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गद्दार कौन?...'पाकिस्तानी सेना ने मेरे साथ धोखा किया', करगिल की कहानी नवाज शरीफ की जुबानी

पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी ने 1999 में कश्मीर मुद्दा सुलझाने की पूरी कोशिश की थी, लेकिन पाकिस्तान ने धोखा दिया. भारत ने पाकिस्तान पर विश्वास किया और दूसरी तरफ उसने करगिल पर कब्जा करना शुरू कर दिया था. खुद पाकिस्तान के पूर्व पीएम नवाज शरीफ ने बताया था कि कैसे उनकी सेना ने कश्मीर मसले को सुलझने नहीं दिया. पढ़िए पूरी कहानी.

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पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी कश्मीर मसले को शांति से हल करना चाहते थे (फाइल फोटो)
पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी कश्मीर मसले को शांति से हल करना चाहते थे (फाइल फोटो)

भारत में उन दिनों रियासतों का विलय किया जा रहा था. जम्मू-कश्मीर के अंतिम राजा हरि सिंह विलय पर फैसला नहीं कर पा रहे थे. पाकिस्तान को जम्मू-कश्मीर अपने हाथ से जाता दिख रहा था. तभी पाकिस्तानी सेना की मदद से कबायलियों ने हमला कर दिया. पाक के कब्जे से बचने के लिए महाराजा हरि सिंह ने अपनी रियासत के भारत में विलय के लिए संधि पर हस्ताक्षर कर दिए और अगले ही पल भारतीय सेना आसमान से श्रीनगर की धरती पर उतर गई. उसने मोर्चा संभाला और कबायलियों को खदेड़ दिया. इस युद्ध के बाद से कश्मीर एक अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बन गया.

इस साल अक्टूबर में इस्लामिक संगठन OIC ( ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन) ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय समुदाय से कश्मीर मुद्दा सुलझाने की कोशिशें तेज करने की मांग की. वैसे बीते 75 सालों में कई बार कश्मीर मसले को सुलझाने की कोशिशें हो चुकी हैं. ऐसी ही एक कोशिश 1999 में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने की थी. तब पाकिस्तान में नवाज शरीफ प्रधानमंत्री थे.

बातचीत इतनी सकारात्मक थी कि पूरी दुनिया ने मान लिया था कि अब कश्मीर मुद्दा सुलझ जाएगा लेकिन अंतिम समय में पाकिस्तान ने भारत को धोखा दे दिया. एक ओर जहां भारत, पाकिस्तान की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाए मसले को शांति से सुलझाने की कोशिश कर रहा था. वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान की सेना करगिल पर कूच कर रही थी. 

करगिल युद्ध में मुंह की खाने के बाद पाकिस्तान में तख्ता पलट हुआ और नवाज शरीफ को कुर्सी से बेदखल कर दिया गया. सत्ता से दूरी बनाने के सालों बाद नवाज शरीफ ने बताया कि कैसे पाकिस्तान की सेना ने कश्मीर मुद्दा सुलझने नहीं दिया-

पाकिस्तान में एक अखबार के राजनीतिक संपादक रहे सुहैल वड़ाएच ने नवाज शरीफ से बातचीत पर किताब लिखी- ‘गद्दार कौन’.  2007 में गाजियाबाद से प्रकाशित इस किताब के मुताबिक नवाज शरीफ सुहैल को बताते हैं- मुझे करगिल के बारे में कुछ नहीं बताया गया. मुझे वाजपेयी के टेलीफोन से पता चला था कि हमारी सेना करगिल में लड़ रही है.

...बताइए हमारी भारत से बातचीत चल रही थी और मेरे पीठ पीछे करगिल पर चढ़ाई कर दी गई. हमें करीब पांच महीने बाद बताया गया. फिर यह कहा गया कि सेना खुद आक्रमण में शामिल नहीं,  केवल जिहादी-मुजाहिदीन लड़ रहे हैं. जब करगिल वॉर हुआ तो पूरी नॉर्दन लाइन इनफेंट्री उड़ गई. तब मैंने मुशर्रफ से पूछा कि आप ने तो कहा था कि किसी फौजी की जान नहीं जाएगी तो वह बोले भारतीय सेना कार्पेट बॉम्बिंग कर रही है. जब भारत बमबारी करता था तो मोर्चों के ऊपर कुछ नहीं होता था… लोगों के सिर उड़ जाते थे. 

पर्वेज मुशर्रफ से भी बातचीत में नहीं निकल पाया था हल (फाइल फोटो)

पीएम, रक्षामंत्री, रक्षा सचिव, नेवल चीफ सभी से युद्ध की बात छुपाई

नवाज शरीफ ने करगिल वॉर को मिसएडवेंचर बताते हुए कहा- युद्ध के समय हमारे सारे संपर्क टूट गए थे. हमारे सैनिक बंकर्स में बैठकर चीखते थे- राशन नहीं देना, तो न दो लेकिन हथियार तो दो, हम किस चीज से लड़ें? वे वहां घास और बर्फ खाते थे. ऐसे हालात में जब पीछे से सप्लाई लाइन भी टूटी हो, तो युद्ध क्या लड़ेंगे आप? हमें हथियार डालने पड़ जाते.

