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विधानसभा का वो नियम जिसके चलते गहलोत के बगल की सीट से पीछे चले गए पायलट

राजस्थान में भले ही सचिन पायलट और अशोक गहलोत ने हाथ मिला लिए हों, लेकिन दोनों के बीच की जंग अभी भी जारी है. जिसका नजारा विधानसभा के नए सीटिंग अरेंजमेंट में देखने को मिला है.

राजस्थान में विधानसभा सत्र की तैयारी राजस्थान में विधानसभा सत्र की तैयारी

  • राजस्थान विधानसभा का सत्र आज से
  • नए सीटिंग अरेंजमेंट के तहत बैठेंगे विधायक

राजस्थान में कांग्रेस के बीच पिछले एक महीने से जो दंगल चल रहा था, वो अब खत्म हो गया है. लेकिन अब एक नए किस्म की तकरार सामने आ रही है. आज से शुरू हो रहे विधानसभा सत्र में अशोक गहलोत सरकार को अपना बहुमत साबित करना पड़ सकता है, लेकिन उससे पहले विधानसभा का सीटिंग अरेंजमेंट सामने आया है. जिसके तहत सचिन पायलट को इस बार सदन में काफी पीछे की सीट मिली है. ऐसे में ये सवाल खड़ा हो रहा है सीटिंग अरेंजमेंट किस तरह तय होता है. एक नज़र डालिए.

कहां बैठेंगे सचिन पायलट?

सचिन पायलट अब उपमुख्यमंत्री नहीं हैं, ना ही सदन में उन्हें नेता या उपनेता का कोई पद मिला है इस वक्त वो राजस्थान में सिर्फ कांग्रेस के एक विधायक हैं. ऐसे में पहले वो मुख्यमंत्री के बगल में बैठते थे, अब ऐसा नहीं होगा. सचिन पायलट को इस बार सीट नंबर 127 मिला है, जो कि एक निर्दलीय विधायक के बगल में है. सचिन पायलट से आगे मंत्री और अन्य विधायक बैठेंगे.

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कैसे तय होता है कौन कहां बैठेगा?

देश के अलग-अलग सदनों में विधायकों या सांसदों के बैठने के तरीके को लेकर कुछ नियम तय हैं. जिसके अनुसार सभी सदस्यों को बैठाया जाता है. सदन में कौन-कहां पर बैठेगा वो स्पीकर तय करता है, हालांकि सरकार के पक्ष की ओर से किसी विशेष स्थिति में कोई अपील की जा सकती है.

aa_081420094132.jpgराजस्थान विधानसभा की वेबसाइट पर दिया गया नियम

नियम के मुताबिक, स्पीकर के दाईं ओर सत्ता पक्ष और बाईं ओर विपक्ष के लोग बैठते हैं. इसमें सत्ता पक्ष में सबसे आगे मुख्यमंत्री होता है, उसके बाद मंत्रियों का नंबर आता है. क्रम से सभी मंत्री सीएम के आस-पास बैठते हैं, उसके बाद अन्य विधायकों का नंबर आता है. इनमें विधायकों के क्षेत्रानुसार और वरिष्ठता को ध्यान दिया जाता है.

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हालांकि, सरकार की अपील पर स्पीकर किसी वरिष्ठ सदस्य को आगे की सीट भी मुहैया करा सकता है. इसके अलावा विपक्ष की ओर सबसे आगे सदन में विपक्ष का नेता बैठता है, उसके बाद अन्य विधायकों को जगह मिलती है. साथ ही अलग पार्टी के सदस्यों को संख्या के आधार पर जगह मिलती है. क्योंकि राजस्थान में कांग्रेस और भाजपा के अलावा अधिकतर विधायक निर्दलीय ही हैं, ऐसे में सदन में किसी अन्य सदस्य को आगे की सीट पर कम ही जगह मिलेगी.

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