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CAB संसद में पेश होने पर हिंदू शरणार्थी खुश, बोले- नारकीय जीवन से मिलेगी निजात

कई साल पहले पाकिस्तान छोड़कर भारत में रहने के बावजूद नागरिकता नहीं होने की वजह से ये परिवार दर- दर की ठोकरें खाने को मजबूर थे. इन लोगों का कहना है कि भारत में नागरिकता नहीं होने की वजह से कोई रहने के लिए मकान भी नहीं देता है. जैसे ही सुनते हैं पाकिस्तान के हैं, तो लोग दूरी बनाने लगते हैं.

पाकिस्तान से आए हिंदू शरणार्थी पाकिस्तान से आए हिंदू शरणार्थी

  • शरणार्थी बोले- अब नागरिक बनकर गर्व से रह सकेंगे
  • सुरक्षित होगा हमारे बच्चों का भविष्य, बयां किया दर्द

गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में नागरिकता संशोधन विधेयक (सीएबी) पेश किया. जिसमें पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए हिंदू, बौद्ध, सिख धर्म के शरणार्थियों को बगैर वैध दस्तावेजों के भी नागरिकता प्रदान करने का प्रावधान है. संसद में यह बिल पेश होने पर पाकिस्तान से आए हिंदू शरणार्थियों ने खुशी जताई है.

कई साल पहले पाकिस्तान छोड़कर भारत में रहने के बावजूद नागरिकता नहीं होने की वजह से ये परिवार दर- दर की ठोकरें खाने को मजबूर थे. इन लोगों का कहना है कि भारत में नागरिकता नहीं होने की वजह से कोई रहने के लिए मकान भी नहीं देता है. जैसे ही सुनते हैं पाकिस्तान के हैं, तो लोग दूरी बनाने लगते हैं. सभी ने यह उम्मीद जताई कि उन्हें अब नारकीय जीवन से मुक्ति मिलेगी.

'देर से, लेकिन दुरुस्त आई सरकार'

इस मौके पर बहुत सारे लोगों ने कहा कि भारत सरकार देर से, लेकिन दुरुस्त आई है. शरणार्थियों का कहना है कि हम मजबूरी में भारत आए हैं. वहां हमारा जीना मुश्किल हो गया था. साल 2006 में पाकिस्तान के सिंध से भारत आए चिरम शर्मा बैंक में मैनेजर थे. चिरम के साथ मारपीट की गई तो वह थार एक्सप्रेस से भारत आ गए और उसके बाद जयपुर में जैसे-तैसे गुजारा कर रहे हैं. चिरम ने कहा कि अब नागरिकता बिल पेश होने के बाद बच्चों को भारत की नागरिकता मिल जाएगी तो वह भी अपनी जिंदगी जी सकेंगे.

तीन- तीन मकान छोड़कर आए भारत

सिंध से भारत आए रामचंद्र वहां राइस मिल में मैनेजर थे. रामचंद्र और उनकी पत्नी माया बताते हैं कि मोहल्ले में आए दिन उनपर जुल्म ढहाया जाता था. इससे परेशान होकर घर में ताला लगाकर बच्चों समेत भारत आ गए. रामचंद्र बताते हैं कि वहां तीन-तीन मकान छोड़कर आए हैं लेकिन संपत्ति से ज्यादा आत्म सम्मान का खयाल है. इसलिए हम भारत की नागरिकता चाहते हैं.

न खुल रहा खाता, न मिल रही नौकरी

रामचंद्र ने कहा कि यहां आकर हम अनाथ हो गए हैं. न किसी बैंक में खाता खुल रहा है और न ही कोई नौकरी मिल रही. इस वजह से हम परेशान हैं.  उन्होंने उम्मीद जताई कि अब नागरिकता बिल पेश होने के बाद हम भी भारत का नागरिक बनकर गर्व से रह सकेंगे. साल 2012 में पाकिस्तान के रहमियार खान से भारत आए गोवर्धन की वहां कपड़ों की दुकान थी.

तंग आकर वह भी परिवार लेकर भारत आ गए. इनके माता-पिता और भाई पाकिस्तान में ही हैं, जिनके लिए यह हर वक्त परेशान रहते हैं. अब नागरिकता बिल पेश होने के बाद इनको उम्मीद बंधी है कि खुद की नागरिकता तो मिल ही जाएगी मां बाप और भाई को भी पाकिस्तान से बुला लेंगे.

बता दें कि नागरिकता संशोधन विधेयक में गैर मुस्लिम शरणार्थियों को बगैर वैध दस्तावेजों के भी नागरिकता प्रदान करने का प्रावधान है. इसके लिए 11 साल निवास करने की बाध्यता को भी कम कर 6 साल करने का प्रस्ताव है.

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