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जस्टिस रमन्ना ने कहा- दबाव-प्रभाव के बीच निष्पक्षता से काम करना ही जज के गुण

जस्टिस रमन्ना ने कहा कि भगवान राम की पूजा सिर्फ इसलिए नहीं होती कि वो अपने हरेक अभियान और युद्ध में सफल रहे बल्कि वो इसलिए भी सुपूजित हैं क्योंकि वो जीवन की हर विषम परिस्थिति में गरिमा पूर्ण और स्थितप्रज्ञ रहे. न्याय और सामाजिक मर्यादा को उन्होंने टूटने नहीं दिया.

जस्टिस लक्ष्मणन को दी श्रद्धांजलि (सांकेतिक फोटो) जस्टिस लक्ष्मणन को दी श्रद्धांजलि (सांकेतिक फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • SC के पूर्व जस्टिस लक्ष्मणन को श्रद्धांजलि दी
  • कहा- न्याय और सामाजिक मर्यादा बनाए रखा
  • हमारा बर्ताव ही हमारी सबसे बड़ी पूंजीः रमन्ना

सुप्रीम कोर्ट के सीनियर मोस्ट जज जस्टिस एनवी रमन्ना ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता और जजों के गुण बताते हुए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज और विधि आयोग के पूर्व अध्यक्ष जस्टिस लक्ष्मणन को श्रद्धांजलि दी. जस्टिस लक्ष्मणन की शोक सभा में जस्टिस रमन्ना ने कहा कि न्यायाधीश को कई तरह के दबाव, प्रभाव और दुराव के बावजूद निष्पक्षता, स्वच्छंदता और निर्द्वंद्व होकर न्यायशीलता से अपना काम करना होता है. यही सच्चे न्यायाधीश के गुण हैं.

जस्टिस रमन्ना ने कहा कि भगवान राम की पूजा सिर्फ इसलिए नहीं होती कि वो अपने हरेक अभियान और युद्ध में सफल रहे बल्कि वो इसलिए भी सुपूजित हैं क्योंकि वो जीवन की हर विषम परिस्थिति में गरिमा पूर्ण और स्थितप्रज्ञ रहे. न्याय और सामाजिक मर्यादा को उन्होंने टूटने नहीं दिया.

उन्होंने कहा कि हम जब न्यायाधिपति के पद पर बैठे हैं तो ये महत्वपूर्ण है कि हमारे सामने  कब, कहां, कैसी परिस्थितियां आईं और हमने तब क्यों, क्या और कैसे प्रतिक्रिया दी. इससे फर्क वहीं पड़ता कि आपके पास क्या-क्या है. हमारे नैतिक मूल्य और हमारा बर्ताव ही हमारी सबसे बड़ी पूंजी और धरोहर है. जस्टिस लक्ष्मणन भी इसकी जीती जागती मिसाल थे.

जस्टिस रमन्ना ने कहा कि न्यायपालिका का सम्मान और गरिमा का एक अजस्र स्रोत जनता की इसमें गहरी आस्था और विश्वास है. इसकी स्वतंत्रता और निष्पक्षता ही उस विश्वास का आधार है. आने वाली पीढ़ियां जस्टिस लक्ष्मणन को उनके इन्हीं गुणों के आधार पर याद रखेंगी और इसी वजह से न्यायपालिका पर लोगों की आस्था और मजबूत होगी.

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