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चुनाव में फ्री-फ्री-फ्री का लालच देने पर राजनीतिक दलों की मान्यता होगी रद्द? कल SC करेगा सुनवाई

याचिकाकर्ता ने दलील दी है कि जनता के पैसों से चुनाव से पहले मतदाताओं को लुभाने के लिए मुफ्त उपहार देने का वादा करना या बांटना, स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव की पवित्र अवधारणा के खिलाफ है.

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फाइल फोटो
फाइल फोटो
स्टोरी हाइलाइट्स
  • कांग्रेस, बीजेपी और आप को बनाया गया है पक्षकार
  • याचिकाकर्ता ने की मुफ्त उपहारों के वादों को रिश्वत घोषित करने की मांग

चुनाव में 'फ्री' के वायदे करने वाले राजनीतिक दलों की याचिका रद्द किए जाने वाले मामले पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी. वकील बरुन सिन्हा की ओर से इस मामले की जल्द सुनवाई की मांग की गई थी. हिंदू सेना के नेता सुजीत यादव ने सुप्रीम कोर्ट में ये जनहित याचिका दाखिल कर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और आम आदमी पार्टी को पक्षकार बनाया गया है.

याचिका में इन पार्टियों पर मुफ्त बिजली, लैपटॉप, स्मॉर्ट फोन, समाजवादी पेंशन योजना, पंजाब में महिलाओं को एक हजार रूपए प्रति माह भत्ते के वायदे का हवाला दिया गया है. याचिकाकर्ता की दलील है कि इससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अनैतिक प्रथा और भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता है.याचिका में कहा गया है कि इस पर रोक लगाते हुए कोर्ट समाजवादी पार्टी, कांग्रेस के यूपी में और आम आदमी पार्टी के पंजाब विधान सभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों को अयोग्य घोषित करें. क्योंकि सभी पार्टियों ने मतदाताओं से ऐसे वादे किए हैं. 

राजनीतिक पार्टियों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग

इसके साथ ही याचिकाकर्ता ने इस तरह के वादे करने वाली राजनीतिक पार्टियों के खिलाफ  FIR दर्ज कर समुचित कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है. 

याचिका में दिया गया है कर्ज का आंकड़ा

याचिका में उन पांच चुनावी राज्यों पर कर्जों का आंकड़ा देकर कहा गया है कि इन राज्यों में जो सरकारें बनेंगी, उन्हें प्रदेश की चरमराई वित्तीय हालात का सामना करना पड़ेगा. उन्होंने उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर पर कर्ज के बोझ का आंकड़ा पेश किया. अखबारों में प्रकाशित खबरों का हवाला देते हुए याचिकाकर्ता के वकील विकास सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश पर 6.1 लाख करोड़, पंजाब पर 2.8 लाख करोड़, उत्तराखंड पर 68,000 करोड़ और गोवा पर 18,844 करोड़ रुपये का कर्ज है. 

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