उन्होंने कहा कि हम दुनिया में सफारती तौर पर अकेले पड़ गए थे. दुनिया हमें दोषी मान रही थी. पीछे हटना ही सही फैसला था. हमने युद्ध रुकवाकर अपनी सेना की लाज बचा ली. युद्ध बंद न होता हो हमें बहुत नुकसान उठाना पड़ता. हमारे कहीं ज्यादा सैनिक मारे जाते, हमने कई जानें बचा लीं लेकिन हमने भारत का विश्वास खो दिया.

उन्होंने बताया कि परवेश मुशर्रफ, जनरल अजीज जो चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ थे, जनरल महमूद जो नॉर्दर्न जोन की कमान संभाले थे, जावेद हसन जो नॉर्दर्न जोन के डिवीजन कमांडर थे- इन चारों के अलावा किसी को भी करगिल ऑपरेशन की भनक तक नहीं थी. प्रधानमंत्री, रक्षामंत्री, रक्षा सचिव, नेवल चीफ, चीफ एयर स्टाफ, किसी को इस ऑपरेशन की जानकारी नहीं थी. 

तब रात डेढ़ बजे क्लिंटन ने अटल साहब को फोन किया

नवाज शरीफ बताते हैं कि जब युद्ध छिड़ा तो कुछ दिन बाद मुशर्रफ मेरे पास आए और बोले मामला काफी बिगड़ गया है. हमारी चोटियां भारत के कब्जे में जा रही हैं. मुझ पर समस्या का समाधान निकालने का दबाव बनाने लगे. तब मैंने सोचा अमेरिका के राष्ट्रपति बिल क्लिंटन से बात की जाए. वही दोनों देशों के बीच युद्ध विराम करा सकते हैं, नहीं तो पाकिस्तान बहुत कुछ खो देगा. 

मैं क्लिंटन से मिलने अमेरिका गया. उनसे युद्ध रुकवाने के लिए कहा. उन्होंने रात डेढ़ बजे वाजपेयी साहब से फोन पर बात की. उन्होंने बताया कि नवाज शरीफ यहां हैं. मैंने शरीफ से कहा था कि हम जंग रुकवाने के लिए तैयार हैं. जवाब में भारत ने अमेरिकी राष्ट्रपति से कहा- जंग पाकिस्तान ने शुरू की है. उसकी इच्छा है तो वह बंद करे, हमें कोई परवाह नहीं.

परमाणु हमले की फिराक में थी पाक सेना

किताब 'गद्दार कौन' के मुताबिक, नवाज शरीफ ने बताया कि करगिल युद्ध के समय एटमी हथियारों को भी स्थानांतरित किया गया था. इसकी भी जानकारी मुझे नहीं थी. मुझे यह जानकारी बिल क्लिंटन से मिली थी. उन्होंने मुझसे कहा कि हमारे पास सूचना है कि पाकिस्तान ने एटमी हथियारों के इस्तेमाल के लिए उन्हें स्थानान्तरित किया था. उन्होंने मुझसे सवाल किया- आप प्रधानमंत्री हैं, सबसे बड़े ओहदे पर हैं आपको इस बात की जानकारी क्यों नहीं थी?

बातचीत रद्द करने को पाक सेना ने साजिश रची

नवाज शरीफ कहते हैं कि करगिल क्यों शुरू किया गया था? उन्हें क्या हासिल करना था? क्या टारगेट थे? सेना का क्या ध्येय था? हमारी सेना का दृष्टिकोण ही साफ नहीं था. मेरे ख्याल से मुशर्रफ की योजना करगिल पर हमला करके कश्मीर मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय समस्या बना देने की थी लेकिन ऐसा हुआ नहीं. खुद पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय दबाव में आ गया.

...हमारी और अटल बिहारी वाजपेयी की कश्मीर मुद्दे पर अच्छी बात हो रही थी लेकिन पाकिस्तान के कुछ जनरलों को लगने लगा था कि इस बातचीत के जरिए दोनों देशों के बीच बैक चैनल बन जाएगा. उन्हें लग रहा था कि कश्मीर मसले का हल निकल जाएगा. पाकिस्तान सेना के भीतर जो उनके नेता हैं, वे इस बातचीत के खिलाफ थे. उन्होंने इस प्रक्रिया को रोकने के लिए कश्मीर मुद्दा उठा दिया.

सजा देने के बजाय मुशर्रफ को इनाम दे दिया

नवाज शीरफ ने बताया कि करगिल युद्ध छेड़ने पर पाकिस्तान दुनिया के निशाने पर था. उसे आलोचनाओं का सामना करना पड़ा रहा था. युद्ध छेड़ने के फैसले पर उसकी बदनामी हो रही थी. युद्ध रुकने के बाद मुशर्रफ मुझे गालियां देते थे. मुशर्रफ एंड कंपनी ने सेना में संदेश दिया कि वह कश्मीर लेने गए थे लेकिन नवाज शरीफ ने उन्हें रोक दिया.

किताब के मुताबिक, इन सब के बाद भी नवाज शरीफ ने परवेज मुशर्रफ पर कार्रवाई करने के बजाए उन्हें ज्वॉइंट चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी का अध्यक्ष नियुक्त कर दिया. उन्होंने कहा कि मुशर्रफ, करगिल फोबिया के शिकार हो गए थे. उन्हें लग रहा था कि उन्हें चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ की पोजीशन से हटाकर चेयरमैन बना दिया जाएगा. उनकी जगह किसी नए को आर्मी चीफ बनाया जाएगा लेकिन मैंने सब कुछ भुला दिया. इतनी बड़ी गलती के बाद भी मैंने उन्हें माफ कर दिया.

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