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अमित शाह ने संभाली 2024 की कमान, अलग-अलग राज्यों में कर रहे ताबड़तोड़ दौरे

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पिछले दो महीनों में करीब 10 राज्यों का दौरा कर सियासी नब्ज की थाह ले चुके हैं और पार्टी की रणनीति को धार दे रहे हैं. अब शाह बिहार का सियासी माहौल भांपने के लिए इसी महीने 23-24 सिंतबर को दो दिवसीय दौरे पर सीमांचल जा रहे हैं.

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केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह

लोकसभा चुनाव होने में भले ही 20 महीने का समय बाकी हो, लेकिन सियासी जोड़-तोड़ शुरू हो गई है. नरेंद्र मोदी के खिलाफ हो रही विपक्षी एकता की मुहिम और राजनीतिक गहमा-गहमी के बीच केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने 2024 के लिए मोर्चा संभाल लिया है. अमित शाह ने दिल्ली में जेपी नड्डा के साथ बैठकर 2019 के चुनाव में बहुत कम अंतर से हारने वाली डेढ़ सौ सीटों के लिए रणनीति बनाई तो दूसरी तरफ अलग-अलग राज्यों में ताबड़तोड़ दौरे कर सियासी एजेंडा सेट करने में जुट गए. 

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पिछले दो महीनों में करीब 10 राज्यों का दौरा कर सियासी नब्ज की थाह ले चुके हैं और पार्टी की रणनीति को धार दे रहे हैं. पूर्वोत्तर से लेकर पश्चिमी के महाराष्ट्र, गुजरात तक दक्षिण के तेलंगाना, आंध्र प्रदेश से लेकर उत्तर भारत के छत्तीसगढ, मध्य प्रदेश और राजस्थान में दौरे के बाद बिहार के सियासी माहौल को भांपने के लिए इसी महीने 23-24 सिंतबर को दो दिवसीय दौरे पर अमित शाह सीमांचल जा रहे हैं.

शाह और नड्डा ने मंत्रियों को सौंपी थी बड़ी जिम्मेदारी

अमित शाह और जेपी नड्डा ने जून में केंद्र सरकार के मंत्रियों को राज्यों की परिस्थितियों का जायजा लेने की जिम्मेदारी दी थी. छह सितंबर को बीजेपी कार्यालय में उन सभी मंत्रियों को बुलाकर अमित शाह और नड्डा ने रिपोर्ट तलब की थी. सभी आंकलन और आंतरिक रिपोर्ट के बाद जहां विपक्ष की कोशिश बीजेपी को 250 से नीचे देखने की है तो बीजेपी 350 सीटें जीतने का टारगेट लेकर चल रही. ऐसे में पहले जीती हुई सीटों के अलावा इस बार बीजेपी के निशाने पर वो सीटें हैं जहां वह 2019 के चुनाव में दूसरे नंबर पर रही थी.

हर प्रदेश के हिसाब से अलग रणनीति

बीजेपी अगले लोकसभा चुनाव के लिए एक-एक प्रदेश की राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग रणनीति पर काम कर रही है. पार्टी गुजरात के चुनाव में त्रिकोणीय मुकाबले में जीत की रणनीति पर काम कर रही है तो राजस्थान में कांग्रेस से सीधे दो-दो हाथ करने की तैयारी है. महाराष्ट्र में महाविकास अघाड़ी को सियासी मात देने के लिए बीजेपी ने मजबूत तिकड़ी बनाई है.

अमित शाह दो दिन पहले राजस्थान में सीएम अशोक गहलोत के गढ़ जोधपुर पहुंचे थे. इस दौरे पर अमित शाह ने 'हिन्दुत्व कार्ड' चलकर यह साफ कर दिया कि राजस्थान में अगले साल होने वाला विधानसभा चुनाव पार्टी इसी मुद्दे पर लड़ेगी. अमित शाह ने ओबीसी मोर्चे के मंच से एक-एक करके राजस्थानी में बहुसंख्यक समुदाय के साथ हुई उन घटनाओं का जिक्र किया, जिसमें सांप्रदायिक एंगल था. शाह ने कांग्रेस की अशोक गहलोत सरकार पर हिदुओं की शोभा यात्राओं पर रोक लगाने तक का आरोप लगा दिया. 

अशोक गहलोत के गृह क्षेत्र में उन्हें ललकारकर अमित शाह ने यह भी संकेत दे दिए कि बीजेपी गंभीरता के साथ काम कर रही है और कांग्रेस से सत्ता छीनने की रणनीति बना रही है. वहीं, छत्तीसगढ़ में फिर से सत्ता में वापसी के लिए शाह ने ताना-बाना बुना तो मध्य प्रदेश में सत्ता को बरकरार रखने के लिए साफ संकेत दिए कि पार्टी मोदी के चेहरे और शिवराज के काम पर चुनाव लड़ेगी. 

