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Odisha: 700 नक्सली समर्थकों ने किया सरेंडर, लगाए नक्सल मुर्दाबाद-मोदी जिंदाबाद के नारे

ओडिसा के मलकानगिरी जिला पुलिस और बीएसएफ अधिकारियों के सामने 700 नक्सली समर्थकों ने आत्मसमर्पण कर दिया. इनमें महिला औऱ पुरुष नक्सली शामिल हैं. समर्पण करने वालों में 300 मिलीशिया भी शामिल हैं. सभी ने फिर से नक्सली गतिविधियों में शामिल नहीं होने की कसम भी खाई है.

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मलकानगिरी जिले में 700 नक्सली समर्थकों ने सरेंडर किया.
मलकानगिरी जिले में 700 नक्सली समर्थकों ने सरेंडर किया.

छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले की सीमा से लगे ओडिशा के मलकानगिरी में पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है. 300 मिलिशिया सहित 700 नक्सलियों ने पुलिस और बीएसएफ अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण किया है. सरेंडर करने वाले नक्सलियों ने दूसरे नक्सलियों का साथ कभी भी नहीं देने की शपथ भी खाई है. साथ ही नक्सलियों ने ''मोदी सरकार जिंदाबाद, नक्सली मुर्दाबाद'' के नारे भी लगाए. देखें Video:-

 

डीआईजी राजेश पंडित, कोरापुट एस.डब्ल्यू.आर. नितेश, आईपीएस अधिकारी शिविर वाधवानी, एसपी, मलकानगिरी, बीएसएफ कोरापुट डीआईजी मदन लाल, 65 बीएन सीओ टी एस रेड्डी की मौजूदगी में सरेंडर करने वालों ने नक्सल का समर्थन करने वाले दूसरे नक्सलियों का पुतला दहन किया. देखें वीडियो:-

इस दौरान ग्रामीणों ने पुलिस औऱ बीएसएफ के अधिकारियों का फूलमाला पहनाकर स्वागत किया. वहीं, पुलिस औऱ बीएसएफ अधिकारियों ने हर वक्त ग्रामीणों का साथ देने का वादा किया. आंध्र प्रदेश के रहने वाले नक्सली सीताराम राजू ने मलकानगिरी जिला पुलिस और बीएसएफ के सामने अंद्रहाली में आत्मसमर्पण किया है.

जिन नक्सलियों ने समर्पण किया है वे मलकानगिरी जिले के भजगुड़ा, बिसईगुड़ा, खलगुडा, पत्रापुट, ओन्देईपदार, संबलपुर, सिंधीपुट, आंध्राल जीपी, पीएस मुदुलीपाड़ा (खैरपुट ब्लॉक) और पदलपुट, रंगबेल जीपी के कुसुमपुट, मातमपुट और जोडिगुम्मा गांव और अल्लूरी के मंचिंगपुट पीएस से आते हैं. 

ये सभी गांव ओडिशा-एपी सीमा पर स्थित हैं. ये इलाके पहले माओवादियों का गढ़ माने जाते थे. यहां के गांववाले नक्सलियों का समर्थन करते हुए उनकी हर गतिविधियों में सहायता करते थे. उनको रसद पहुंचाने का काम, सुरक्षाबलों की हर मूवमेंट की जानकारी देने के अलावा. कुछ लोग सुरक्षाबलों और नागरिकों की हत्या में भी शामिल रहे थे.

कोरापुट में बीएसएफ के डीआईजी मदन लाल का कहना है कि, इतनी बड़ी संख्या में नक्सली समर्थकों द्वारा आत्म समर्पण करने से बहुत बड़ा प्रभाव हुआ है. 'घर वापसी' अभियान के तहत इन नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है. अब और भी नक्सली आत्मसमर्पण करने का विचार कर रहे हैं. सरकार की नीतियों का असर साफ तौर दिखाई दे रहा है.

पहले भी समर्पण कर चुके हैं नक्सली समर्थक और नक्सली

- डिशा के डीजीपी के समक्ष 2 जून 2002 को  50 सक्रिय कट्टर माओवादी समर्थकों ने आत्मसमर्पण किया था. 

- इसी साल 11 जून को 347 नक्सल समर्थकों ने आत्मसमर्पण किया था.

- बीएसएफ कैंप में मलकानगिरी पुलिस और बीएसएफ के सामने और 22 अगस्त 2002 को 550 नक्सली समर्थकों ने बीएसएफ कैंप में मलकानगिरी पुलिस और बीएसएफ के सामने आत्मसमर्पण किया था.,

 

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