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आतंकियों को शरण देने के आरोपों पर भिड़े पाकिस्तान और तालिबान, जानिए क्यों छिड़ी जंग?

पेरिस स्थित अंतरराष्ट्रीय निगरानी संस्था फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स के दवाब में पाकिस्तान ने आतंकवादियों पर कार्रवाई जैसे कदम उठाने का दिखावा किया है, ताकि वह FATF की ग्रे लिस्ट से बाहर आ सके. इतना ही नहीं पाकिस्तान ने हाल ही में लश्कर ऐ तैयबा के ऑपरेशनल कमांडर साजिद मीर पर भी कार्रवाई की थी.

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मसूद अजहर
मसूद अजहर

पाकिस्तान और अफगानिस्तान की तालिबान सरकार एक दूसरे पर आतंकियों को शरण देने के आरोपों को लेकर भिड़ गए हैं. दोनों देश एक दूसरे पर जैश ए मोहम्मद के चीफ मसूद अजहर को पनाह देने का आरोप लगा रहे हैं. इसी बीच पाकिस्तान ने गुरुवार को दावा किया है कि उसने अफगानिस्तान के अधिकारियों के सामने संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित एक आतंकी की उपस्थिति का मुद्दा औपचारिक रूप से उठाया. पाकिस्तान का ये दावा ऐसे वक्त पर आया, जब एक दिन पहले ही अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने कहा था कि मसूद अजहर अफगानिस्तान नहीं बल्कि पाकिस्तान में है. 

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता आसिम इफ्तिखार अहमद ने मसूद अजहर को लेकर कहा कि वह व्यक्ति एक भगोड़ा अपराधी है और पाकिस्तान में आतंकवाद से जुड़े कई मामलों में वांटेड है. उन्होंने कहा, पाकिस्तान प्रशासन की ओर से कई बार संबंधित अफगानिस्तान अधिकारियों के सामने ये मुद्दा उठाया जा चुका है कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित आतंकी उनके यहां है. 

पाकिस्तान ने दी तालिबान को सीख

इतना ही नहीं इफ्तिखार अहमद ने कहा कि पाकिस्तान ही नहीं अंतरराष्ट्रीय समुदाय के पास भी यह मानने की पर्याप्त वजह है कि अफगानिस्तान में अभी भी कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जिन्हें आतंकवादी संगठन सुरक्षित पनाहगाह के रूप में इस्तेमाल करते हैं. उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान से कई घातक सीमा पार आतंकवादी हमले इन चिंताओं को बढ़ाते हैं. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने अफगानिस्तान की सरकार से अपील की है कि वह अंतरराष्ट्रीय समुदाय को दिए गए आश्वासनों को पूरा करने के लिए ठोस कदम उठाएं, कि वे किसी को भी किसी देश के खिलाफ अफगान धरती का इस्तेमाल नहीं करने देंगे. 
 
FATF की कार्रवाई से बचने के लिए पैतरें अपना रहा पाकिस्तान

दरअसल, पाकिस्तान ने FATF की कार्रवाई से बचने के लिए अफगानिस्तान को पत्र लिखकर मसूद अजहर को गिरफ्तार करने की मांग की थी. पाकिस्तान में पत्र में कहा था कि मसूद अजहर के अफगानिस्तान के नंगरहार और कुनार इलाकों में छिपे होने की संभावना है. ऐसे में उसे गिरफ्तार कर सूचित किया जाना चाहिए. 

पेरिस स्थित अंतरराष्ट्रीय निगरानी संस्था फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स के दवाब में पाकिस्तान ने आतंकवादियों पर कार्रवाई जैसे कदम उठाने का दिखावा किया है, ताकि वह FATF की ग्रे लिस्ट से बाहर आ सके. इतना ही नहीं पाकिस्तान ने हाल ही में लश्कर ऐ तैयबा के ऑपरेशनल कमांडर साजिद मीर पर भी कार्रवाई की थी. चौंकाने वाली बात ये है कि साजिद मीर को पाकिस्तान अब तक मरा हुआ बताता रहा है. पाकिस्तान यह दावा करता रहा है कि मसूद अजहर उसके देश में नहीं, बल्कि वह संभवता अफगानिस्तान में है. जबकि वह पाकिस्तानी सोशल मीडिया नेटवर्क पर लगातार लेख लिखता है और युवाओं को कट्टरता के रास्ते पर चलने के लिए उकसाता है. 

अफगानिस्तान ने किया पलटवार

इस पर पलटवार करते हुए तालिबान के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने जवाब दिया है. तालिबान ने कहा कि जैश ए मोहम्मद चीफ अफगानिस्तान में नहीं है. यह एक ऐसा संगठन है जो पाकिस्तान में हो सकता है. वैसे भी वह अफगानिस्तान में नहीं हैं. उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें पाकिस्तान की सरकार से कोई पत्र नहीं मिला. हालांकि, इस पत्र के बारे में समाचारों में सुना है. उन्होंने कहा कि हम इस पर यही कहना चाहते हैं कि यह सच नहीं है. 

'तालिबान-पाक के रिश्तों पर असर डालेंगे ये बयान' 

उधर, अफगानिस्तान में तालिबानी विदेश मंत्रालय ने कहा कि ऐसे आरोप काबुल और इस्लामाबाद के रिश्तों पर असर डाल सकते हैं. मंत्रालय ने कहा, हम सभी पक्षों से बिना सबूत और दस्तावेजों के ऐसे आरोपों से बचने की अपील करते हैं. इस तरह के मीडिया के आरोप द्विपक्षीय संबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं. 

 

 

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