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दवा और इम्यून रेस्पांस बेअसर, काफी 'स्मार्ट' हैं मंकीपॉक्स के कुछ म्यूटेशन: रिसर्च

जर्नल ऑफ ऑटोइम्यूनिटी में प्रकाशित अध्ययन के नतीजे मंकीपॉक्स के इलाज के लिए इस्तेमाल की जाने वाली मौजूदा दवाओं को संशोधित करने या नई दवाओं को विकसित करने में मदद कर सकते हैं. जो म्यूटेशंस का मुकाबला कर सकते हैं, बीमारी के लक्षणों को कम कर सकते हैं और वायरस के प्रसार को रोक सकते हैं.

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मंकीपॉक्स
मंकीपॉक्स

शोधकर्ताओं ने मंकीपॉक्स वायरस में स्पेसिफिक म्यूटेशन की पहचान की है जिसने इसे दवाओं या शरीर की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया द्वारा टारगेट होने से बचने और संक्रामक होने से बचने के लिए काफी "स्मार्ट" बना दिया है. जर्नल ऑफ ऑटोइम्यूनिटी में प्रकाशित अध्ययन के नतीजे मंकीपॉक्स के इलाज के लिए इस्तेमाल की जाने वाली मौजूदा दवाओं को संशोधित करने या नई दवाओं को विकसित करने में मदद कर सकते हैं. जो म्यूटेशंस का मुकाबला कर सकते हैं, बीमारी के लक्षणों को कम कर सकते हैं और वायरस के प्रसार को रोक सकते हैं.

ये अध्ययन मिसौरी विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं की एक टीम द्वारा किया गया था. शोधकर्ता श्रीकेश सचदेव ने कहा, "एक अस्थायी विश्लेषण करके, हम यह देखने में सक्षम थे कि समय के साथ वायरस कैसे विकसित हुआ है. एक महत्वपूर्ण खोज यह थी कि वायरस अब विशेष रूप से म्यूटेशंस को जमा कर रहा है."

उन्होंने आगे कहा, "इसलिए, वायरस स्मार्ट हो रहा है. यह हमारे शरीर की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया से, दवाओं या एंटीबॉडी द्वारा टारगेट होने से बचने में सक्षम है और अधिक लोगों तक फैलता रहता है." एमयू कॉलेज ऑफ वेटरनरी मेडिसिन के प्रोफेसर कमलेंद्र सिंह और क्रिस्टोफर एस. बॉन्ड लाइफ साइंसेज सेंटर के प्रमुख अन्वेषक ने अध्ययन में श्रीकेश सचदेव, श्री लेख कंदासामी और हिकमैन हाई स्कूल के छात्र सात्विक कन्नन के साथ काम किया है.

अध्ययन के लिए, टीम ने कई दशकों में फैले मंकीपॉक्स वायरस के 200 से अधिक स्ट्रेंस के डीएनए सीक्वेंसेज का विश्लेषण किया. सबसे पहले 1965 से यह पहली बार फैलना शुरू हुआ, 2000 के दशक की शुरुआत में और अब 2022 में. प्रमुख शोधकर्ता कमलेंद्र सिंह ने कहा कि वायरस जीनोम की प्रतिलिपि बनाने में शामिल विशिष्ट जीन पर हमारा फोकस है. मंकीपॉक्स जीनोम में लगभग 200,000 डीएनए बेस वाला एक विशाल वायरस है.

मंकीपॉक्स के लिए डीएनए जीनोम लगभग 200 प्रोटीन में परिवर्तित हो जाता है. कन्नन और कंदासामी ने मंकीपॉक्स वायरस के स्ट्रेन्स का विश्लेषण करते हुए पांच विशिष्ट प्रोटीनों की जांच की. ये डीएनए पोलीमरेज़, डीएनए हेलिकेज़, ब्रिजिंग प्रोटीन A22R, डीएनए ग्लाइकोसिलेज़ और G9R थे. कमलेंद्र सिंह ने कहा, "जब उन्होंने मुझे डेटा भेजा, तो मैंने देखा कि डीएनए जीनोम बाइंडिंग को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण बिंदुओं पर म्यूटेशंस हो रहे थे. ये फैक्टर निश्चित रूप से वायरस की बढ़ी हुई संक्रामकता में योगदान दे रहे हैं. यह काम महत्वपूर्ण है क्योंकि किसी समस्या को हल करने की दिशा में पहला कदम यह पहचानना है कि समस्या विशेष रूप से कहां हो रही है. यह एक टीम वर्क है. हालांकि शोधकर्ता अब भी ये जानने की कोशिश कर रहे हैं कि समय के साथ मंकीपॉक्स वायरस कैसे विकसित हुआ है.
 

 

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