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राष्ट्रीय पिछड़ा आयोग का अध्यक्ष बनाए गए पूर्व केंद्रीय मंत्री हंसराज गंगाराम अहीर

महाराष्ट्र की राजनीति में हंसराज गंगाराम अहीर एक बड़ा नाम हैं. वे अपने प्रशंसकों के बीच हंसराज भैया के नाम से जाने जाते हैं. वह केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री रहे और वे 2016 से 2019 तक इस पद पर बने रहे. उन्हें देश के चर्चित कोल ब्लॉक आवंटन घोटाला को सामने लाने के लिए जाना जाता है.

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पूर्व केंद्रीय मंत्री हंसराज गंगाराम अहीर. (फोटो- ट्विटर)
पूर्व केंद्रीय मंत्री हंसराज गंगाराम अहीर. (फोटो- ट्विटर)

पूर्व केंद्रीय मंत्री हंसराज गंगाराम अहीर को राष्ट्रीय पिछड़ा आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उनकी नियुक्ति पर मुहर लगा दी है. गंगाराम महाराष्ट्र के चंद्रपुर से 4 बार बीजेपी से सांसद रहे हैं. उन्होंने केंद्र सरकार में गृह राज्य मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाली है. 

गंगाराम अहीर ने मनोनयन पर ट्वीट कर आभार जताया है. उन्होंने कहा- राष्ट्रीय ओबीसी आयोग के अध्यक्ष का पद देने के लिए भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का हार्दिक धन्यवाद. नवीन दायित्व के जरिए पिछड़ा वर्ग के उत्थान के लिए भरसक प्रयास कर पद के साथ न्याय करेंगे.

महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम और बीजेपी देवेंद्र फडणवीस ने भी गंगाराम अहीर को बधाई दी है. फडणवीस ने ट्वीट किया- पूर्व केंद्रीय मंत्री हंसराज गंगाराम अहीर जी को राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किए जाने के लिए हार्दिक बधाई. आपके सफल कार्यकाल की कामना करते हैं.

जानिए हंसराज गंगाराम अहीर के बारे में...

महाराष्ट्र की राजनीति में हंसराज गंगाराम अहीर एक बड़ा नाम हैं. वे अपने प्रशंसकों के बीच हंसराज भैया के नाम से जाने जाते हैं. वह केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री रहे और वे 2016 से 2019 तक इस पद पर बने रहे. उन्हें देश के चर्चित कोल ब्लॉक आवंटन घोटाला को सामने लाने के लिए जाना जाता है. इस घोटाले को कोलगेट भी कहा जाता है. उनके इस खुलासे के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 2014 में चार को छोड़कर सभी कोल ब्लॉक्स के आवंटन रद्द कर दिए थे.

अहीर 2004 से 2006 तक यूपीए शासनकाल के दौरान हुए कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाले को लगातार उठाते रहे. इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री, चीफ विजिलेंस कमिश्नर (सीवीसी) और कंट्रोलर ऐंड ऑडिटर जनरल ऑफ इंडिया (सीएजी) को लगातार चिट्ठियां लिखते रहे. बाद में उनकी ही कोशिशों का नतीजा रहा कि यह घोटाला सामने आ सका. कहा जाता है कि आवंटन में गड़बड़ियों को लेकर हंसराज अहीर ने तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को करीब 12 से 13 पत्र लिखे. अहीर जब कोयला, स्टील और खानों पर संसद की स्थायी समिति के सदस्य के रूप में काम कर रहे थे तभी उन्हें इस घोटाले की भनक लगी और इस संबंध में 2006 में पहला पत्र लिखा था और यह मामला सामने आया.

3 बार मिला संसद रत्न अवॉर्ड 

1996 के बाद 2004 में वह दूसरी बार चंद्रपुर संसदीय क्षेत्र से लोकसभा के लिए चुने गए. इस कार्यकाल में 2004 के बाद से वह कोयला, स्‍टील और कृषि समिति के सदस्‍य रहे. 2009 लोकसभा चुनाव में वह तीसरी बार विजयी हुए. इसके बाद वह 2014 में भी चुने गए. वह 2011, 2012, 2013 और 2014 संसद रत्न अवार्ड से भी नवाजे गए. 14वीं लोकसभा के दौरान स्पीकर सोमनाथ चटर्जी ने अहीर को सभी सांसदों के लिए रोल मॉडल बताया. अपने संसदीय कार्यकाल के दौरान वह कई संसदीय समिति के सदस्य रहे हैं.

 

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