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राजनीति में माफिया बृजेश सिंह के परिवार का ऐसा दबदबा, घर की रसोइया तक बनी ब्लॉक प्रमुख

बाहुबली मुख्तार अंसारी के काफिले पर गोलीबारी करके चर्चा में आया माफिया डॉन बृजेश सिंह 13 साल बाद जेल से बाहर आ गया है. इलाहाबाद हाई कोर्ट से सशर्त रिहाई मिलने के बाद उसने जेल से बाहर की दुनिया देखी. लेकिन क्या आप जानते हैं कि बृजेश सिंह कभी पढ़ाई में अव्वल छात्र था. राजनीति में अब भी उसके परिवार का बड़ा रसूख है. जानें कितनी बड़ी है बृजेश सिंह की राजनीतिक विरासत...

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बृजेश सिंह (फाइल फोटो) बृजेश सिंह (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 25 साल से परिवार का MLC सीट पर कब्जा
  • बीजेपी के टिकट पर जीते खूब चुनाव
  • जेल में रहकर पत्नी को जिताया MLC चुनाव

इलाहाबाद हाई कोर्ट से सशर्त रिहाई मिलने के बाद माफिया डॉन बृजेश सिंह ने गुरुवार को 13 साल बाद खुली हवा में सांस ली. बृजेश सिंह ने भले अपराध जगत में नाम कमाया हो, लेकिन उनका परिवार राजनीति में बड़ा रसूख रखता है. खुद बृजेश सिंह कॉलेज के दिनों में मेधावी छात्र रहा और बाद में उत्तर प्रदेश के वाराणसी से एमएलसी का चुनाव भी जीता. 

बृजेश सिंह कभी वाराणसी के उदय प्रताप कॉलेज का मेधावी छात्र होता था. वाराणसी के चौबेपुर थाना क्षेत्र के धौरहरा गांव के रहने वाले बृजेश सिंह के पिता रवींद्र सिंह की हत्या 27 अगस्त 1984 को एक जमीन विवाद में हुई थी. इसके बाद 1985 में बृजेश सिंह ने अपने पिता की हत्या के आरोपी हरिहर सिंह की हत्या कर दी. यहीं से बृजेश सिंह का अपराध जगत के दलदल में फंसना शुरू हो गया. इस मामले में पहली बार उसके खिलाफ वाराणसी के चौबेपुर थाने में केस दर्ज हुआ.

जेल में रहते हुए पत्नी को जिताया MLC चुनाव

हालांकि बृजेश सिंह के आपराधिक इतिहास की जितनी चर्चा होती है, उसका राजनीतिक सफर उससे जरा भी कम नहीं है. राजनीति में रसूख की बात करें तो इस साल अप्रैल महीने में हुए MLC चुनाव में बृजेश सिंह की पत्नी अन्नपूर्णा सिंह बतौर निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर वाराणसी से जीत दर्ज की. उन्होंने भाजपा प्रत्याशी सुदामा पटेल को भारी मतों से हराया. माफिया के तौर पर पहचान बनाने वाला बृजेश सिंह खुद भी MLC रहा है. जबकि उसका भतीजे सुशील सिंह विधायक है. बड़े भाई उदयनाथ सिंह उर्फ चुलबुल सिंह भी दो बार MLC रह चुके हैं. सुशील की पत्नी और भाई जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुके हैं. यहां तक बृजेश सिंह के घर की रसोइया तक ब्लॉक प्रमुख बनी है.

25 साल से परिवार का MLC सीट पर कब्जा

वाराणसी की MLC सीट पर पिछले ढाई दशक से बृजेश सिंह के परिवार का कब्जा है. 2016 के एमएलसी चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर खुद बृजेश सिंह मैदान में उतरा था. तब उसे बीजेपी का समर्थन मिला था और उसने जीत हासिल की थी. हालांकि बृजेश सिंह को समर्थन करने पर तब बीजेपी की काफी किरकिरी हुई थी, इसलिए 2022 में बीजेपी ने सुदामा पटेल पर दांव लगाया, लेकिन वाराणसी की जेल में बंद बृजेश सिंह ने अपनी पत्नी को निर्दलीय उतारकर बीजेपी को मात दे दी.

वाराणसी की MLC सीट पर बृजेश सिंह के भाई उदयनाथ सिंह उर्फ चुलबुल सिंह ने दो बार बीजेपी के टिकट पर चुनाव जीता. चुलबुल सिंह के बाद बृजेश सिंह की पत्नी अन्नपूर्णा सिंह ने 2010 में बसपा के टिकट पर जीत हासिल की. पिछले चुनाव में खुद बृजेश सिंह ने इस एमएलसी सीट से जीत हासिल की.

बीजेपी के टिकट पर जीते खूब चुनाव

बृजेश सिंह का भतीजा और दिवंगत चुलबुल सिंह का बड़ा बेटा सुशील सिंह अभी बीजेपी से विधायक है. हालिया 2022 के विधानसभा चुनाव में सुशील सिंह ने चंदौली की सैयदराजा सीट पर दोबारा जीत हासिल की है. वहीं लगातार चार बार विधानसभा चुनाव जीतकर उन्होंने इतिहास भी रचा है. सुशील ने अपने राजनीतिक जीवन में पांच विधानसभा चुनाव लड़े, जिसमें से केवल पहला चुनाव हारे.

बृजेश सिंह के परिवार से राजनीति में सबसे पहले उसके बड़े भाई उदयनाथ सिंह उर्फ चुलबुल सिंह ने प्रवेश किया. वो 1995 में सेवापुरी क्षेत्र से जिला पंचायत सदस्य चुने गए. इसके बाद वो जिला पंचायत अध्यक्ष भी रहे. फिर वाराणसी से दो बार MLC चुने गए. एक समय में चुलबुल सिंह को पंचायत चुनाव का चाणक्य कहा जाता था. वर्ष 2018 में चुलबुल सिंह का निधन हो गया. चुलबुल सिंह की पत्नी गुलाबी देवी भी 3 बार क्षेत्र पंचायत सदस्य चुनी गई हैं.

जब रसोइया बनी ब्लॉक प्रमुख

बृजेश सिंह के भतीजे सुशील की पत्नी किरण सिंह 2000 से 2005 तक वाराणसी की जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुकी हैं. सुशील सिंह के छोटे भाई सुजीत सिंह उर्फ डॉक्टर भी वाराणसी जिला पंचायत के अध्यक्ष रह चुके हैं. सुजीत की पत्नी इंदू सिंह तीन बार सेवापुरी ब्लॉक की प्रमुख रही हैं. यही नहीं बृजेश सिंह के परिवार का दबदबा ऐसा है कि पिछले साल ब्लॉक प्रमुख के चुनाव में इस परिवार की रसोइया ने जीत हासिल की. परिवार के लोग उसे पारिवारिक सदस्य मानते हैं. वर्ष 2021 के पंचायत चुनाव में जब सेवापुरी ब्लॉक प्रमुख का पद आरक्षित हो गया. तब बृजेश सिंह के परिवार ने उसके बड़े भाई चुलबुल सिंह के घर में रसोइया का काम देखने वाली रीना कुमारी को भाजपा से अपना प्रत्याशी घोषित किया और वह ब्लॉक प्रमुख बन गई.

 

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