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'उम्रकैद की सजा पाए कैदी जो 10 साल जेल काट चुके हैं उन्हें मिले जमानत,' सुप्रीम कोर्ट का आदेश

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस अभय एस ओक की बेंच ने गुरुवार को जेल में बंद उम्र कैद के दोषियों की याचिकाओं पर सुनवाई की. इन याचिकाओं में कैदियों की तरफ से कहा गया है कि कोर्ट में अपील लंबित होने की वजह से रिहाई के इंतजार में सालों से इंतजार किया जा रहा है.

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सुप्रीम कोर्ट ने मामले में सुनवाई की.
सुप्रीम कोर्ट ने मामले में सुनवाई की.

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक अहम आदेश दिया है. SC ने कहा है कि उम्रकैद की सजा पाए कैदी जो 10 साल की जेल काट चुके हैं उन्हें जमानत मिलना चाहिए. कोर्ट के इस आदेश के बाद उन कैदियों को बड़ी राहत मिलने वाली है, जिनकी सजा को चुनौती देने की अपील दाखिल होने के बावजूद तारीख पर तारीख की वजह से सालों से सुनवाई लंबित चल रही है. या आगे बढ़ने और पूरी होने अथवा फैसला आने का इंतजार करना पड़ रहा है. 

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस अभय एस ओक की बेंच ने गुरुवार को जेल में बंद उम्र कैद के दोषियों की याचिकाओं पर सुनवाई की. इन याचिकाओं में कैदियों की तरफ से कहा गया है कि कोर्ट में अपील लंबित होने की वजह से रिहाई के इंतजार में सालों से इंतजार किया जा रहा है. मगर सुनवाई आगे ही नहीं बढ़ी.

10 जेल में बिताने पर भी अपील पर सुनवाई नहीं तो...

जॉइंट बेंच ने अपने आदेश में कहा है कि 10 साल कैद में गुजारने के बावजूद अपीलें लंबित हों तो दोषियों को जमानत पर रिहा कर देना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने राय दी है कि जो कैदी 10 साल जेल में बिता चुके हों, लेकिन उनकी अपीलों पर निकट भविष्य में सुनवाई होने के आसार नहीं हैं तो उन्हें भी जमानत पर रिहा कर दिया जाना चाहिए. बशर्ते, उन्हें जमानत देने से इनकार करने के अन्य कारण ना हों.

सुनवाई में देरी हो तो जमानत दे देनी चाहिए

बेंच ने कहा कि हम यह समझ सकते हैं कि यदि कोई पक्ष स्वयं जमानत में देरी कर रहा हो तो बात अलग है. लेकिन हमारा मानना है कि जिन्होंने 10 साल की सजा काट ली है और उनकी अपील लंबित है और निकट भविष्य में सुनवाई होने की उम्मीद कम हो तो उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया जाना चाहिए.

6 हाईकोर्ट की तरफ से हलफनामा

सुनवाई के दौरान कोर्ट की ओर से नियुक्त किए गए न्याय मित्र यानी अमाइकस क्यूरे वकील गौरव अग्रवाल ने बेंच को बताया कि पूर्व अदालती आदेश के तहत उम्रकैद के दोषियों की पहचान करने की कवायद के संबंध में 6 हाईकोर्ट की ओर से हलफनामा दायर किया गया है.

सरकार के पास विचार को केस भेजा जा सकता है

बेंच ने कहा कि 10 साल से अधिक कैद की सजा काट चुके दोषियों को जमानत पर रिहा करने के अलावा उन मामलों की पहचान करने की जरूरत है जिनमें दोषियों ने 14 साल की कैद पूरी कर ली है. उन्हें निश्चित समय के भीतर, समय से पहले रिहाई पर विचार करने के लिए सरकार को मामला भेजा जा सकता है, फिर भले ही अपील लंबित हो या नहीं.

गौरव अग्रवाल ने 6 हाईकोर्ट के आंकड़ों का विश्लेषण करने के बाद कहा कि 5740 मामले हैं, जिनमें दोषियों की अपील लंबित हैं. 

यूपी में सबसे ज्यादा 385 दोषी हैं 

बिहार में लगभग 268 दोषी हैं, जिनके मामलों पर समय पूर्व रिहाई पर विचार किया जा रहा है. इसी तरह की कवायद ओडिशा और इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा भी की गई है. इलाहाबाद हाईकोर्ट में सबसे ज्यादा संख्या में अपील लंबित हैं. यूपी में 385 दोषी हैं जो 14 साल से ज्यादा समय से जेल में हैं. इन आंकड़ों के बाद बेंच ने कहा कि संबंधित अथॉरिटी तत्काल इस संबंध जरूरी कदम उठाए.
 
चार महीने में ऐसे कैदियों को चिह्नित करें

कोर्ट का कहना था कि अपील पर सुनवाई के बिना दोषी हिरासत में हैं, इसमें उनकी तरफ से कोई चूक नहीं है. लिहाजा यह अभ्यास तत्काल आधार पर किया जाना चाहिए. बेंच ने कहा है कि चार महीने में हाईकोर्ट ऐसे कैदियों की पहचान करें. ये रिपोर्ट आने में ये साल निकल जाएगा. अगले साल जनवरी में मामले की सुनवाई होगी. इन दोषियों की अपील विभिन्न हाईकोर्ट में लंबित है.

 

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