उत्तर प्रदेश में निकाय चुनाव (UP Local Body Election 2022) इसी साल नवंबर महीने के अंतिम सप्ताह में या फिर दिसंबर के पहले सप्ताह में होने हैं. वहीं साल 2024 में लोकसभा चुनाव होंगे. यूपी के विधानसभा चुनाव में बहुमत हासिलृ कर लगातार दूसरी बार सत्ता में आई बीजेपी निकाय चुनाव में भी सबसे बड़ी पार्टी बनने के लिए तैयारी में जुट गई है. हाल ही में, यूपी बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष और संगठन मंत्री को बदला गया है. बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष और संगठन महामंत्री पर पुराने लोगों के जैसे 'जीत' के क्रम को बनाए रखने की जिम्मेदारी होगी.
नए प्रदेश अध्यक्ष भूपेन्द्र चौधरी और संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह की नजर अपने पहले ‘टास्क’ ( निकाय चुनाव) पर है. मिशन 2024 के ‘फाइनल’ से पहले इस 'टेस्ट' को लेकर पार्टी जल्द ही बड़ी तैयारी के साथ जमीन पर उतरने वाली है. क्योंकि साल 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव के पहले सियासी जमीन पर हर राजनीतिक दल का यही ‘टेस्ट’ होगा.
पार्टी ने मिशन 2024 के लिए पहले ही तैयारी शुरू कर दी है. वहीं, प्रदेश नेतृत्व की नजर अब निकाय चुनाव पर है. नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष भूपेन्द्र चौधरी और संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह की नजर निकाय चुनाव में ज्यादा से ज्यादा सीट जीतने पर होगी.
निकाय चुनाव में ज्यादा सीटें जीतने के लक्ष्य का महत्व इस बात से समझा जा सकता है कि संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह ने अपनी नियुक्ति के बाद लखनऊ पहुंचने से पहले पश्चिमी यूपी में निकाय चुनाव के लिए जमीन तैयार करने के लिए बैठक की थी. प्रदेश अध्यक्ष और संगठन मंत्री ने सबसे पहले नगर निकाय चुनाव को लेकर ही बैठक की थी. जिसमें यूपी में पार्टी के सभी जिलाध्यक्ष जुड़े थे. इस बैठक में जिलाध्यक्षों को निर्देश दिए गए थे कि नगर निकाय चुनाव के लिए अभी से जमीन तैयार करें.

मोदी रथ को आगे ले जाने की जिम्मेदारी
यूपी में प्रदेश अध्यक्ष और संगठन महामंत्री ऐसे समय पर नियुक्त हुए हैं जब सामने 2024 के रूप में बड़ा लक्ष्य है. मिशन मोदी के रथ को आगे ले जाने की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश में इन्हीं दोनों पर होगी. भूपेन्द्र चौधरी योगी सरकार में मंत्री रहे हैं.
पश्चिमी यूपी की सियासी ज़मीन पर पकड़ और ‘जाट’ फ़ैक्टर उनकी नियुक्ति की वजह भी रही. ऐसे में लोकसभा चुनाव 2024 में पश्चिमी यूपी में कमल खिलाना उनकी जिम्मेदारी होगी. यह बात इसलिए भी अहम है क्योंकि पश्चिमी यूपी में समाजवादी पार्टी और आरएलडी के गठबंधन के कारण पार्टी को 2022 के विधानसभा चुनाव में भी चुनौती मिली. पार्टी का फोकस इस क्षेत्र में होगा. चुनाव की शुरुआत इसी वेस्ट यूपी से ही होती है.
इसलिए पार्टी लोकसभा चुनाव से पहले होने वाले सेमी फ़ाइनल ( निकाय चुनाव ) में कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहेगी. खुद भूपेन्द्र चौधरी भी पंचायत चुनाव में ब्रज क्षेत्र के प्रभारी रह चुके हैं. ऐसे में इस क्षेत्र के सियासी ज़मीन को समझने का उनका अनुभव भी काम आने वाला है. जल्द ही दोनों भूपेन्द्र चौधरी और धर्मपाल सिंह यूपी का दौरा भी करने वाले हैं.

