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सिंघु बॉर्डर मर्डर: 'अगर राकेश टिकैत लखीमपुर की मॉब लिंचिंग को जायज नहीं ठहराते तो', अमित मालवीय ने साधा निशाना

Singhu Border Man Killed: सिंघु बॉर्डर पर आज सुबह एक शव मिला. इसकी पहचान लखबीर सिंह के रूप में हुई है. हत्या का आरोप निहंग सिखों पर है. बीजेपी नेताओं के निशाने पर किसान आंदोलन से जुड़े संगठन हैं.

सिंघु बॉर्डर पर लखबीर सिंह नाम के शख्स की हत्या हुई (सांकेतिक फोटो) सिंघु बॉर्डर पर लखबीर सिंह नाम के शख्स की हत्या हुई (सांकेतिक फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • सिंघु बॉर्डर पर एक शख्स की हत्या हुई
  • हत्या का आरोप निहंग सिखों पर है
  • घटना पर बीजेपी नेताओं ने किसान नेताओं को घेरा

सिंघु बॉर्डर जो फिलहाल किसान आंदोलन की वजह से चर्चा में था, वह आज सुबह से अलग ही वजहों से खबरों में है. किसानों के प्रदर्शन का मंच जहां लगा हुआ है, उससे कुछ ही दूरी पर एक शख्स की बेदर्दी से हत्या कर दी गई है. सोशल मीडिया पर कुछ वीडियोज भी घूम रहे हैं जो सिरहन पैदा करते हैं. हत्या के तुरंत बाद आरोपों का दौर भी शुरू हो चुका है. किसान संगठनों ने एक झटके में खुद को निहंग सिखों से अलग किया और उनपर इस हत्या का आरोप लगाया. वहीं अब बीजेपी नेता किसान आंदोलन पर सवाल खड़े कर रहे हैं.

बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय (Amit Malviya) ने सिंघु बॉर्डर की घटना पर राकेश टिकैत पर निशाना साधा है. उन्होंने लिखा, 'अगर राकेश टिकैत ने योगेंद्र यादव के बगल में बैठकर लखीमपुर में हुई मॉब लिंचिंग को जायज नहीं ठहराया होता तो, वह चुप रहते तो कुंडली में आज शख्स की हत्या नहीं होती. किसानों के नाम पर आंदोलन में हो रही अराजकता का पर्दाफाश होना चाहिए.'

अपने दूसरे ट्वीट में अमित मालवीय ने लिखा, बलात्कार, हत्या, वैश्यावृत्ति, हिंसा और अराजकता. किसान आंदोलन के नाम पर यह सब हुआ है. अब हरियाणा के कुंडली बॉर्डर पर युवक की बर्बर हत्या. आखिर हो क्या रहा है? किसान आंदोलन के नाम पर यह अराजकता करने वाले ये लोग कौन हैं जो किसानों को बदनाम कर रहे हैं?'

बीजेपी नेता कपिल मिश्रा ने एक वीडियो रिट्वीट किया है, जिसको सिंघु बॉर्डर पर हुए मर्डर का बताया जा रहा है. इस ट्वीट में लिखा है कि कि इस आंदोलन में असामाजिक तत्व मौजूद हैं और वीडियो उसका सबूत है.

बाहर बैठे ग्रुप ने दिया हत्या को अंजाम - अखिल भारतीय किसान सभा

हालांकि, अखिल भारतीय किसान सभा के महासचिव हन्नान मोल्लाह ने कहा कि यह किसान आंदोलन को बदनाम करने का एक संयोजित प्रयास है जो कि पिछले 10 महीनों से चल रहा है. वह बोले, 'संयुक्त किसान मोर्चा से इसका कोई संबंध नहीं है. मोर्चा के बाहर एक ग्रुप वहां बैठा हुआ है, उन्होंने किया है. सरकार को जांच करनी चाहिए. पुलिस को जांच करनी चाहिए.'

 

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