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प. बंगालः 50 साल से हिंदू परिवार कर रहा मस्जिद की देखभाल, सांप्रदायिक सद्भाव की अनूठी मिसाल

बोस परिवार 1964 में पूर्वी पाकिस्तान से उत्तर 24 परगना आया था. दीपक बोस ने बताया कि मेरे माता-पिता का मानना ​​था कि पूजा की जगह पवित्र स्थान है और इसका सम्मान किया जाना चाहिए.

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बोस परिवार 1964 में पूर्वी पाकिस्तान से आया था बोस परिवार 1964 में पूर्वी पाकिस्तान से आया था
स्टोरी हाइलाइट्स
  • बोस बोले-मेरी मां ने मस्जिद में सबसे पहले दीया जलाया
  • 1964 में पूर्वी पाकिस्तान से आया था बोस परिवार

वर्तमान दौर में हम कई समुदायों के बीच मतभेद और धार्मिक समूहों के बीच संघर्ष की खबरें सुनते रहते हैं. ऐसे में पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना में एक हिंदू परिवार ने सांप्रदायिक सद्भाव की बेमिसाल तस्वीर पेश की है. दरअसल यहां 50 साल से बोस परिवार एक मस्जिद की देखभाल कर रहा है. दीपक बोस ने कहा कि मेरी मां ने मस्जिद में सबसे पहले दीया जलाया था.

बोस परिवार 1964 में पूर्वी पाकिस्तान से उत्तर 24 परगना आया था. इंडिया टुडे से बात करते हुए ईश्वर निरोद बोस के 74 साल के बेटे दीपक बोस ने बताया कि कैसे बोस परिवार यहां आकर ठहरा और मस्जिद की मरम्मत कराई.

जमींदार के साथ जमीन की अदला-बदली की
दीपक बोस ने बताया कि मैं 14 साल का था, जब हम पूर्वी पाकिस्तान के खुलना से बारासात (पश्चिम बंगाल) पहुंचे. दरअसल तब वहां दंगे भड़के हुए थे. जब दंगे शांत हुए तो कानून के अनुसार हमने खुलना के जियासुद्दीन मोरोल नाम के जमींदार के साथ जमीन की अदला-बदली की. यहां मेरे पिता ने एक जमीन अधिग्रहित की थी. यहां एक छोटी सी मस्जिद थी. जिसे मोरोल ने कहा था कि हम अपनी सुविधानुसार इस जमीन का इस्तेमाल कर सकते हैं. 

दीपक बोस ने सुनाई मस्जिद की देखभाल की दास्तां

पूजा की जगह पवित्र स्थान है

बोस परिवार के वर्तमान कुलपति दीपक बोस ने मस्जिद की देखभाल का श्रेय अपनी मां को दिया. उन्होंने कहा कि मेरे माता-पिता का मानना ​​था कि पूजा की जगह पवित्र स्थान है और इसका सम्मान किया जाना चाहिए. मेरी मां ने इस मस्जिद में सबसे पहले दीया जलाया था.

तीसरी पीढ़ी भी कर रही मस्जिद की देखभाल
बोस की तीसरी पीढ़ी ने मस्जिद की देखभाल का जिम्मा संभाल लिया है. तीसरी पीढ़ी के पार्थ बोस ने कहा कि मेरे दादा और मेरे पिता के बाद मेरी पीढ़ी मस्जिद की देखभाल कर रही है. हम यह देखकर खुश हैं कि हमारी अगली पीढ़ी इस मस्जिद की देखभाल के लिए आगे आने के लिए उत्सुक है.

बोस परिवार इसी मस्जिद की देखभाल कर रहा है

बोस परिवार ने कराया पुनर्निर्माण
मस्जिद के इमाम अख्तर अली ने कहा कि मूल मस्जिद लगभग 500 साल पुरानी थी. बोस परिवार ने इस जगह को अधिग्रहित किया. मस्जिद का पुनर्निर्माण कराया. इमाम ने कहा कि जब यह मस्जिद गियासुद्दीन मोरोल के पास थी तो इसकी हालत काफी खराब थी. बाद में मोरोल बांग्लादेश चला गया था. 
 

 

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