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कोविशील्ड वैक्सीन को असुरक्षित घोषित करने की मांग पर मद्रास HC का केंद्र को नोटिस

सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की कोविशील्ड वैक्सीन को असुरक्षित घोषित करने की याचिका पर मद्रास हाईकोर्ट ने केंद्र और डीसीजीआई से इस संबंध में 26 मार्च तक जवाब देने को कहा है. वहीं सीरम ने याचिकाकर्ता पर 100 करोड़ का मानहानि का केस किया है.

मद्रास हाईकोर्ट मद्रास हाईकोर्ट
स्टोरी हाइलाइट्स
  • कोविशील्ड वैक्सीन को असुरक्षित घोषित करने की याचिका
  • केंद्र और DGCI को 26 मार्च तक जवाब देने का निर्देश
  • सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया से 5 करोड़ का हर्जाना मांगा
  • आसिफ के खिलाफ सीरम का 100 करोड़ का मानहानि केस

मद्रास हाईकोर्ट ने शुक्रवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) को नोटिस जारी कर एक याचिका पर निर्देश मांगा, जिसमें कोविशील्ड वैक्सीन को असुरक्षित घोषित करने की मांग की गई है.

कोविशील्ड उन दो वैक्सीन में से एक है, जिसे भारत में आपातकालीन उपयोग की मंजूरी दी गई है और इसका उपयोग राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान के लिए किया जा रहा है, जिसकी शुरुआत 16 जनवरी से हो चुकी है.

वैक्सीन को ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और दवा निर्माता कंपनी एस्ट्राजेनेका द्वारा विकसित किया गया था, और इसका निर्माण सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) द्वारा किया जा रहा है. 

मद्रास हाईकोर्ट आसिफ रियाज की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जो वॉलंटियर के रूप में कोविशील्ड के क्लीनिकल ट्रायल में शामिल हुआ था. आसिफ रियाज ने कोर्ट से कोविशील्ड को "असुरक्षित" घोषित करने का अनुरोध किया है. हाईकोर्ट ने केंद्र और डीसीजीआई से इस संबंध में 26 मार्च तक जवाब देने को कहा है.

याचिका क्या है?

आसिफ रियाज ने अपनी याचिका में कहा है कि उन्होंने पिछले साल 1 अक्टूबर को कोविशील्ड की खुराक ली थी. उन्होंने दावा किया कि 10 दिनों के बाद उसे कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ा और 16 दिन अस्पताल में भर्ती भी रहा. उन्होंने सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया से 5 करोड़ रुपये का मुआवजा भी मांगा है.

आसिफ रियाज ने कहा, 'मुझे विश्वास है कि मुझे न्याय मिलेगा. चिकित्सा विशेषज्ञों ने मुझे बताया है कि जो कुछ भी मैंने झेला, वो (कोविशील्ड) वैक्सीन के कारण था जो मैंने ली थी. मेरे पास कोर्ट का दरवाजा खटखटाने के अलावा और कोई विकल्प नहीं था और मुझे उम्मीद है कि कोर्ट इस मामले के तथ्यों के आधार पर निष्पक्ष मूल्यांकन करेगा. मैंने कई चिकित्सा विशेषज्ञों से परामर्श किया है, जिन्होंने बताया है कि मुझे वैक्सीन की वजह से दिक्कतें हुईं.'

आजतक/इंडिया टुडे टीवी को पहले दिए एक साक्षात्कार में आसिफ ने अपने टीकाकरण के बाद के अनुभव को बताया था. उन्होंने कहा कि उसने 1 अक्टूबर को वैक्सीन डोज लिया था, लेकिन कुछ दिनों बाद उसे सिरदर्द हुआ और अगले 10 दिनों में क्या हुआ उसे वह याद नहीं कर सकता.

आसिफ ने कहा, 'मुझे कुछ याद नहीं है. मैं अब जो कह रहा हूं वह सेकंड हैंड नॉलेज है, जिसके आधार पर लोगों ने मुझे मेरी स्थिति के बारे में बताया. मैं किसी को नहीं पहचान पा रहा था. दिन के अंत में, एक डॉक्टर मेरे घर आया और फिर एक एम्बुलेंस मुझे अस्पताल ले गई. मुझे अगले 10 दिनों के बारे में कुछ भी याद नहीं है. मैं आईसीयू में था. मैं 10 दिनों के बाद अपने कमरे में शिफ्ट किया गया.

सीरम का 100 करोड़ का केस

इस बीच, सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने आसिफ रियाज के खिलाफ 100 करोड़ रुपये का मानहानि का मुकदमा दायर कर दिया. आसिफ द्वारा लगाए गए आरोपों का जवाब देते हुए सीरम ने कहा कि वे "दुर्भावनापूर्ण और गलत" थे.

सीरम इंस्टीट्यूट ने अपने बयान में यह भी कहा कि कंपनी की प्रतिष्ठा को बनाए रखने के लिए कानूनी नोटिस भेजा गया है.

 

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