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अनाज खरीदना नहीं, उसे बांटना मुश्किल काम... मुफ्त राशन मामले में केंद्र सरकार से बोला सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान प्रवासी मजदूरों के रजिस्ट्रेशन के लिए गुजरात सरकार के पोर्टल के तर्ज पर दूसरे राज्यों को भी पोर्टल बनाने और मजदूरों के रजिस्ट्रेशन में तेजी लाने की सलाह दी. पश्चिम बंगाल सरकार ने सफाई दी और कहा कि वे इस पर काम कर रहे हैं. कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार से पूछा है कि आखिर वह वन नेशन-वन राशनकार्ड योजना क्यों नहीं लागू कर रही है.

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स्टोरी हाइलाइट्स
  • प्रवासी मजदूरों को फ्री राशन मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
  • केंद्र ने कहा कि राशन के मुफ्त वितरण की मियाद बढ़ाई है
  • कोर्ट बोला, अनाज की खरीद नहीं, मुश्किल काम वितरण है

कोरोना काल के दौरान प्रवासी मजदूरों को मुफ्त राशन दिए जाने के मामले में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि मजदूरों के लिए राशन के मुफ्त वितरण की मियाद बढ़ाई गई है. इसके जवाब में कोर्ट ने सरकार से कहा कि हम आपके वितरण पर संदेह नहीं कर रहे हैं. स्थिति यह है कि उन्हें किस योजना के तहत यह राशन वितरित किया जाएगा? कोर्ट ने यह भी सवाल किया कि अगर प्रवासी मजदूरों के पास राशन कार्ड नहीं हैं तो वे कौन सी योजना में कवर होते हैं? सुनवाई के दौरान कोर्ट में केंद्र सरकार ने कहा कि यह राज्यों को तय करना है कि वे इसे किस तरह से वितरित कर रहे हैं. कोर्ट ने कहा कि पश्चिम बंगाल जैसे कुछ राज्यों का कहना है कि उनके पास ऐसी कोई योजना नहीं है. केंद्र की ओर से पेश हुए एएसजी ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि पहचान तो राज्यों को ही करनी होगी. उसी तरह से जैसे फूड सिक्योरिटी के तहत किया गया था.

सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा, ''अनाज की खरीद मुश्किल नहीं है. मुश्किल काम उसका वितरण करना है.'' एसजी तुषार मेहता ने कहा कि हर राज्य के संबंधित सचिव के साथ एक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक करके एक सप्ताह में कोर्ट को सूचित किया जा सकता है.'' उन्होंने आगे कहा कि हम मजदूरों को मरने के लिए नहीं छोड़ रहे हैं. वे हमारी प्राथमिकता में हैं. एएसजी ने कहा कि जो सिस्टम विकसित किया जा रहा है, वह मजबूत होगा और यह सिर्फ एक सॉफ्टवेयर नहीं होगा.  निगरानी, ​​पर्यवेक्षण सब किया जाएगा. इस पर कोर्ट की बेंच ने पूछा कि क्या सिस्टम को बनाने में 3-4 महीने लगते हैं? कोर्ट ने केंद्र सरकार से सवाल किया, ''आपको अब भी 3-4 महीने की आवश्यकता क्यों है? आप कोई सर्वेक्षण आदि नहीं कर रहे हैं, लेकिन आप केवल एक मॉड्यूल बना रहे हैं, ताकि डेटा आपके सिस्टम में इकट्ठा किया जा सके.''

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान प्रवासी मजदूरों के रजिस्ट्रेशन के लिए गुजरात सरकार के पोर्टल के तर्ज पर दूसरे राज्यों को भी पोर्टल बनाने और मजदूरों के रजिस्ट्रेशन में तेजी लाने की सलाह दी. पश्चिम बंगाल सरकार ने सफाई दी और कहा कि वे इस पर काम कर रहे हैं. कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार से पूछा है कि आखिर वह वन नेशन-वन राशनकार्ड योजना क्यों नहीं लागू कर रही है. कोर्ट ने कहा कि आपको लागू करना ही होगा. सुप्रीम कोर्ट ने प्रवासी मजदूरों के रजिस्ट्रेशन को लेकर नेशनल डाटा ग्रिड बनाने और जिन मजदूरों के पास राशन कार्ड नहीं है उन्हें कैसे राशन मुहैया कराया जाए, इन मुद्दों पर.फैसला सुरक्षित रख लिया है. कोर्ट ने केंद्र और सभी राज्य सरकारों से कहा है कि वे इन मुद्दों पर तीन दिनों के भीतर लिखित दलील दे सकते हैं.


 

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