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कांग्रेस के वो परिवारवादी सियासतदान जो मोदी राज में हो गए बीजेपी में शिफ्ट

कुलदीप बिश्नोई बीजेपी में शामिल होने के बाद इसलिए चर्चा में हैं, क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित बीजेपी नेता लगातार परिवारवादी राजनीति को लेकर निशाना साधते रहे हैं. इतना ही नहीं, बीजेपी 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले सियासत को 'वंशवाद से मुक्त' करने का नेरेटिव गढ़ रही है. पीएम मोदी कई मौकों पर राजनीति में वंशवाद के खिलाफ आवाज उठा चुके हैं.

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हरियाणा के दिग्गज कांग्रेस नेता कुलदीप बिश्नोई बीजेपी में शामिल हो गए हैं.
हरियाणा के दिग्गज कांग्रेस नेता कुलदीप बिश्नोई बीजेपी में शामिल हो गए हैं.

हरियाणा के दिग्गज नेता और पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल के बेटे और चार बार के विधायक रहे कुलदीप बिश्नोई ने कांग्रेस को अलविदा कह कर बीजेपी का दामन गुरुवार को थाम लिया है. कुलदीप बिश्नोई को सियासत अपने पिता से विरासत में मिली है, जिसके चलते उनके बीजेपी में एंट्री करते ही वंशवाद की राजनीति फिर से सुर्खियों में आ गई है. हालांकि, कुलदीप बिश्नोई पहले कांग्रेस के परिवारवादी सियासतदान नहीं है, जिन्होंने मोदी राज में बीजेपी की सदस्यता ग्रहण की है बल्कि ऐसे नेताओं की फेहरिश्त दिन-ब-दिन काफी लंबी होती जा रही है. 

कुलदीप बिश्नोई बीजेपी में शामिल होने के बाद इसलिए चर्चा में हैं, क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित बीजेपी नेता लगातार परिवारवादी राजनीति को लेकर निशाना साधते रहे हैं. इतना ही नहीं, बीजेपी 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले सियासत को 'वंशवाद से मुक्त' करने का नेरेटिव गढ़ रही है. पीएम मोदी कई मौकों पर राजनीति में वंशवाद के खिलाफ आवाज उठा चुके हैं.

पीएम मोदी ने कहा था कि भाजपा में वंशवाद की राजनीति का कोई स्थान नहीं होगा और परिवार के नेतृत्व वाली राजनीतिक पार्टियों को चुनौती मिलती रहेगी. ऐसे में कुलदीप बीजेपी में सदस्यता लेने के बाद क्या अपने बेटे भव्य बिश्नोई का सियासी भविष्य सेट कर पाएंगे यह बड़ा सवाल है.

कुलदीप बिश्नोई

हरियाणा कांग्रेस के पूर्व नेता कुलदीप बिश्नोई ने गुरुवार को अपने समर्थकों सहित बीजेपी का दामन थाम लिया. उन्हें पार्टी मुख्यालय में राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नेड्डा, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर और जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत की उपस्थिति में सदस्यता दिलाई गई. हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भजन लाल के कुलदीप बिश्नोई छोटे बेटे हैं. वह आदमपुर विधानसभा से चार बार विधायक रहे और भिवानी व हिसार से दो बार सांसद भी रहे हैं. पीएम नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हुए कुलदीप बिश्नोई ने कहा कि वह देश के अब तक के सबसे बेहतरीन प्रधानमंत्री हैं, जिनके नेतृत्व में देश काफी आगे बढ़ रहा है.

सुनील जाखड़

पंजाब कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रहे सुनील जाखड़ इसी साल मई में बीजेपी में दामन थामा है. सुनील जाखड़ कांग्रेस में विभिन्न पदों पर रहे. अबोहर विधानसभा से तीन बार विधायक रहे जाखड़ पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता भी रह चुके हैं. सुनील जाखड़ ने 2017 में बीजेपी सांसद विनोद खन्ना के निधन के बाद गुरदासपुर लोकसभा उपचुनाव जीतकर सांसद रहे. गांधी परिवार के करीबी नेता में सुनील जाखड़ को गिना जाता था, लेकिन चरणजीत सिंह चन्नी को सीएम बनाए जाने के चलते वो नाराज चल रहे थे. 

sunil jakhar

सुनील जाखड़ को भी सियासत विरासत में मिली है. उनके पिता बलराम जाखड़ कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे हैं. लोकसभा के दो बार बार अध्यक्ष और केंद्रीय कृषि मंत्री तक रहे चुके हैं. इतना ही नहीं बलराम जाखड़ मध्य प्रदेश के राज्यपाल के रूप में काम किया है. सुनील जाखड़ अपने पिता की उंगली पकड़कर सियासत सीखी है और कांग्रेस में यूथ अध्यक्ष से लेकर प्रदेश अध्यक्ष तक का सफर तय किया और अब बीजेपी की सदस्यता ग्रहण कर ली है. 

