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केरल में मंकीपॉक्स का एक और मामला आया सामने, अब तक 3 मरीजों की हुई पुष्टि

केरल में मंकीपॉक्स का एक और मामला सामने आया है. राज्य की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने इसकी पुष्टि की है. उन्होंने बताया कि राज्य में मंकीपॉक्स का यह तीसरा मामला है. इससे पहले दो मरीज और मिल चुके हैं. दोनों की ट्रैवल हिस्ट्री विदेशों की थी. दोनों ही मरीज यूएई से लौटकर आए थे और उन दोनों में एक समान लक्षण भी थे.

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फाइल फोटो
फाइल फोटो
स्टोरी हाइलाइट्स
  • केरल में मंकीपॉक्स का एक और मामला
  • 14 जुलाई को मिला था पहला केस

केरल में मंकीपॉक्स का एक और मामला सामने आया है. राज्य की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने इसकी पुष्टि की है. उन्होंने बताया कि राज्य में मंकीपॉक्स का यह तीसरा मामला है. ये मरीज 6 जुलाई को यूएई से लौटा था. 13 जुलाई को उसमें लक्षण दिखाई देने लगे. अब उसके संपर्क में आए लोगों पर नजर रखी जा रही है.

राज्य में मंकीपॉक्स के कुल तीन मामलों की पुष्टि हो चुकी है. तीनों की ही ट्रैवल हिस्ट्री विदेश की है. केरल में 14 जुलाई को मंकीपॉक्स का पहला मामला सामने आया था. स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने बताया था कि विदेश से लौटे एक व्यक्ति में मंकीपॉक्स के लक्षण दिखने के बाद उसे केरल के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था. उसे तेज बुखार था और शरीर पर छाले थे. उसका सैंपल लेकर परीक्षण के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी को भेजा गया था. मंत्री ने बताया था कि जिस व्यक्ति में लक्षण दिखे हैं, वो यूएई में एक मंकीपॉक्स रोगी के निकट संपर्क में था.  

18 जुलाई को मिला था दूसरा केस

इस केस के चार दिन बाद ही यानी 18 जुलाई को केरल में दूसरे मामले की पुष्टि हुई थी. ये शख्स भी दुबई से लौटा था. केरल के दोनों मामलों के मरीजों का कनेक्शन विदेशों से है. इन दोनों को ही एक जैसे लक्षण दिखे थे. 

कोरोना की तरह नहीं फैलता मंकीपॉक्स

वैसे जानकार मानते हैं कि मंकीपॉक्स से ज्यादा डरने की जरूरत नहीं है. ये कोरोना वायरस की तरह नहीं फैलता है, इसकी गंभीरता भी कम बताई जा रही है. इस बारे में इंडिया मेडिकल टास्क फोर्स से जुड़े केरल के एक चिकित्सा विशेषज्ञ डॉक्टर राजीव जयदेवन ने कहा कि कोरोना के विपरीत मंकीपॉक्स तेजी से फैलने वाली बीमारी नहीं है. उन्होंने कहा कि अमेरिका और यूरोप में इस साल करीब छह हजार केस मिले हैं लेकिन इनमें से किसी मरीज की मौत नहीं हुई है. 

मंकीपॉक्स फैलता कैसे है? 

- मंकीपॉक्स किसी संक्रमित जानवर के खून, उसके शरीर का पसीना या कोई और तरल पदार्थ या उसके घावों के सीधे संपर्क में आने से फैलता है. 

- अफ्रीका में गिलहरियों और चूहों के भी मंकीपॉक्स से संक्रमित होने के सबूत मिले हैं. अधपका मांस या संक्रमित जानवर के दूसरे पशु उत्पादों के सेवन से भी संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. 

- इंसान से इंसान में वायरस के फैलने के मामले अब तक बेहद कम सामने आए हैं. हालांकि, संक्रमित इंसान को छूने या उसके संपर्क में आने से संक्रमण फैल सकता है. इतना ही नहीं, प्लेसेंटा के जरिए मां से भ्रूण यानी जन्मजात मंकीपॉक्स भी हो सकता है. 

 

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