निकाय चुनाव में बड़ी जीत से बड़ा संदेश
प्रदेश अध्यक्ष और संगठन महामंत्री का पहला ‘टास्क’ इस लिहाज़ से भी अहम है. क्योंकि, प्रदेश के 17 नगर निगमों और नगर पालिका परिषद में नतीजों से सीधा संदेश जाएगा. विधानसभा चुनाव में मिली जीत को बरकरार रखने से यह संदेश जाएगा कि पार्टी की ज़मीनी क्षेत्रों में कितनी पकड़ है.
सेवा पखवाड़ा का बड़ा असर
निकाय चुनाव के लिए पार्टी 17 सितंबर को आने वाले पीएम मोदी के जन्मदिन से लेकर महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री की जयंती 2 अक्टूबर तक मनाए जाने वाले ‘सेवा पखवाड़े’ को अपना सबसे बड़ा जरिया बनाएगी. क्योंकि, ‘सेवा पखवाड़े’ में कार्यक्रमों की एक श्रंखला तैयार की गयी है. पार्टी इसके ज़रिए लगभग हर घर का दरवाज़ा खटखटाएगी, हर वर्ग के लोगों तक पहुंचेगी. इस सेवा पखवाड़े को नगर निकाय चुनाव की तैयारी की दृष्टि से ही देखा जा रहा है. पार्टी का पुराना सूत्र ‘संवाद और सम्पर्क’ नगर निकाय चुनाव के लिए भी काम करेगा.
बीजेपी के लिए हर चुनाव गंभीर मुद्दा
यूपी बीजेपी के उपाध्यक्ष और एमएलसी विजय बहादुर पाठक कहते हैं, ''बीजेपी हर चुनाव को गम्भीरता से लेती है. चाहे वो लोकसभा चुनाव हो, विधानसभा चुनाव हो, निकाय चुनाव हो, पंचायत चुनाव हो या शिक्षक चुनाव ही क्यों ना हो. पिछले नगर निकाय चुनाव में भी पार्टी ने बड़ी सफलता हासिल की थी. पार्टी इस नगर निकाय चुनाव में भी बड़ी जीत दर्ज़ करेगी.''
पाठक ने यह भी कहा कि पिछले निकाय चुनाव में बीजेपी ने यूपी के 16 नगर निगमों में से 14 पर जीत हासिल की थी. 2 नगर निगम अलीगढ़ और मेरठ में बीएसपी ने जीत हासिल की थी. इस बार शाहजहांपुर नगर निगम बनने से नगर निगमों की संख्या 17 हो गयी है. पार्टी ने सभी नगर निगम जीत कर सौ प्रतिशत सफलता हासिल करने का बड़ा लक्ष्य तय किया है.
गठजोड़ होने से रोकना होगा
लोकसभा चुनाव से पहले अपने टास्क के रूप में प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी और संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह के लिए बड़ी चुनौती विपक्ष के किसी भी तरह के गठजोड़ को रोकना की होगी. शिवपाल सिंह यादव ने समाजवादी पार्टी से राहें अलग कर इसके लिए बीजेपी की राह कुछ आसान करने का संकेत दिया है, तो वहीं बीजेपी की कोशिश समाजवादी पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं को तोड़ने की भी है.
इसके साथ ही अपने कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने के लिए भी बीजेपी उनको लगातार सक्रिय रखेगी. पहले ‘टास्क’ में नगर निगम और नगर पालिका परिषदों में टिकट बांटने में कार्यकर्ताओं को प्रमुखता देने की बात तय हो चुकी है. जिससे इस चुनाव से आगे 'मिशन 2024' के लक्ष्य के लिए कार्यकर्ताओं को तैयार किया जा सके.
जिला स्तर पर इसके लिए अलग अलग नेताओं और जिलों के पदाधिकारियों की ज़िम्मेदारी होगी जो अपने क्षेत्रों में सक्रिय नज़र आएंगे. सरकार और संगठन के तालमेल की दृष्टि से जल्दी ही नगर निकाय चुनाव के लिए प्रदेश सरकार के मंत्री भी लगाए जाएंगे. इसके साथ ही प्रदेश संगठन के पदाधिकारियों को भी जिम्मेदारी दी जाएगी.