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अशोक गहलोत को क्लीन चिट, सहयोगियों को नोटिस, राजस्थान पर संभलकर चल रहा आलाकमान

राजस्थान की सियासत में अशोक गहलोत जैसा चाहते थे, वैसा ही कुछ होता दिख रहा है. कांग्रेस हाईकमान का संदेश लेकर दिल्ली से जयपुर पहुंचे पर्यवेक्षक मलिकार्जुन खड़गे और अजय माकन गहलोत खेमे के विधायकों के बागी रुख के चलते बैठक नहीं कर सके. इतना कुछ होने के बाद भी कांग्रेस ने गहलोत को क्लीन चिट दे दी, हालांकि उनके तीन सिपाहियों के खिलाफ एक्शन लिया गया है

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सोनिया गांधी और अशोक गहलोत (फाइल फोटो)
सोनिया गांधी और अशोक गहलोत (फाइल फोटो)

राजस्थान में हुए राजनीतिक घटनाक्रम पर माकन-खड़गे ने आलाकमान को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है. सियासी संग्राम के लिए सीएम अशोक गहलोत को क्लीन चिट दे दी गई, लेकिन उनके सिपहसालार शांति धारीवाल, धमेंद्र राठौड़ और चीफ व्हीप महेश जोशी पर एक्शन लेने की सिफारिश की गई है. माना जा रहा है कि राजस्थान में किसी बड़े संकट को टालने और फेस सेविंग के लिए गहलोत को बख्श दिया गया है, जिससे कि सुलह-समझौता का रास्ता बना रहे? 

कांग्रेस हाईकमान ने अशोक गहलोत को राजस्थान में हुई घटना के लिए सीधे तौर पर दोषी नहीं ठहराया है जबकि पर्यवेक्षक अजय माकन और मल्लिकार्जुन खड़गे ने इसे अनुशासनहीनता की संज्ञा दी थी. गहलोत को पूरे घटनाक्रम का जिम्मेदार कहा जा रहा था. हंगामे के बाद माकन ने जयपुर में अशोक गहलोत से मुलाकात तक नहीं की और दिल्ली वापस आकर उन्होंने मीडिया से बात करते हुए गहलोत के ऊपर आरोप मढ़े थे तो खड़गे ने कहा था कि गहलोत की सहमति के बिना ऐसा विद्रोह नहीं हो सकता था. इसके बावजूद माकन-खड़गे ने अपनी रिपोर्ट में गहलोत को क्लीन चिट दे दी है.

वहीं, पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट के आधार पर कांग्रेस हाईकमान ने राजस्थान के तीनों नेताओं को पार्टी हित के खिलाफ काम करने के आरोप में कारण बताओ नोटिस जारी किया गया. कांग्रेस की अनुशासनात्मक समिति के द्वारा जारी नोटिस में शांति धारीवाल, महेश जोशी, धर्मेंद्र राठौड़ को 10 दिन के अंदर अपना जवाब देने को कहा है. धारीवाल से कहा गया कि उन्होंने संसदीय कार्य मंत्री होते हुए पार्टी के आधिकारिक प्रक्रिया के तहत बुलाई गई मीटिंग में ना बैठकर अलग से मीटिंग बुलाई. 

अनुशासनात्मक समिति ने महेश जोशी से भी कहा कि चीफ व्हिप के पद पर होते हुए आपने विधायक दल की बैठक बुलाई और उसके सामानांतर अलग से बैठक की जो पार्टी के खिलाफ है. इस तरह से शांति धारीवाल, महेश जोशी और राठौड़ को भी कांग्रेस की अनुशासनात्मक समिति ने नोटिस जारी करते हुए जवाब तलब किया गया है. लेकिन, गहलोत को पूरी तरह से क्लीन चिट दे दिया गया जबकि खडगे से लेकर माकन तक ने कहा था कि उनकी सहमति के बिना विधायक यह कदम नहीं उठा सकते हैं. 

