंबल उन्हीं को दे दें, जिसे वह चाहते हैं. 

जबकि कमेटी चाहती है कि प्रत्याशी संगठन की तरफ से तय किया जाए और इसमें असंतुष्ट गुट के लोगों को भी जगह दी जाए. प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा भी यही चाह रहे हैं कि संगठन के लोगों की भी पूछ हो. जयपुर में विधानसभा चुनाव में हारे हुए प्रत्याशी अर्चना शर्मा और सीताराम अग्रवाल जैसे लोग भी अपने लोगों को टिकट दिलवाना चाह रहे हैं.

अशोक गहलोत के करीबी संजय बाफना, विक्रम सिंह, राजीव अरोड़ा और केके हरितवाल जैसे लोग भी अपने समर्थकों के लिए टिकट मांग रहे हैं. माना जा रहा है कि जोधपुर में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत को फ्री हैंड दिया गया है तो इसी तरह से कोटा में शहरी विकास मंत्री शांति धारीवाल को भी फ्री हैंड दिया गया है.  

सारा झगड़ा जयपुर के टिकट को लेकर है जहां जीते हुए विधायक अपनी मर्जी से टिकट का बंटवारा चाहते हैं, जबकि एआईसीसी के तरफ से गठित कमेटी चाहती है कि टिकटों का ऐलान वो अपने तरीके से करें. हालात यह है कि महेश जोशी जैसे विधायक कमेटी की मीटिंग में जाना बंद कर चुके हैं. जिसे देखते हुए अब मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को हस्तक्षेप करना पड़ा है.

हालांकि पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट इस चुनाव से दूरी बनाए हुए हैं, लेकिन कमेटी के जरिए वह भी अपने कुछ समर्थकों को पार्षद का टिकट दिलवाना चाहते हैं.  

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इधर बीजेपी में भी कम झगड़ा नहीं है. पार्षदों के टिकट बंटवारे को लेकर शनिवार को तीन केंद्रीय मंत्री- गजेंद्र सिंह, अर्जुन राम मेघवाल और कैलाश चौधरी, प्रदेश बीजेपी मुख्यालय में बैठक के लिए आए. जहां पर प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया के अलावा संगठन प्रभारी चंद्रशेखर भी शामिल हुए.

12 घंटे की इस मैराथन बैठक में जयपुर, कोटा और जोधपुर के लिए नामों पर चर्चा हुई, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की रही कि जब राज्य के सभी बड़े नेता पार्षदों के टिकट को लेकर चर्चा कर रहे हैं तो पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे कहां पर हैं? जयपुर में वसुंधरा समर्थक माने जाने वाले विधायक कालीचरण सराफ, नरपत सिंह राजवी और अशोक लाहोटी के अलावा हारे हुए प्रत्याशी राजपाल सिंह और कैलाश वर्मा अलग से मीटिंग कर रहे हैं.

इनका मानना है कि कांग्रेस के तर्ज पर विधायकों और हारे हुए प्रत्याशियों को पार्षद का टिकट बांटने का जिम्मा दिया जाए. जबकि प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया का मानना है कि संगठन के लोगों को तरजीह दी जाए, ताकि आने वाले चुनाव में संगठन मजबूत हो. वहीं कोटा में टिकट बंटवारे को लेकर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की चल रही है. 

हालांकि इस इलाके में वसुंधरा राजे लंबे समय से सक्रिय रही हैं. इसलिए वह प्रल्हाद गुंजल और भवानी सिंह जैसे अपने लोगों को भी टिकट दिलवाने की कोशिश में लगी हैं. इसी तरह से जोधपुर में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह अपने समर्थकों को पार्षद बनवाना चाहते हैं, मगर बीजेपी ने वहीं से आने वाले राज्य सभा सांसद राजेंद्र गहलोत को प्रभारी बनाकर मामला उलझा दिया है.

माना जा रहा है कि दोनों ही दल अपने प्रत्याशियों की घोषणा 18 अक्टूबर की शाम तक करेंगे, ताकि बवाल नहीं हो और 19 अक्टूबर को यानी नामांकन के आखिरी दिन पार्षद अपना पर्चा भर दें.

 

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