महाराष्ट्र के निकाय चुनावों में बीजेपी एकनाथ शिंदे गुट और राज ठाकरे की पार्टी मनसे के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की रणनीति पर काम कर रही है. महाराष्ट्र की राजनीति में महाविकास अघाड़ी के सामने बीजेपी ने जो तिकड़ी बनाई है, वो काफी अहम है. महाराष्ट्र के निकाय चुनाव विधानसभा से भी ज्यादा महत्व रखते हैं.

अमित शाह हाल ही में मुंबई का दौरा कर उद्धव ठाकरे को सियासी मजा चखाने की खुली चुनौती देकर आए हैं. बीएमसी चुनाव के बाद इसी फॉर्मूले पर 2024 के चुनाव में भी महाविकास अघाड़ी को मात देने की रणनीति है. 

देवेंद्र फडणवीस के घर पर अमित शाह ने बैठक करके रणनीति बनाई. बीएमसी चुनाव में बीजेपी ने 150 पार्षद सीटें जीतने का टारगेट रखा ताकि मुंबई से उद्धव ठाकरे की सियासत को परास्त किया जा सके. बीजेपी ने इस तरह लोकसभा चुनाव से पहले ही उद्धव ठाकरे की राजनीति को खत्म करने की रणनीति बनाई है. अमित शाह ने मुंबई दौरे पर साफ कहा था कि 'उद्धव को उनकी जगह दिखाने का समय आ गया है.'

बीजेपी दक्षिणी राज्यों में अपनी पैठ बनाने के प्रयास कर रही है. मिशन-साउथ पर अमित शाह ने तेलंगाना और आंध्र प्रदेश का दौरा किया था. इस दौरान तेलंगाना में टीडीपी के साथ फिर से गठबंधन करने की कवायद की जा रही है. फिल्म स्टार जूनियर NTR ने अमित शाह से मुलाकात की थी. आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और टीडीपी के संस्थापक एन टी रामाराव के पोते जूनियर एनटीआर हमेशा से टीडीपी के समर्थक रहे हैं और उन्होंने पहले इसके लिए प्रचार भी किया है. ऐसे में अमित शाह के साथ उनकी मुलाकात के सियासी मकसद को समझा जा सकता है.

बीजेपी का मिशन-बिहार

बिहार में अमित शाह का कार्यक्रम मुस्लिम बहुल माने जाने वाले सीमांचल के इलाके में रखा गया है, जिसके सियासी मायने निकाले जा रहे हैं. नीतीश कुमार के एनडीए से अलग होने के बाद केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पहली बार दो दिन के लिए बिहार दौरे पर पहुंचेंगे. शाह 23 सिंतबर को पूर्णिया और 24 सिंतबर को किशनगंज में रैली करेंगे. अमित शाह मुख्य रूप से बिहार के उन इलाकों का दौरा कर रहे हैं, जिसे आरजेडी के यादव-मुस्लिम समीकरण और महागठबंधन के गढ़ के रूप में देखा जाता है. 

माना जा रहा है कि शाह महागठबंधन के मजबूत दुर्ग में मोदी सरकार की उपलब्धियों को गिनाकर और नीतीश सरकार के खिलाफ माहौल बनाकर राज्य में फतेह करने की सियासी बिसात बिछाएंगे.

बीजेपी ने शुरू से ही सीमांचल को अपने टारगेट में इसलिए रखा है, क्योंकि इलाका काफी संवेदनशील माना जाता है. सीमांचल में 40 से 70 फीसदी आबादी अल्पसंख्यकों की है. खासकर इस इलाके में बांग्लादेशी घुसपैठ एक बड़ा मुद्दा है. ऐसे में अमित शाह अपने सीमांचल दौरे पर इस मुद्दे को रैली में उठा सकते हैं. 

दरअसल, सीमांचल के जिलों में मुस्लिमों की बड़ी आबादी है, जिसके चलते बीजेपी जनसंख्या के असंतुलन और घुसपैठ को मुद्दा बनाती रही है. इतना ही नहीं, महागठबंधन के दलों पर इस इलाके में तुष्टिकरण के आधार पर वोटों को खींचने का आरोप लगाती रही है. जेडीयू के साथ होने के चलते बीजेपी खुलकर हिंदुत्व कार्ड नहीं खेलती थी, लेकिन बदले हुए माहौल में पार्टी के एजेंडे पर सियासी समीकरण सेट करने का मौका दिख रहा है.

अमित शाह सीमांचल दौरे पर घुसपैठ की समस्या उठा सकते हैं तो साथ ही अल्पसंख्यक समुदाय को अपनी तरफ खींचने के लिए केंद्र सरकार की योजनाओं को उनके सामने रखेंगे. बीजेपी की तरफ से इस कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की जा रही है. मुख्य रूप से इन दोनों कार्यक्रमों के संयोजक बिहार बीजेपी के कोषाध्यक्ष दिलीप जायसवाल हैं, जो सीमांचल में काफी सक्रिय हैं और विधान परिषद का चुनाव जीतते रहे हैं.

अमित शाह का दो महीने के भीतर बिहार का ये दूसरा दौरा होने जा रहा है. ऐसे में महागठबंधन के नेता अलर्ट हैं और सीमांचल का माहौल खराब करने का आरोप बीजेपी पर लगा रहे हैं.

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