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दिल्ली में मंकीपॉक्स की दस्तक, केरल के बाद राजधानी में मिला देश का चौथा मरीज

देश की राजधानी दिल्ली में मंकीपॉक्स का पहला मामला सामने आया है. इस मरीज की कोई विदेशी ट्रैवल हिस्ट्री नहीं है. इससे पहले दक्षिण भारतीय राज्य केरल में मंकीपॉक्स के तीन मरीज मिल चुके हैं. यहां मंकीपॉक्स के पहले मामले की पुष्टि 14 जुलाई को हुई थी. उसके बाद 18 जुलाई को दूसरा और 22 जुलाई तीसरा मामला सामने आया था.

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दिल्ली में मिला मंकीपॉक्स का पहला मरीज (फाइल फोटो)
दिल्ली में मिला मंकीपॉक्स का पहला मरीज (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • दिल्ली में मंकीपॉक्स का पहला मामला
  • केरल में पहले मिल चुके हैं तीन मरीज

देश की राजधानी दिल्ली में मंकीपॉक्स का पहला मामला सामने आया है. इस मरीज की कोई विदेशी कोई ट्रैवल हिस्ट्री नहीं है.  इससे पहले केरल में मंकीपॉक्स के तीन मरीज मिल चुके हैं. ये तीनों ही मरीज यूएई से लौटे थे और वहीं पर ये किसी संक्रमित के संपर्क में आए थे. 

दिल्ली में मिले नए मरीज को लोक नायक अस्पताल में आइसोलेट किया गया है. स्वास्थ्य मंत्रालय ने 34 वर्षीय व्यक्ति में संक्रमण की पुष्टि करते हुए बताया है कि इसकी कोई ट्रैवल हिस्ट्री नहीं है. यानी अब तक मिले चार मरीजों में ये पहला ऐसा मामला है, जिसकी कोई ट्रैवल हिस्ट्री नहीं है. इस मरीज को तेज बुखार और स्किन में घावों के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था. इस मामले की जांच करने के लिए आज दोपहर 3 बजे DGHS की ओर से समीक्षा बैठक की जाएगी. 

केजरीवाल का ट्वीट- घबराने की जरूरत नहीं

दिल्ली के अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट कर बताया कि दिल्ली में मंकीपॉक्स का पहला मामला सामने आया है. मरीज रिकवर हो रहा है. घबराने की जरूरत नहीं है, स्थिति नियंत्रण में है. हमने एलएनजेपी में अलग आइसोलेशन वार्ड बनाया है. हमारी सबसे अच्छी टीम दिल्लीवासियों में मंकीपॉक्स को फैलने से रोकने और उनकी रक्षा करने के लिए है. 

14 जुलाई को मिला था केरल में पहला केस

इससे पहले केरल में 14 जुलाई को मंकीपॉक्स का पहला मामला सामने आया था. मंकीपॉक्स के पहले मामले की पुष्टि खुद केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने की थी. वह यूएई से लौटा था. मंकीपॉक्स के लक्षण दिखने के बाद उसे केरल के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी पुणे में उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी. 

WHO ने घोषित की इमरजेंसी

इस केस के महज चार दिन बाद यानी 18 जुलाई को केरल में दूसरे मामले की पुष्टि हुई थी. ये शख्स भी दुबई से लौटा था. इसके बाद 22 जुलाई को तीसरे मामले की पुष्टि हुई. इन तीनों की मामलों में यूएई कनेक्शन सामने आया था. इन मरीजों के संपर्क में आए लोगों पर निगरानी की जा रही है. 

दुनियाभर में तेजी से फैल रहे मंकीपॉक्स को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने शनिवार को ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी की घोषणा कर दी है. WHO के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयसस ने कहा कि मंकीपॉक्स का प्रकोप अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता करने वाला है. 

क्या है मंकीपॉक्स? 

- अमेरिका के सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल (CDC) के मुताबिक, पहली बार ये बीमारी 1958 में सामने आई थी. तब रिसर्च के लिए रखे गए बंदरों में ये संक्रमण मिला था. इसलिए इसका नाम मंकीपॉक्स रखा गया है. इन बंदरों में चेचक जैसी बीमारी के लक्षण दिखे थे. 

- विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, इंसानों में मंकीपॉक्स का पहला मामला 1970 में सामने आया था. तब कॉन्गो के रहने वाले एक 9 साल के बच्चे में ये संक्रमण मिला था. 1970 के बाद 11 अफ्रीकी देशों में इंसानों के मंकीपॉक्स से संक्रमित होने के मामले सामने आए थे. 

- दुनिया में मंकीपॉक्स का संक्रमण अफ्रीका से फैला है. 2003 में अमेरिका में मंकीपॉक्स के मामले सामने आए थे. सितंबर 2018 में इजरायल और ब्रिटेन में मंकीपॉक्स के मामले सामने आए थे. मई 2019 में सिंगापुर में भी नाइजीरिया की यात्रा कर लौटे लोगों में मंकीपॉक्स की पुष्टि हुई थी. 

- मंकीपॉक्स को लेकर इंग्लैंड की एजेंसी यूके हेल्थ सिक्योरिटी एजेंसी (UKHSA) ने कहा है कि अब मंकीपॉक्स का वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में ट्रांसफर होने लगा है. 

क्या हैं मंकीपॉक्स के लक्षण? 

- मंकीपॉक्स वायरस का इन्क्यूबेशन पीरियड 6 से 13 दिन तक होता है. कई बार 5 से 21 दिन तक का भी हो सकता है. इन्क्यूबेशन पीरियड का मतलब ये होता है कि संक्रमित होने के बाद लक्षण दिखने में कितने दिन लगे. 

- संक्रमित होने के पांच दिन के भीतर बुखार, तेज सिरदर्द, सूजन, पीठ दर्द, मांसपेशियों में दर्द और थकान जैसे लक्षण दिखते हैं. मंकीपॉक्स शुरुआत में चिकनपॉक्स, खसरा या चेचक जैसा दिखता है. 

- बुखार होने के एक से तीन दिन बाद त्वचा पर इसका असर दिखना शुरू होता है. शरीर पर दाने निकल आते हैं. हाथ-पैर, हथेलियों, पैरों के तलवों और चेहरे पर छोटे-छोटे दाने निकल आते हैं. ये दाने घाव जैसे दिखते हैं और खुद सूखकर गिर जाते हैं.  

- शरीर पर उठने वाले इन दानों की संख्या कुछ से लेकर हजारों तक हो सकती है. अगर संक्रमण गंभीर हो जाता है तो ये दाने तब तक ठीक नहीं होते, जब तक त्वचा ढीली न हो जाए.
 

 

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