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सावन में अनोखा शिवभक्त बना आकर्षण का केंद्र, खुद को शिव तो बाइक को बनाया नंदी

विश्वनाथ की नगरी काशी में शिवभक्त सुनील गुप्ता ने खुद को शिव के रूप में और अपने दोपहिया को नंदी की शक्ल दी है. वे शनिवार को शहर के गोदौलिया इलाके में विश्वनाथ मंदिर के नजदीक पहुंचे. यहां वे अपने साथी कांवड़ियां साथियों के साथ आए थे. यहां हर-हर महादेव और बोल बम का नारा गूंजने लगे. पुलिस भी आ गई थी.

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सुनील गुप्ता ने कहा कि जब तक सांसें चलती रहेंगी, तब तक शिव के रूप में ही बाबा विश्वनाथ के दर्शन करने आते रहेंगे. सुनील गुप्ता ने कहा कि जब तक सांसें चलती रहेंगी, तब तक शिव के रूप में ही बाबा विश्वनाथ के दर्शन करने आते रहेंगे.
स्टोरी हाइलाइट्स
  • सावन माह में काशी में शिवभक्तों की भीड़
  • शिव को जल अर्पित करने पहुंच रहे कांवड़िया

सावन के पावन माह में विश्वनाथ की नगरी काशी में कांवड़ियों और शिवभक्तों का अनोखा रूप देखने को मिल रहा है. शनिवार को यहां एक शिवभक्त का स्वरूप चर्चा में बना रहा. ये शिव भक्त ना सिर्फ खुद भोले के रूप में दिखा, बल्कि उसने अपने दोपहिया वाहन बाइक को भी शिव की सवारी नंदी की शक्ल दी थी. इसे देखने के लिए लोगों का तांता लगा रहा. शिव बने श्रद्धालु सुनील बताते हैं कि वे ऐसा एक साल से कर रहें हैं. इसके लिए भले ही उन्हें कई बार कर्ज लेना पड़ा.

सावन की फुहारों के बीच अगर बीच सड़क पर शिव साक्षात नंदी पर सवार होकर भक्तों के बीच आ जाएं तो नजारे का अंदाजा लगाया जा सकता है. ऐसा ही कुछ विश्वनाथ की नगरी काशी में तब देखने को मिला, जब एक शिवभक्त ना सिर्फ खुद शिव के रूप में, बल्कि अपने दोपहिया को भी नंदी की शक्ल देकर शहर के गोदौलिया इलाके में विश्वनाथ मंदिर के नजदीक आ पहुंचे. वे अपने साथी कांवड़ियां साथियों के साथ आए थे. 

वाराणसी

यहां हर-हर महादेव और बोल बम का नारा गूंजने लगे. पुलिस भी आ गई, लेकिन फिर शिवभक्त और उसके जत्थे को आगे जाने दिया. शिवभक्त ने अपना नाम सुनील गुप्ता बताया और वे वाराणसी के ग्रामीण इलाके अनइ बाजार के रहने वाले थे. सुनील पेशे से पान और छोटी परचून की दुकान चलाते हैं.

वाराणसी

आजतक से खास बातचीत में सुनील गुप्ता ने बताया कि जब तक सांसें चलती रहेंगी, तब तक शिव के रूप में ही बाबा विश्वनाथ के दर्शन करने आते रहेंगे. जब इच्छा करती है तब शिव रूप में आकर विश्वनाथ बाबा के दर्शन करने आ जाते हैं. जब से होश संभाला है- शिव भक्ति में डूब चुके हैं. 

सुनील बताते हैं कि उनकी पान और परचून की दुकान है. बाबा और नंदी के रूप के लिए उनके 15 हजार रुपए खर्च हो गए, इसके लिए उन्हें उधार तक लेना पड़ा, लेकिन कोई दिक्कत नहीं है. वे बताते हैं कि अगली बार वह अपने नंदी पर आगे गणेश और पीछे कार्तिके को भी बिठाएंगे. उन्होंने आगे बताया कि जब तक उनकी शक्ति रहेगी, तब तक यूं ही शिव रूप में रहेंगे.

स्थानीय गीतकार कन्हैया दुबे ने बताया कि आम तौर पर काशी में सावन माह में शिव भक्तों और कांवड़ियों का अनोखा रूप दिखता है. लेकिन इस शिवभक्त ने ना सिर्फ शिव का रूप ले रखा था, बल्कि अपने वाहन को भी नंदी का रूप दिया था, जो आकर्षण का केंद्र रहा.

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