जितिन प्रसाद

कांग्रेस के दिग्गज नेता और यूपी में ब्राह्मण चेहरा माने जाने वाले जितिन प्रसाद ने जून 2021 में कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए. जितिन प्रसाद को भी सियासत अपने पिता जितेंद्र प्रसाद से विरासत में मिली है, जिसके चलते दो बार सांसद और यूपीए सरकार के दौरान केंद्र में मंत्री रहे. जितिन प्रसाद के परिवार की तीन पीढ़ियां कांग्रेस पार्टी से सक्रिय राजनीति में रही हैं. जितिन प्रसाद के पिता जितेंद्र प्रसाद कांग्रेस के अध्यक्ष पद का चुनाव सोनिया गांधी के खिलाफ लड़ा था. हालांकि, वो राजीव गांधी के करीबी नेताओं में गिने जाते थे. यही वजह थी कि जितिन प्रसाद को गांधी परिवार ने पहली बार सांसद बनते ही केंद्र में मंत्री बना दिया था. जितिन प्रसाद फिलहाल बीजेपी से विधान परिषद सदस्य और योगी आदित्यनाथ के मंत्रिमंडल मंत्री हैं. 

jitin prasad

आरपीएन सिंह

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय गृह मंत्री रहे आरपीएन सिंह ने इसी साल जनवरी में बीजेपी में शामिल हुए हैं. वह यूपी के कुशीनगर के पडरौना के सैंथवार राज परिवार से हैं. उनके पिता कुंवर चंद्र प्रताप नारायण सिंह, पडरौना लोकसभा क्षेत्र से सांसद थे और 1980 में इंदिरा गांधी कैबिनेट में रक्षा राज्य मंत्री थे. ऐसे में आरपीएन सिंह अपने पिता की सियासी विरासत संभाली. पडरौना से तीन बार विधायक रहे और 2009 में कुशीनगर से सांसद बने, जिसके बाद उन्हें यूपीए-2 में मनमोहन सिंह की कैबिनेट में शामिल किया गया था. इसके बावजूद कांग्रेस छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया. 

बीजेपी में शामिल होने के बाद आरपीएन सिंह ने ट्वीट कर कहा था, 'यह मेरे लिए एक नई शुरुआत है और मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दूरदर्शी नेतृत्व और मार्गदर्शन में राष्ट्र निर्माण में अपने योगदान के लिए तत्पर हूं.'

ज्योतिरादित्य सिंधिया

मध्य प्रदेश की सियासत में ज्योतिरादित्य सिंधिया एक बड़ा नाम माने जाते हैं. उन्होंने मार्च 2020 में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए थे. उन्होंने 18 साल तक कांग्रेस में रहने के बाद पार्टी छोड़ी थी. सिंधिया 2007 और 2014 के बीच विभिन्न मंत्रालयों के लिए स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री थे. ज्योतिरादित्य ने अपने पिता स्व. माधवराव सिंधिया की सियासी विरासत को संभाला था और गांधी परिवार के करीबी नेताओं में उन्हें गिना जाता था. माधवराव सिंधिया कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे हैं और गांधी परिवार के नजदीकी थी. राजीव गांधी से लेकर नरसिम्हा राव सरकार में मंत्री रहे. ज्योतिरादित्य सिंधिया को अपने पिता की विरासत का फायदा मिला, जिसके चलते ग्वालियर इलाके में उनकी पकड़ मजबूत हुई. यही वजह है कि बीजेपी ने उन्हें राज्यसभा के साथ-साथ मोदी कैबिनेट में भी जगह दी. 

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डॉ. संजय सिंह 

अमेठी राज घराने से आने वाले डा. संजय सिंह ने 2019 के बाद कांग्रेस छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया था. संजय का तीन पीढ़ियों का गांधी परिवार से रिश्ता रहा है. संजय सिंह कांग्रेस के दिग्गज नेता माने जाते थे. यूपी में कैबिनेट से लेकर केंद्र तक में मंत्री रहे और उनकी सियासी तूती बोलती थी. संजय सिंह की दो पत्नियां है और दोनों ही अमेठी से विधायक रह चुकी हैं. राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफा देकर संजय सिंह ने बीजेपी की सदस्यता लिया, जिसके बाद उन्हें 2022 के विधानसभा चुनाव में अमेठी से टिकट मिला था पर जीत नहीं सके.

(इनपुट- बिकेश कुमार सिंह)

 

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