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कृषि कानून को वापस ले केंद्र, प्रतिष्ठा का मामला न बनाए सरकारः पंजाब

पंजाब मंत्रिमंडल की बैठक में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार जमीनी हकीकत से दूर है. बैठक में शामिल सदस्यों ने केंद्रीय कृषि कानूनों को वापस लिए जाने की अपील की. कैबिनेट ने मांग की कि केंद्र एमएसपी को किसानों का वैधानिक अधिकार बनाए.

मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह (File-PTI) मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह (File-PTI)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 'न्यूनतम समर्थन मूल्य किसानों का वैधानिक अधिकार बने'
  • प्रदर्शन के दौरान मारे गए किसानों की याद में 2 मिनट का मौन
  • कृषि कानूनों के खिलाफ पंजाब कैबिनेट ने पास किया प्रस्ताव

दिल्ली में सिंघु बॉर्डर पर जारी आंदोलन के बीच कैप्टन अमरिंदर सिंह की अगुवाई वाली पंजाब सरकार ने एक बार फिर केंद्र सरकार से गुजारिश की है कि वह कृषि कानूनों की वापसी को लेकर अपनी प्रतिष्ठा का मामला न बनाए. इस बीच पंजाब कैबिनेट ने भारत सरकार से कृषि कानूनों को निरस्त करने का अनुरोध करते हुए दोहराया कि कृषि का मामला राज्य का विषय है.

पंजाब मंत्रिमंडल की बैठक में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार जमीनी हकीकत से दूर है. बैठक में शामिल सदस्यों ने केंद्रीय कृषि कानूनों को वापस लिए जाने की अपील की. कैबिनेट ने मांग की कि केंद्र एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) को किसानों का वैधानिक अधिकार बनाए, जो देश का अन्नदाता होने के बावजूद अपनी उपज का बेहद कम कीमत पाता है. 

2 मिनट का मौन

बैठक की शुरुआत में, कैबिनेट ने प्रदर्शन के दौरान मारे गए किसानों की याद में 2 मिनट का मौन रखा. माना जा रहा है कि प्रदर्शन की वजह से अब तक 78 किसानों की मौत हो चुकी है. कृषि कानूनों के खिलाफ पंजाब कैबिनेट ने एक प्रस्ताव भी पास किया.

बैठक में यह भी कहा गया कि किसानों के आंदोलन को लेकर सुप्रीम कोर्ट भी चिंतित है और उनकी तकलीफों तथा दर्द को समझा. कैबिनेट ने कहा कि भारत सरकार को इस मामले को प्रतिष्ठा और इगो का मामला नहीं बनाना चाहिए. अगर ये अनसुलझे रहे तो आने वाले दशकों में देश के लिए विनाशकारी साबित होंगे. इस बैठक में पंजाब प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष सुनील जाखड़ भी शामिल हुए.

कृषि राज्य का विषय

एक औपचारिक प्रस्ताव में, कैबिनेट ने 28 अगस्त, 2020 और 20 अक्टूबर, 2020 को पंजाब विधानसभा द्वारा पारित प्रस्तावों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को स्पष्ट रूप से दोहराया, जिसमें कहा गया कि किसानों की सभी वास्तविक मांगों को स्वीकार किया जाना चाहिए. भारत सरकार से कृषि कानूनों को निरस्त करने को लेकर आग्रह किया गया. साथ ही दोहराया की कृषि का मामला राज्य का विषय है.

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पंजाब विधानसभा ने पिछले साल अक्टूबर में सर्वसम्मति से केंद्र सरकार के कृषि से जुड़े तीन कानूनों को निरस्त करने का प्रस्ताव पास किया था. 

प्रस्ताव में कहा गया था, 'सभी भागीदारों के साथ व्यापक बातचीत और उचित परामर्श की जरुरत है क्योंकि ये कानून देशभर के लाखों किसानों के भविष्य को प्रभावित करते हैं और किसानों की सभी वास्तविक मांगों को स्वीकार किया जाना चाहिए.'

कैबिनेट ने विस्तृत चर्चा के बाद, 12 जनवरी 2021 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ध्यान दिया, जिसमें तीन कृषि कानूनों के अमल पर रोक लगा दी है. 

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