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EXCLUSIVE: Skype पर नहीं दिखता मौलाना का चेहरा, PAK से फैलाई जाती है नफरत, जानें कैसे जाल फैला रहा है दावत-ए-इस्लामी

पाकिस्तान के धार्मिक संगठन दावत-ए-इस्लामी के जरिए भारत में कट्टरता की ट्रेनिंग दी जा रही है. आजतक की एसआईटी की तहकीकात में सामने आया है कि भारत में युवाओं को धर्म के नाम पर नफरत का माहौल पैदा करने के लिए भड़काया जा रहा है. दावत-ए-इस्लामी को समझने के लिए आजतक के रिपोर्टर ने संगठन की ट्रेनिंग का फैसला लिया.  

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सांकेतिक फोटो
सांकेतिक फोटो

पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई भारत में दावत-ए-इस्लामी संगठन के जरिए आतंकी नेटवर्क खड़ा करने की तैयारी कर रही है. इसका उदाहरण मोहम्मद अशरफ है, जिसने 17 साल पहले भारत में एंट्री ली थी और अपना नाम भी बदल लिया था. उसे बीते साल 11 अक्टूबर को दिल्ली से गिरफ्तार किया गया था. वह बीते 17 साल से दावत-ए-इस्लामी की आड़ लेकर बचता रहा. उसने पूछताछ में बताया था कि ISI के नासिर के कहने पर ये दावत-ए-इस्लामी से जुड़ गया था. जिसमें दावत-ए-इस्लामी की तरफ से इसे हर महीने एक सैलरी भी दी जाती थी.  

पाकिस्तान के धार्मिक संगठन दावत-ए-इस्लामी के जरिए भारत में कट्टरता की ट्रेनिंग दी जा रही है. आजतक की एसआईटी की तहकीकात में सामने आया है कि भारत में युवाओं को धर्म के नाम पर नफरत का माहौल पैदा करने के लिए भड़काया जा रहा है. दावत-ए-इस्लामी को समझने के लिए आजतक के रिपोर्टर ने संगठन की ट्रेनिंग का फैसला लिया.  

इसके लिए रिपोर्टर ने ऑनलाइन ट्रेनिंग लेने के लिए आवेदन किया. 22 जुलाई को दावत-ए-इस्लामी के ऑनलाइन कोर्स में दाखिले के लिए अर्जी दी. उसके बाद 22 जुलाई की रात में ही ई-मेल के जरिए उससे संपर्क किया गया. इसके बाद दावत-ए-इस्लामी ने भारत में एक नंबर पर बात करके आगे बढ़ने और जानकारी हासिल करने को कहा. फिर उसी रात इस संगठन के भारत में बैठे शख्स की तरफ से फोन कॉल आया. उस बातचीत पर एक नजर डालिए- 

फाइल फोटो

हसीन अहमद, दावत-ए-इस्लामी, एमपी- आपने फॉर्म अप्लाई किया हुआ था? 

रिपोर्टर- जी-जी 

हसीन अहमद, दावत-ए-इस्लामी, एमपी- जी माशाअल्लाह हमें आपका फॉर्म मिला हुआ हैं, प्यारे भाई हमारे यहां मदनी कायेदा और नाजरा कोर्स होता हैं तो इससे पहले आपने कभी मदनी कायेदा पढ़ा हैं क्या?  

रिपोर्टर- मैं ईमानदारी से बताऊं वो क्या कहते हैं बस नमाज़ पढ़ना जानता हूं, इससे ज्यादा बहुत ज्यादा पढ़ा नहीं हूं. 

फाइल फोटो

हसीन अहमद, दावत-ए-इस्लामी, एमपी- अच्छा माशाअल्लाह नमाज़ पढ़ना जानते हैं ये ही बहुत बड़ी तरतमंदी की बात हैं अल्लाहपाक आपके --- तौफीक आता फरमाए. तो मदनी कायेदा जब पढ़ेंगे न तो आपको कुरानेपाक को कैसे पढ़ना हैं ये सब सिखाया जाएगा न तो इसके जरिए इनशाल्लाह कुरानेपाक दुरुस्त मखरीज़ के साथ तजविष के साथ पढ़ना सीख जाएंगे, ठीक हैं. हां उसके बाद आपको कुराने पाक बढ़ाया जाएगा पहले मदनी कायेदा फिर कुरानेपाक और ये आधे घंटे की skype के जरिए क्लास होती हैं और इसकी मंथली फीस 1200 रुपये होती है. 

फाइल फोटो

अब आजतक के रिपोर्टर ने वो ट्रेनिंग लेने का फैसला भी किया और क्लास अटेंड करने का सिलसिला भी शुरू हो गया. शनिवार छोड़ रोज आधे घंटे की ऑनलाइन क्लास होती थी. किसी भी टीचर का चेहरा नहीं दिखाई जाता था, सिर्फ ऑडियो रहता था. लेकिन मकसद स्पष्ट था- नफरत फैलाना. 

 

पाकिस्तान का सफेद झूठ  

ये सबूत ही बताता है कि दावत-ए-इस्लामी का भारत में सक्रिय ना होना एक कोरा झूठ है. दावत-ए-इस्लामी के तार भारत में बेदह संवेदनशील जगहों तक फैले हुए हैं और धर्म की शिक्षा देने के नाम पर भड़काने, उकसाने का तरीका दावत-ए-इस्लामी अपनाता है. दावत-ए-इस्लामी भारत में इस्लाम के नाम पर लोगों को भड़काने, हिंसा करने को उकसाने वाला कोर्स कराने लगता है. जबकि पाकिस्तान की सरकार और पाकिस्तानी दावत-ए-इस्लामी भारत में हर लिंक, हर संबंध को खारिज करते हैं, जो एक सफेद झूठ है. 

 

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