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'ज्ञानवापी परिसर में मिले शिवलिंग की पूजा-अर्चना की अनुमित', SC में याचिका दाखिल

ज्ञानवापी परिसर में मिले शिवलिंग की पूजा अर्चना करने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है. इसमें कहा गया है कि सावन का महीना शुरू हो गया है. ऐसे में भोलेनाथ के भक्तों को वहां धार्मिक अनुष्ठान करने की अनुमित प्रदान की जाए.

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ज्ञानवापी मस्जिद (सांकेतिक तस्वीर) ज्ञानवापी मस्जिद (सांकेतिक तस्वीर)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई याचिका
  • सर्वे में शिवलिंग मिलने का किया था दावा

ज्ञानवापी मस्जिद के सर्वे के दौरान शिवलिंग मिलने का दावा किया गया था. अब यहां हिंदुओं को धार्मिक अनुष्ठान करने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है. 

श्री कृष्ण जन्म भूमि मुक्ति स्थल के अध्यक्ष राजेश मणि त्रिपाठी ने याचिका दाखिल कर कहा कि सावन का महीना शुरू हो चुका है. लिहाजा हिंदुओं को पूजा करने की अनुमति दी जाए.

याचिकाकर्ता ने कहा कि वाराणसी कोर्ट के आदेश के तहत एक सर्वे किया गया था. इस दौरान ज्ञानवापी मंदिर में शिवलिंग मिला है. अब हम वहां पर अपनी धार्मिक प्रथाओं के अनुसार पूजा-अर्चना करना चाहते हैं.

याचिकाकर्ता ने कहा है कि उन्हें और उनके शिष्यों को वाराणसी में ज्ञानवापी मंदिर के परिसर में धार्मिक अनुष्ठान करनेकी अनुमति दी जाए. इसके साथ ही कहा है कि हालांकि उस स्थान को कोर्ट के आदेश पर संरक्षित किया गया है, लेकिन फिर भी भगवान शिव के भक्तों को उस स्थान पर पूजा और अनुष्ठान करने की परमिशन दी जाए.

वैसे आज तक से बात करते हुए विष्णु शंकर जैन ने कहा कि इस मामले में तमाम साक्ष्यों और पुराने फैसले को कोर्ट में रखा गया है और हमारी दलील मुस्लिम पक्ष के दावों को झूठा साबित करती है. जब मुस्लिम पक्ष 600 साल से वहां नमाज अदा होने की बात करता है तो हमने कोर्ट में हजारों सालो से आदि विश्वेश्वर के होने के प्रमाण दिए हैं.

विष्णु शंकर ने इस बात पर भी जोर दिया कि दीन मोहम्मद के फैसले को आधार नहीं माना जा सकता लेकिन उसमें गवाहों की बातों को कोर्ट के नियम के तहत दलील में शामिल किया जा सकता है. 

ज्ञानवापी मस्जिद केस में पिछले बुधवार को जिला जज ए.के. विश्वेश की कोर्ट में सुनवाई हुई. इस दौरान हिंदू पक्ष ने दलीलें रखीं. हिंदू पक्ष के वकील हरिशंकर जैन ने कोर्ट में कहा कि 1991 का वॉरशिप ऐक्ट किसी भी तरीके से इस मामले में लागू नहीं होता है. मुस्लिम पक्ष जिस जमीन पर अपना दावा कर रहा है वो जमीन आदि विश्वेश्वर महादेव की है. उस पर जबरदस्ती नमाज पढ़ी जा रही है. फिलहाल, कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए गुरुवार की तारीख नीयत की है. 

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