scorecardresearch
 

कैप्टन का लंच: क्या सिद्धू को मनाने के लिए पार्टी हाईकमान के दबाव का नतीजा

सिद्धू को करीब लाने की कोशिश का कैप्टन अमरिंदर सिंह पर भी असर देखा गया था. उन्होंने कहा था कि नवजोत सिंह सिद्धू उनके छोटे भाई हैं और आज भी उनका विभाग खाली है. लेकिन बड़ा सवाल यही है कि क्या नवजोत सिंह सिद्धू जिस विभाग को एक साल पहले अस्वीकार करके कैबिनेट से बाहर हो गए थे उसे फिर से स्वीकारेंगे या फिर नहीं.

नवजोत सिंह सिद्धू और कैप्टन अमरिंदर के बीच सुलह के आसार (फाइल-पीटीआई) नवजोत सिंह सिद्धू और कैप्टन अमरिंदर के बीच सुलह के आसार (फाइल-पीटीआई)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • करीब सालभर तक हाशिए पर रहे नवजोत सिंह सिद्धू
  • क्या अमरिंदर की कैबिनेट में हो रही सिद्धू की वापसी?
  • आलाकमान को डर, सिद्धू कहीं कांग्रेस ही न छोड़ दें

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के कैंप की ओर से राजनीतिक हाशिए पर धकेल दिए गए नवजोत सिंह सिद्धू को अब कांग्रेस हाईकमान मनाने की कोशिशों में जुटा है. सिद्धू पिछले एक साल से लगभग निर्वासित राजनीतिक जीवन बिताते आ रहे हैं. पार्टी हाईकमान को डर है कि सिद्धू को अगर समय से नहीं मनाया गया तो वह कांग्रेस से किनारा कर सकते हैं.

पिछले दो महीनों से सिद्धू को लगातार मनाने की कोशिश की जा रही है. सबसे पहले अक्टूबर माह के पहले हफ्ते में पंजाब के लिए कांग्रेस के नवनियुक्त प्रभारी हरीश रावत को सिद्धू के घर पर भेजा गया. सिद्धू और कैप्टन को एक साल के अंतराल के बाद एक-दूसरे के आमने-सामने लाने में रावत कामयाब हुए थे. दोनों अक्टूबर में किसानों के समर्थन में आयोजित की गई पार्टी की ट्रैक्टर रैली में एक साथ देखे गए थे. 

बुधवार को कैप्टन के फार्म हाउस पर दोनों नेताओं के बीच फिर बैठक हुई. ये बैठक करीब एक घंटे चली, जिसमें पंजाब और राष्ट्रीय हित के महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई. मुख्यमंत्री के फार्महाउस से निकलने के बाद नवजोत सिंह सिद्धू मुस्कुरा रहे थे, लेकिन उन्होंने मीडिया से कुछ नहीं कहा. 

सिद्धू को फिर कैबिनेट में वापस लेने की चर्चा

कांग्रेस पार्टी हाईकमान से जुड़े हुए सूत्रों के मुताबिक नवजोत सिंह सिद्धू को मनाने के अलावा उनको फिर से कैप्टन कैबिनेट में शामिल कराने की कोशिश भी हो रही है. लेकिन अब की बार उनका विभाग कौन सा होगा, यह तय नहीं है.लेकिन कैप्टन और उनके खेमे के मंत्री सिद्धू को बिजली महकमा देने की बात करते आए हैं. 

सिद्धू को करीब लाने की कोशिश का कैप्टन अमरिंदर सिंह पर भी असर देखा गया था. उन्होंने कहा था कि नवजोत सिंह सिद्धू उनके छोटे भाई हैं और आज भी उनका विभाग खाली है. लेकिन बड़ा सवाल यही है कि क्या नवजोत सिंह सिद्धू जिस विभाग को एक साल पहले अस्वीकार करके कैबिनेट से बाहर हो गए थे उसे फिर से स्वीकारेंगे या फिर नहीं. 

चर्चा यह भी है कि नवजोत सिंह सिद्धू को उपमुख्यमंत्री या फिर पंजाब कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया जा सकता है. लेकिन कैप्टन अमरिंदर सिंह पहले भी उपमुख्यमंत्री पद के खिलाफ थे, इसलिए हो सकता है कि दोनों इस मुद्दे पर फिर दूरियां बना लें. 

इस तरह की सुगबुगाहट अक्टूबर माह में भी देखने को मिली थी. लेकिन जैसे ही राहुल गांधी की रैली में नवजोत सिंह सिद्धू ने अपनी ही सरकार के खिलाफ हमला बोला उसके बाद फिर उन अफवाहों पर विराम लग गया था. 

सिद्धू पर बीजेपी और आम आदमी पार्टी की नजर 

शिरोमणि अकाली दल के एनडीए से बाहर होने के बाद अब अचानक पंजाब में नवजोत सिंह सिद्धू का कद बढ़ गया है. एक तरफ एक सशक्त सिख चेहरे की तलाश में जुटी भारतीय जनता पार्टी सिद्धू पर घर वापसी के लिए डोरे डाल रही है तो वहीं आम आदमी पार्टी के नेता भी सिद्धू को अपने पाले में लाने के लिए जोर आजमाइश कर रहे हैं. 

देखें: आजतक LIVE TV

पंजाब में केंद्र के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसान आंदोलनरत हैं. नवजोत सिंह सिद्धू इस आंदोलन में एक बार किसानों को संबोधित कर चुके हैं लेकिन वह भी कांग्रेस के बैनर के बगैर. हालांकि नवजोत सिंह सिद्धू का अगला क्या कदम होगा फिलहाल साफ नहीं है लेकिन पार्टी किसी भी तरह उनको मनाने में लगी हुई है. हाईकमान की कोशिश है कि सिद्धू कांग्रेस में ही रहे. 

निर्वासित सियासी जीवन में सिद्धू का नया अवतार 

पिछले एक साल से लगभग निर्वासित राजनीतिक जीवन जी रहे नवजोत सिंह सिद्धू का एक नया अवतार भी देखने को मिला है. उन्होंने ‘जीतेगा पंजाब’ के नाम से एक यूट्यूब चैनल खोला है जिसमें वह पंजाब से जुड़े हुए मुद्दों को उठाते रहते हैं. अक्सर अकाली दल उनके निशाने पर रहता है लेकिन वो कई बार अपनी ही सरकार को भी कटघरे में खड़ा कर चुके हैं.

सिद्धू बार-बार पंजाब के कम हो रहे राजस्व के लिए पंजाब में फैले माफिया राज को जिम्मेवार मानते आ रहे हैं. सिद्धू ने किसान आंदोलन के दौरान अपनी ही सरकार को अपना न्यूनतम समर्थन मूल्य योजना शुरू करने की सलाह भी दी थी. 

देखना दिलचस्प होगा कि नवजोत सिंह सिद्धू की बुधवार को हो रही कैप्टन के साथ मुलाकात का क्या नतीजा निकलता है? क्या सिद्धू वापिस कैप्टन की कैबिनेट में लौटते हैं या फिर उनके तेवर पहले की तरह ही रहते हैं. इस घटनाक्रम पर न सिर्फ कांग्रेस बल्कि भारतीय जनता पार्टी और आम आदमी पार्टी की भी पैनी नजरें हैं.

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें