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यूएपीए के गलत इस्तेमाल पर पंजाब की राजनीति में उबाल, सीएम अमरिंदर ने आरोपों को नकारा

शिरोमणि अकाली दल प्रमुख सुखबीर बादल और मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह आमने-सामने हैं. साथ ही एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए हैं और राज्य की सियासत गर्मा गई है.

पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह (फाइल फोटो- पीटीआई) पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह (फाइल फोटो- पीटीआई)

  • यूएपीए के गलत इस्तेमाल को लेकर पंजाब की राजनीति में उबाल
  • शिरोमणि अकाली दल और पंजाब में सत्तारूढ़ कांग्रेस आमने-सामने

पंजाब में गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के कथित गलत इस्तेमाल को लेकर राजनीतिक भूचाल आ गया है. साल 2018 में यूएपीए के तहत दर्ज किए गए एक मामले के आरोपी लवप्रीत सिंह के जरिए हाल ही में कथित तौर पर आत्महत्या करने के बाद यूएपीए के गलत इस्तेमाल का मुद्दा ज्यादा गरमाया है.

इन आरोपों को लेकर शिरोमणि अकाली दल प्रमुख सुखबीर बादल और मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह आमने-सामने हैं. साथ ही एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए हैं और राज्य की सियासत गर्मा गई है. शिरोमणि अकाली दल, विधायक सुखपाल सिंह खैरा और अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह खुलकर यूएपीए कानून के तहत दर्ज देशद्रोह के मामलों के आरोपियों के बचाव में उतर आए हैं.

इनके जरिए आरोपियों को निर्दोष बताया जा रहा है. इनका कहना है कि ज्यादातर आरोपियों पर सोशल मीडिया पर भड़काऊ मैसेज भेजने या छोटे-मोटे अपराध करने के आरोप हैं. जबकि उनको देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया गया है. अकाली दल के मुताबिक कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार ने पिछले तीन सालों में यूएपीए के तहत कुल 47 मामले दर्ज किए हैं. जिनमें से 16 मामले हाल ही दर्ज किए गए हैं और आरोपी निर्दोष हैं.

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वहीं पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने आरोपों को नकारते हुए कहा है कि उनकी सरकार पर यूएपीए के दुरुपयोग का आरोप लगाने वाली बीजेपी-अकाली दल सरकार के खुद के कार्यकाल के दौरान यूएपीए कानून के तहत 225 मामले दर्ज किए गए थे, जिनमें से 120 मामलों के आरोपी निर्दोष पाए गए थे.

वहीं सुखबीर बादल ने कैप्टन अमरिंदर सिंह को चेतावनी दी है की अगर निर्दोषों को फंसाने के लिए झूठे मामले दर्ज होते रहे तो इसके दूरगामी परिणाण होंगे और राज्य की कानून व्यस्था भंग हो सकती है. हालांकि कैप्टन अमरिंदर सिंह ने आरोपों को नकारते हुए कहा है कि अगर बादल के पास किसी झूठे मामले की जानकारी है तो उसे सरकार के साथ साझा करें. उन्होंने सुखबीर बादल पर सिख्स फॉर जस्टिस के खालिस्तानी एजेंडे को हवा देने और गुरपटवंत सिंह पन्नू की मदद करने के आरोप लगाया है.

यूएपीए के दुरुपयोग को लेकर राजनीती चरम पर

शिरोमणि अकाली दल के अलावा अब इस मामले में विधायक सुखपाल सिंह खैरा और अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह भी कूद गए हैं. सुखपाल खैरा ने आरोपियों के परिवारों के साथ अकाल तख्त के जत्थेदार से मुलाकात की तो उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से यूएपीए के गलत इस्तेमाल को रोकने की अपील की.

अकाल तख्त के मुताबिक जिन लोगों के खिलाफ यूएपीए के तहत मामले दर्ज किए गए हैं, वह निर्दोष हैं. सुखपाल खैरा ने आरोप लगाया है कि आरोपियों में सिर्फ सिख ही नहीं बल्कि कुछ आरोपी दलित भी हैं. उधर कैप्टन अमरिंदर सिंह ने आरोपों को नकारते हुए कहा है कि राज्य सरकार की प्राथमिकता राज्य में कानून व्यस्था बनाए रखने की है और जो भी इसे भंग करने की कोशिश करेगा उसे बक्शा नहीं जाएगा, चाहे वह कोई भी हो.

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वहीं अब यूएपीए के गलत इस्तेमाल का मामला राजनीतिक रंगत ले रहा है. एक तरफ कांग्रेस ने अकाली दल पर आरोप लगाया है कि वह अपनी पार्टी के भीतर छिड़े घमासान और टूट के बाद राजनीतिक जमीन तलाशने की फिराक में उल्टे-सीधे मामले उछाल रही है.

कांग्रेस के प्रवक्ता जगपाल सिंह अबुल खुराना ने यूएपीए के गलत इस्तेमाल के आरोपों को नकारते हुए कहा है कि अकाली दल राजनीतिक हल साधने के लिए आरोप लगाने का आदि है. अगर इसके पास निर्दोष लोगों को फंसाने के ठोस सबूत हैं तो वह सरकार को बताए.

काउंसलिंग की जरूरत

दरअसल, अकाली दल यूएपीए के तहत दर्ज मामलों के आरोपियों को दोषी नहीं मानता. अकाली दल नेता डॉ दलजीत चीमा का मानना है कि ज्यादातर दोषियों के खिलाफ सोशल मीडिया पर भड़काऊ संदेश आगे फॉरवर्ड करने के आरोप है. ऐसे लोगों को गिरफ्तार करने की बजाए उनकी काउंसलिंग करने की जरूरत है. चीमा ने कहा कि अकाली दल ने कभी भी खालिस्तान का समर्थन नहीं किया और ना ही देश विरोधी ताकतों की मदद की है.

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