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महबूबा मुफ्ती ने ज्ञानवापी मामले में कोर्ट के फैसले पर उठाए सवाल, बोलीं- इससे भावनाएं भड़केंगी

महबूबा मुफ्ती ने कहा कि पूजा स्थल अधिनियम के बावजूद ज्ञानवापी पर अदालत का फैसला दंगा भड़काएगा और एक सांप्रदायिक माहौल पैदा करेगा. लेकिन ये विडंबना है कि ये सब बीजेपी के एजेंडे में है. उन्होंने कहा कि ये दुखद स्थिति है कि कोर्ट अपने स्वयं के फैसलों का पालन नहीं करती हैं. 

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जम्मू कश्मीर की पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती
जम्मू कश्मीर की पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती

जम्मू कश्मीर की पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती ने वाराणसी की ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी मामले में कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाए हैं. महबूबा मुफ्ती ने कहा कि प्लेस ऑफ वर्शिप एक्ट के बावजूद ज्ञानवापी पर कोर्ट के फैसले से दंगे भड़केंगे और सांप्रदायिक माहौल बनेगा. इतना ही नहीं उन्होंने कहा कि कोर्ट अपने स्वयं के फैसलों का पालन नहीं करती. 

दरअसल, वाराणसी की जिला कोर्ट ने सोमवार को ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी मामले में फैसला सुनाया था. कोर्ट ने श्रृंगार गौरी की पूजा की अनुमति मांगने वाली याचिका को सुनवाई के योग्य माना था. इस मामले में अब 22 सितंबर को सुनवाई होगी. इस फैसले को लेकर महबूबा मुफ्ती ने बीजेपी पर भी निशाना साधा. 

 

महबूबा बोलीं- कोर्ट अपने फैसलों का पालन नहीं करता

महबूबा मुफ्ती ने ट्वीट कर कहा कि पूजा स्थल अधिनियम के बावजूद ज्ञानवापी पर अदालत का फैसला दंगा भड़काएगा और एक सांप्रदायिक माहौल पैदा करेगा. लेकिन ये विडंबना है कि ये सब बीजेपी के एजेंडे में है. उन्होंने कहा कि ये दुखद स्थिति है कि कोर्ट अपने स्वयं के फैसलों का पालन नहीं करती हैं. 

उन्होंने कहा कि अदालत खुद ही अपनी रूलिंग को नहीं मानती. अदालत ने कहा था कि जहां मंदिर है या जहां मस्जिद है, वहां स्टेटस को मेंटेन किया जाएगा. अगर कोर्ट अपनी रोलिंग को नहीं मानता है तो मैं क्या करूं?

जम्मू कश्मीर में कब चुनाव होंगे? महबूबा ने दिया ये जवाब

जम्मू कश्मीर में कब चुनाव होंगे? इस सवाल पर महबूबा मुफ्ती ने कहा कि यह तो पीएम मोदी या फिर अडानी या अंबानी बता सकते हैं. महबूबा मुफ्ती ने कहा कि कश्मीरी पंडितों का प्रतिनिधिमंडल मुझसे मिला है. उनकी मांग है कि उन्हें जम्मू में रिलोकेट किया जाए, क्योंकि वे अपने आप को यहां सुरक्षित नहीं मान रहे हैं. उन्होंने कहा कि किसानों की भी काफी समस्याएं हैं. किसानों का डेलिगेशन हमसे मिला था. उनका कहना है कि नहर टूट चुकी है, लेकिन कोई सुध नहीं ले रहा है. किसानों की धान की फसल में पानी नहीं लग रहा है. फसल भी बर्बाद हो चुकी है. 

 

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