कांग्रेस मौजूदा समय में सबसे मुश्किल दौर से गुजर रही है और पार्टी सिर्फ दो राज्यों में राजस्थान और छत्तीसगढ़ की सत्ता पर काबिज है. राजस्थान में 14 महीने के बाद विधानसभा चुनाव होने हैं और ऐसे में कांग्रेस अशोक गहलोत पर एक्शन लेकर किसी तरह का कोई जोखिम भरा कदम नहीं उठाना चाहती है. राजस्थान में कांग्रेस विधायकों का बड़ा समर्थन गहलोत के साथ है और संगठन पर भी उनकी मजबूत पकड़ है. पंजाब में सियासी टकराव और एक्शन के चलते कांग्रेस सत्ता गवां चुकी है और अब राजस्थान में रिस्क लेने के मूड में नहीं दिख रही. 

दरअसल, कांग्रेस हाईकमान सीएम अशोक गहलोत की 'जादूगरी' से वाकिफ हैं. दशकों के सियासत से गहलोत ने जो जादूगरी सीखी है, उसके दम पर वो लड़ाई का मैदान बदलने का माद्दा रखते हैं. गुजरात में 2017 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने कांग्रेस को बीजेपी के मुकाबले पर लाकर खड़ा कर दिया था. बीजेपी को गुजरात का दुर्ग बचाने में पसीने छूट गए थे और  पीएम मोदी-अमित शाह को आखिरी दिनों में अहमदाबाद में कैंप करना पड़ गया था. इस बार भी गुजरात चुनाव की कमान गहलोत और उनेक करीबी नेताओं के हाथों में है. 

आलाकमान सचिन पायलट को सीएम बनाना चाहता है लेकिन गहलोत खेमे के विधायकों की बगावत की वजह से फिलहाल उनकी राह मुश्किल हो गई. गहलोत खेमे का 'ऑपरेशन पायलट' फिलहाल के लिए सफल होता दिख रहा है. इस ऑपरेशन के लिए भले ही गहलोत के तीन सिपहसालारों पर एक्शन की तलवार लटक रही है, लेकिन पायलट को फिलहाल मुख्यमंत्री की कुर्सी से दूर रखने की उनकी रणनीति सफल रही. 

गहलोत ने भी जयपुर की घटना से अपने आपको अलग कर लिया है. इस तरह उन्होंने हाईकमान को इस बात का संदेश दिया है कि दोषियों के खिलाफ वह कार्रवाई करें. सीएम गहलोत की कोशिश है कि वह किसी तरह से सोनिया गांधी तक अपनी सफाई देने के लिए पहुंच जाए. यही कारण है कि उन्होंने आज बयान देते हुए कहा कि उन्होंने कभी भी हाईकमान के खिलाफ किसी प्रकार का कोई बयान नहीं दिया है और ना ही उन्हें चुनौती दी. इस तरह से गहलोत की ओर से सुलह करने की गुंजाइश रखी गई. 

राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि सियासी मजबूरी के चलते भले ही अशोक गहलोत के खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया जा रहा है, लेकिन आलाकमान उनसे काफी खफा है. इसीलिए गहलोत खेमा अब नरम रुख अपना रहा है. महेश जोशी से लेकर प्रताप सिंह खाचरियावास तक डैमेज कंट्रोल में जुट गए हैं. महेश जोशी ने आरोप भी लगाया कि उनकी पार्टी के कुछ बड़े नेता कार्यकर्ताओं की भावनाओं को सही तरीके से आलाकमान तक नहीं पहुंचा पाते ,उसी के चलते इस तरह का संकट बन जाता है. 

महेश जोशी ने कहा कि हमारी कोई भी शर्तें नहीं थी, हमने अजय माकन से कहा था कि हमारी बात आलाकमान तक पहुचा दें परंतु वो तैयार नहीं थे. वहीं, प्रताप सिंह खाचरियावास ने अशोक गहलोत को अपना अभिभावक बताया. साथ ही ये भी कहा कि राहुल गांधी, सोनिया गांधी या आलाकमान कहेगा तो हम खून बहा देंगे. उन्होंने कहा कि विधायकों ने कांग्रेस हाईकमान को चुनौती नहीं दी है. 

 

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